'देश में कुछ ऐसी ताकते जो लोगों में मतभेद पैदा करना चाहती'
विजयदशमी के मौके पर नागपुर में आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने बांग्लादेश के हालात पर चिंता जाहिर करते हुए भारत को सतर्क रहने की सलाह दी। मोहन भागवत ने कहा बांग्लादेश में चर्चा चलती है कि भारत से हमको खतरा है, भारत से खतरा है इसलिए पाकिस्तान को साथ लेना चाहिए, वही हमारा प्रामाणिक मित्र है। क्योंकि पाकिस्तान के पास न्यूक्लियर हथियार है, हम भारत को रोक सकते हैं।
जिस बांग्लादेश के निर्माण में भारत की पूरी सहायता हुई, जिस बांग्लादेश के साथ कोई भेदभाव नहीं किया गया, आगे भी कभी नहीं होगा। इस तरह की चर्चा हो रही है।

यह किन-किन देशों के हित की बात है, सोचने वाले यह समझते हैं, नाम लेने की जरूरत नहीं है। हमारे देश में ऐसा हो, इस तरह की इच्छा, कुछ लोग ऐसा चाहते हैं, कुछ लोग नहीं चाहते हैं कि भारत आगे बढ़े।
इतना बड़ा समाज है, छोटी-मोटी समस्याएं सबकी रहती हैं, बड़ी समस्याएं भी रहती हैं। समाज की स्थिति में सबकुछ ठीक रहता है, ऐसा नहीं है, सुधारने की हमेशा गुंजाइश होती है।
इन सबको लेकर असंतोष उत्पन्न करना, लोगों को उग्र बनाना, व्यवस्था-कानून, सत्ता-प्रशासन को लेकर अनादर का व्यवहार सिखाना, इससे उस देश पर बाहर से वर्चस्व चलाना आसान होता है। पहले जैसा आपस में अब युद्ध करना आसान नहीं है। इस प्रकार के युद्ध को मंत्र विप्लव कहते हैं।
ऐसी भ्रम की स्थिति में उनको देश के अंदर जाने-अंजाने साथी मिल जाते हैं। अपना देश प्रजातांत्रिक देश है, लेकिन समाज में यह अलगाव-टकराव, देश की एकता, एकात्मता, देश के वैभव संपन्न होने के प्रयास से बड़े बन गए।
दलों के स्वार्थ, समाज की सद्भावना और देश की एकात्मकता को गौड़ बनाकर चलाए गए तो किसी एक का पक्ष लेकर उनके साथ खड़े रहना, खुद सामने नहीं आना। इसे ऑल्टरनेट पॉलिटिक्स कहते हैं, ये लोग उसकी आड़ में अपना एजेंडा चलाते हैं।
पाश्चात्य देशों में इस तरह की पुस्तकें निकल रही हैं, जिसमे इस तरह के उदाहरण स्पष्ट तौर पर देखने को मिल रहे हैं। भारत के चारो ओर विशेषकर सीमावर्ती देशों में क्या-क्या हो रहा है, हम देश सकते हैं।
भागवत ने बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के भीतर एकता के महत्व पर जोर दिया और कट्टरपंथी ताकतों के उत्पीड़न का मुकाबला करने के लिए अहिंसक रुख की वकालत की। उन्होंने सुझाव दिया कि यह एकता यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है कि समुदाय विभाजन के आगे न झुके जो इसके ताने-बाने को कमजोर करते हैं।
कोलकाता की घटना का जिक्र
भागवत ने भारतीय समाज के सामने आने वाली आंतरिक चुनौतियों पर भी बात की, खास तौर पर आरजी कर अस्पताल जैसी घटनाओं की आलोचना करते हुए कहा कि ये सामाजिक मूल्यों को कलंकित करने वाली घटनाएं हैं।
उन्होंने ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सतर्कता की आवश्यकता पर जोर दिया और एकता को बढ़ावा देने और विभाजन से बचने के साधन के रूप में त्योहारों को सामूहिक रूप से मनाने का आह्वान किया।
इसके अलावा, उन्होंने बच्चों के बीच मोबाइल उपकरणों के प्रसार पर चिंता व्यक्त की, सामग्री की खपत पर नियंत्रण की कमी को एक चिंताजनक प्रवृत्ति के रूप में देखा, जिसके लिए परिवारों और कानून प्रवर्तन दोनों को हस्तक्षेप करने की आवश्यकता है।
नशे पर जाहिर की चिंता
अपने भाषण में भागवत ने युवाओं में बढ़ती नशीली दवाओं की समस्या पर भी दुख जताया और अपनी बात को उन महाकाव्यों के संदर्भों के साथ स्पष्ट किया, जिनमें अपमानजनक कृत्यों के कारण महाभारत और रामायण जैसी महान गाथाएँ रची गईं। इन उदाहरणों ने हाल की सामाजिक घटनाओं की गंभीरता और उनके गहरे दुष्परिणामों को रेखांकित किया।
पर्यावरण के मुद्दों पर, भागवत ने टिकाऊ प्रथाओं की वकालत की, एकल-उपयोग प्लास्टिक के उपयोग के खिलाफ आग्रह किया और न केवल ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बल्कि घरों के अंदर भी गमले की खेती के माध्यम से पेड़ लगाने को प्रोत्साहित किया।
फैशनेबल पौधों का चलन
उन्होंने कुछ फैशनेबल पेड़ों के रोपण को रोकने के लिए सरकार के प्रयासों पर प्रकाश डाला जो हानिकारक साबित हुए हैं, इसके बजाय नीम के पेड़ जैसी लाभकारी प्रजातियों की खेती की वकालत की। इन कार्यों के माध्यम से, उन्होंने सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में पर्यावरण संरक्षण के साथ सक्रिय जुड़ाव का संदेश दिया।












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