मोदी सरनेम मामला: सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी की सजा पर रोक लगाते हुए क्या-क्या कहा? 5 बड़ी बातें
सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरनेम मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को बड़ी राहत दी है। सर्वोच्च अदालत ने इस आपराधिक मानहानि केस में उनकी सजा पर रोक लगा दी है। इस केस में दो साल की सजा मिलने की वजह से ही राहुल गांधी की लोकसभा की सदस्यता चली गई।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट की ओर से इस मामले पर आए फैसले पर भी सवाल उठाए हैं। अदालत ने साथ ही साथ राहुल से भी कहा है कि सार्वजनिक जीवन में संभलकर बोलना चाहिए।

लाइव लॉ के मुताबिक जब राहुल के वकील अभिषेक सिंघवी ने इस मामले के तत्काल निपटारे के लिए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीआर गवई को धन्यवाद देते हुए कहा कि सिर्फ एक शब्द जोड़ा जा सकता है- 'कथित' टिप्पणी। इसपर जस्टिस गवई ने कहा- 'कथित' टिप्पणी।
'ट्रायल जज ने अधिकतम सजा देने का कोई कारण नहीं दिया'
जस्टिस गवई ने राहुल गांधी को राहत देते हुए ये तर्क दिया कि, 'इस बात को ध्यान में रखते हुए कि ट्रायल जज ने अधिकतम सजा देने का कोई कारण नहीं दिया है। इसलिए अंतिम फैसले तक दोषसिद्धि पर रोक लगाए जाने की आवश्यकता है।'
'अगर सजा एक दिन कम होती तो यह प्रावधान नहीं लागू होता'
अदालत ने कहा है, 'खासकर जब अपराध असंज्ञेय, जमानती और कंपाउंडेबल है, ट्रायल कोर्ट के जज से उम्मीद की जाती है कि अधिकतम सजा देने का कारण दें।' जज ने कहा है, 'ध्यान देने की बात यह है कि इस अधिकतम सजा के कारण ही जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधान लागू हुए हैं। अगर सजा एक दिन कम होती तो यह प्रावधान नहीं लागू होता।'
'फैसले से चुनने वाले मतदाताओं पर भी असर पड़ा है'
अदालत ने कहा कि, 'इसका प्रभाव व्यापक हैं... इससे न सिर्फ याचिकाकर्ताओं का सार्वजनिक जीवन में बने रहने के अधिकार पर असर पड़ा है, बल्कि उन वोटरों का भी, जिन्होंने उन्हें चुना है।' जस्टिस गवई ने कहा, 'हो सकता है कि यदि ऐसी टिप्पणियां याचिकाकर्ता की ओर से ये बातें कहने से पहले आतीं, तो वह ऐसी टिप्पणियां करने से पहले अधिक सावधान रहते, जो कथित तौर पर अपमानजनक हैं।
'उन्हें ज्यादा सावधान रहना चाहिए था'
कोई संदेह नहीं कि अभिव्यक्ति अच्छे नहीं हैं, सार्वजनिक जीवन में रहने वाले व्यक्ति से सार्वजनिक भाषणों में अधिक सावधानी बरतने की उम्मीद की जाती है। जैसा कि इस कोर्ट ने अवमानना याचिका में उनके हलफनामे को स्वीकार करते हुए कहा कि उन्हें ज्यादा सावधान रहना चाहिए था।'
'अपीलीय और हाई कोर्ट ने काफी पन्ने खर्च किए, लेकिन....'
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है, 'हालांकि अपीलीय और हाई कोर्ट ने दोषसिद्धि पर रोक को खारिज करने में काफी पन्ने खर्च किए हैं, लेकिन उनके आदेशों में इन पहलुओं पर गौर नहीं किया गया है।'
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