Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Monsooon Update: भारत में कैसे बदल गया मानसून का पैटर्न? जलवायु परिवर्तन समेत ये तीन हैं मुख्य वजहें

Monsooon Update: भारत में आज भी एक बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है और अच्छी फसल के लिए समय पर मानसून का आना जरूरी है। हर साल मानसून के पैटर्न में थोड़ा-बहुत बदलाव हो रहा है और इसका असर भी नजर आने लगा है। इस साल अगस्त से भी ज्यादा बारिश का अनुमान सितंबर में है और भारी बारिश की वजह से कई इलाके बाढ़ प्रभावित हैं। मौसम में होने वाला यह क्रमिक बदलााव भारतीय कृषि और जीवनशैली पर भी गहरा असर डाल रहा है। हाल के अध्ययनों से पता चला है कि मानसून की वापसी में लगातार देरी हो रही है, जिसके चलते ऋतु चक्र (seasonal cycle) बदल रहा है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और Down To Earth जैसी संस्थाओं की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 50 वर्षों यानी 1970 से 2020 के बीच मानसून की अवधि हर दशक में औसतन 1.6 दिन बढ़ी है। यह बदलाव खासकर मानसून के लौटने में देरी की वजह से देखा जा रहा है। इस देरी की 3 वजहे हैं।

Monsooon Update

Monsooon में हो रहे बदलाव के पीछे कई अहम कारक

विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन (climate change) और औसत तापमान में वृद्धि, ग्लोबल वॉर्मिंग (global warming) का असर दुनिया भर के मौसम पर पड़ा है। तापमान बढ़ने से समुद्र और जमीन दोनों पर नमी लंबे समय तक बनी रहती है, जिससे मानसून की सक्रियता बढ़ जाती है। इसका असर देर तक चलता है। इसके अलावा, एल नीनो (El Niño) जैसी समुद्री घटनाएं भी मानसून की अनियमितता को बढ़ा देती हैं।

यह भी पढ़ें: IMD Alert: मानसून की तबाही अभी और रहेगी जारी, मौसम विभाग ने नए अलर्ट में बताया मूसलाधार बारिश की वजह

पिछले 100 सालों में बारिश के पैटर्न में हो रहा क्रमिक बदलाव

सरकारी रिपोर्टों के मुताबिक, 1901 से 2018 की अवधि में भारतीय उपमहाद्वीप में बारिश के पैटर्न में बदलाव हो रहा है। भारतीय सतह के तापमान में 0.7 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है। समुद्री सतह के तापमान में भी वृद्धि देखी गई है। उष्णकटिबंधीय हिंद महासागर के समुद्र की सतह के तापमान में 1951 से 2015 के बीच लगभग 1 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि देखने को मिली। हवा जितनी गर्म होती है, वह उतनी ही ज्यादा नमी धारण कर सकती है। नमी वाली हवा से ज्यादा तेज बरसात की संभावना रहती है। 1950 के बाद से अब तक मई में होने वाली बारिश में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

मध्यम बारिश के दिन हो रहे कम

आईएमडी की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो दशक में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस पर बनने वाले दबाव की प्रक्रिया और स्वरूप में फर्क आया है। इसकी वजह से मध्यम स्तर की बारिश के दिनों में 6 फीसदी से ज्यादा की कमी हुई है। इसकी तुलना में तीव्र बारिश वाले दिन बढ़ने लगे हैं। यही वजह है कि पिछला एक दशक देश में कई भयावह बाढ़ भी लेकर आया है। जंगलों की कटाई और मिट्टी के जड़ों को छोड़ने की वजह से भूस्खलन की घटनाएं बढ़ गई हैं। यही वजह है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून का अवधि 1971-2020 में 1.6 दिन प्रति दशक के हिसाब से बढ़ी है। इस साल मानसून की विदाई अक्टूबर के पहले सप्ताह में होगी।

यह भी पढ़ें: IMD Rain Alert: उत्तर भारत को जल्द मिलेगी बारिश से राहत, मौसम विभाग ने बता दिया कब लौटेगा मानसून?

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+