Money Laundering मामले में ED की दो टूक, वीवो इंडिया ने जघन्य आर्थिक अपराध किया

मनी लॉन्ड्रिंग केस में वीवो ने जघन्य आर्थिक अपराध किया है। दिल्ली हाईकोर्ट में केस की सुनवाई के दौरान ईडी ने यह बात कही।

नई दिल्ली, 25 जुलाई : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) वीवो इंडिया के मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया है कि वीवो इंडिया (vivo India) के खिलाफ पीएमएलए के प्रावधानों के अनुसार सख्ती से जांच की गई है। ईडी के मुताबिक वीवो का अपराध मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित है। यह जघन्य आर्थिक अपराध है।

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मनी लॉन्ड्रिंग अपराध की जांच

वित्तीय जांच एजेंसी- ईडी की ओर से दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर हलफनामे में चीनी स्मार्टफोन निर्माता- वीवो की ओर से दायर याचिका का विरोध किया गया। ईडी ने कहा कि याचिकाकर्ता वीवो की व्यावसायिक व्यस्तता और उसकी प्रतिष्ठा का हवाला देना मनी लॉन्ड्रिंग अपराध की जांच के दौरान प्रासंगिक नहीं हैं।

कानूनी तरीके से वीवो बैंक खाते फ्रीज

हलफनामे में आगे कहा गया है कि कुछ चीनी नागरिकों सहित वीवो इंडिया के कर्मचारियों ने ईडी की कार्यवाही में सहयोग नहीं किया। ईडी का आरोप है कि जांच के दौरान ईडी की खोज टीम द्वारा बरामद डिजिटल उपकरणों को हटाने और छिपाने की कोशिश की गई। ईडी ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता के बैंक खातों को फ्रीज करते समय कानून की उचित प्रक्रिया का पालन किया गया है। ऐसे में ईडी की कार्रवाई को अनुच्छेद 21 का उल्लंघन नहीं कहा जा सकता।

धोखाधड़ी पर ईडी की सख्ती

हाईकोर्ट में ईडी की एफिडेविट में कहा गया है कि अनुच्छेद 19 (1) (जी) के तहत वैध व्यापार, व्यवसाय और बिजनेस के संबंध में दी गई स्वतंत्रता है। इसके इस्तेमाल से धोखाधड़ी और पहचान की गलत व्याख्या के आधार पर किए गए व्यवसायों को कानून की नजर में सही नहीं ठहराया जा सकता।

28 जुलाई को मामले की सुनवाई

बता दें कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने हाल ही में वीवो मोबाइल को 950 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी प्रस्तुत करने के बाद बैंक खातों को संचालित करने की अनुमति दी थी। VIVO ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा उनके बैंक खातों को फ्रीज करने को चुनौती दी है। कोर्ट ने ईडी को याचिका पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. मामले को आगे की सुनवाई के लिए 28 जुलाई को सूचीबद्ध किया गया है।

बैंक अकाउंट संचालन पर हाईकोर्ट

अदालत ने वीवो को 950 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी प्रस्तुत करने और उसमें पहले से पड़े 251 करोड़ रुपये की शेष राशि को बनाए रखने की शर्त पर अपना बैंक खाता संचालित करने की अनुमति दी थी। इसके अलावा हाईकोर्ट ने वीवो से कहा है कि ईडी को भेजे गए धन (remittances) के बारे में विस्तार से जानकारी दें। कोर्ट ने यह भी कहा कि बैंक गारंटी सात कार्य दिवसों के भीतर जमा की जाए।

वीवो के नौ बैंक खाते फ्रीज

वरिष्ठ अधिवक्ता, सिद्धार्थ अग्रवाल, वीवो इंडिया की ओर से पैरवी कर रहे हैं। उन्होंने कहा, कंपनी के बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है। सभी लेनदेन और धन के प्रवाह को भी फ्रीज कर दिया गया है। याचिकाकर्ता वीवो ने कहा, वह व्यवसाय संचालित करने में सक्षम नहीं है। कोई भी कंपनी बिना बैंक खाते के काम नहीं कर सकती। नौ बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है। इन खातों से बकाया और सीमा शुल्क का भुगतान किया जाता है। वीवो ने कहा, इन खातों को संचालित करना जरूरी है। व्यवसाय चलाने की क्षमताओं के लिए खातों को डिफ्रीज किया जाना जरूरी है। ईडी के वकील ने कहा "अपराध की आय" का खुलासा किया गया है, लेकिन प्रकृति अभी भी नहीं बताई गई है। असली प्रकृति की खोज की जानी है।

पूर्व निदेशक कानून से भाग रहे

जवाबी दलील में ईडी के वकील जोहैब हुसैन ने तर्क दिया कि संदिग्ध राशि 1200 करोड़ रुपये है और केवल 251 करोड़ डेबिट किए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि GPICPL द्वारा याचिकाकर्ता को 1200 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था और इसके पूर्व निदेशक कानून से भाग रहे हैं।

बैंक खाते बंद होने पर Civil Death की आशंका

वीवो इंडिया के सिद्धार्थ अग्रवाल ने कहा, हम लेनदेन का साप्ताहिक या दैनिक विवरण देने के लिए तैयार हैं। सांस लेने की अनुमति दी जाए। कोई भी संगठन बैंक खाते के बिना काम नहीं कर सकता है। वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा भी वीवो इंडिया की पैरवी कर रहो हैं। उन्होंने कहा, कंपनी में 9,000 कर्मचारी हैं। ये एक दायित्व है। उन्होंने कहा, इसके खातों को फ्रीज करने से कंपनी में "नागरिक मृत्यु" (civil death) होगी।

वीवो पर दुनियाभर में असर पड़ेगा

वीवो इंडिया के वकील ने कहा, कंपनी के साथ गंभीर अन्याय होगा और कंपनी की प्रतिष्ठा और व्यावसायिक संचालन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। याचिका में कहा गया है कि बैंक खातों को फ्रीज करने से न केवल बैंक खातों के माध्यम से याचिकाकर्ता के मौजूदा / संभावित व्यवसाय संचालन में बाधा आएगी बल्कि भारत और दुनिया भर में याचिकाकर्ता के संचालन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

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