मोहनजोदड़ो की 'डांसिंग गर्ल' हैं देवी पार्वती, रिसर्च में दावा
बीएचयू के रिटायर्ड प्रोफेसर ठाकुर प्रसाद वर्मा ने अपनी रिसर्च के पक्ष में दावा किया कि जहां शिव हैं, वहां शक्ति भी होगी, इसीलिए वो डांसिंग गर्ल पार्वती ही हैं।
नई दिल्ली। मोहनजोदड़ो को लेकर भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (ICHR) की पत्रिका ने एक बड़ा खुलासा किया है। 'इतिहास' नाम की इस पत्रिका में बताया गया है कि मोहनजोदड़ो की पहचान बनने वाली मूर्ति 'डांसिग गर्ल' देवी पार्वती हैं। पत्रिका में बीएचयू के रिटायर्ड प्रोफेसर ठाकुर प्रसाद वर्मा की एक रिसर्च 'वैदिक सभ्यता के पुरातत्व' में ये बात कही गई है। इस रिसर्च के बाद सिंधु घाटी सभ्यता में भगवान शिव की पूजा होने का एक और प्रमाण सामने आया है। आपको बता दें कि दक्षिणपंथी इतिहासकार काफी पहले से कहते रहे हैं कि सिंधु घाटी सभ्यता में भगवान शिव की पूजा होती थी। इस नई रिसर्च ने इन दावों को और बल मिला है।

प्रोफेसर वर्मा की इस रिसर्च में बताया गया है कि मोहनजोदड़ो के अवशेषों में इस बात के भी प्रमाण है कि उस समय भगवान शिव की पूजा होती थी। प्रोफेसर वर्मा के मुताबिक प्रसिद्ध 'सील 420' में योग की मुद्रा में मिली और जानवरों से घिरी सींग वाली आकृति उस समय शिवपूजा होने का प्रमाण है। इस आकृति को लेकर अक्सर बहस होती रही है। पुरातत्वविद जॉन मार्शल ने 1931 में इस आकृति को भगवान शिव की मूर्ति बताया था। हालांकि इतिहासकारों ने इसे एक महिला की मूर्ति बताते हुए भगवान शिव वाले दावे को नकार दिया।'जहां शिव हैं, वहां शक्ति भी होगी'
'जहां शिव हैं, वहां शक्ति भी होगी'
सिंधु घाटी सभ्यता में भगवान शिव की पूजा होती थी, इस तथ्य को पुख्ता करने के लिए प्रोफेसर वर्मा ने दावा किया है कि मोहनजोदड़ो के राजा के शॉल पर पत्तियों की एक आकृति है, जो इस बात को साबित करती है कि राजा हिंदू देवी-देवताओं का अनुयायी था। उन्होंने कहा कि पत्तियों की आकृति वर्तमान में पूजा के लिए प्रयोग किए जाने वाले बेल पत्र के समान है। इसके आगे उन्होंने कहा कि जहां शिव हैं, वहां शक्ति भी होगी, इसीलिए वो डांसिंग गर्ल पार्वती ही हैं। आपको बता दें कि हड़प्पा सभ्यता में मिले किसी भी अवशेष को किसी इतिहासकार ने आज तक पार्वती नहीं बताया है। ये भी पढ़ें- अत्यधिक दवाब भी आपको बनाता है बुद्धिमान और आकर्षक












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