ओबामा के कार्यकाल का आखिरी दौर और भारत के साथ आ गई खटास!
नई दिल्ली/वाशिंगटन। राष्ट्रपति बराक ओबामा के पास अब सिर्फ सात माह ही बचे और नवंबर में होने वाले चुनावों के बाद अमेरिका को एक नया राष्ट्रपति मिल जाएगा। उनके जाने से पहले भारत और अमेरिका के रिश्तों में एक नया आयाम देखने को मिला है। लेकिन अब ताजा घटनाक्रम के बाद तो ऐसा लग रहा है कि न सिर्फ ओबामा और मोदी बल्कि अमेरिका और भारत के रिश्तों में खटास आ गई है।

राष्ट्रपति ओबामा ने पिछले दिनों वाशिंगटन में आयोजित न्यूक्लियर सिक्योरिटी समिट में कहा कि भारत और पाकिस्तान दोनों देश अपने-अपने परमाणु हथियारों पर नियंत्रण लगाएं और इसमें कमी लाएं।
ओबामा ने यह बात उस समय कही जब दुनिया के 50 देशों के राष्ट्राध्यक्षों के बीच भारत से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कार्यक्रम में शिरकत कर रहे थे।
ओबामा ने कहा परमाणु हथियार कम करें भारत पाक
भारत ने ओबामा के इस बयान पर प्रतिक्रिया जाहिर की है। भारत की ओर से कहा गया है कि राष्ट्रपति ओबामा को शायद भारत के सुरक्षा हालात की पूरी जानकारी नहीं है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा कि पारंपरिक रूप से भारत ने कभी किसी पड़ोसी के खिलाफ कोई सैन्य पहल नहीं की है। स्वरूप ने साफ कर दिया कि भारत ने हमेशा से ही पहले परमाणु हथियारों को प्रयोग न करने की नीति अपनाई है।
डर रहे हैं ओबामा कहीं ISIS के हाथ न लग जाएं न्यूक्लियर वेंपेंस
वहीं अमेरिका ने ओबामा के विचारों को दोहराते हुए कहा कि देश भारत की सुरक्षा संबंधी चिंताओं से सहमत है। व्हाइट हाउस के प्रेस सेक्रेटरी जोश अर्नेस्ट ने कहा कि राष्ट्रपति के बयान दक्षिण एशिया में परमाणु एवं मिसाइल विकास को लेकर हमारी चिंताओं से प्रेरित हैं।
हम हथियारों के बढते जखीरे, विशेष रूप से युद्धक्षेत्र में इस्तेमाल के लिए डिजाइन किए गए सामरिक परमाणु हथियारों से जुड़ी सुरक्षा संबंधी बढ़ती चुनौतियों को लेकर खास तौर पर चिंतित हैं।
उन्होंने कहा कि ये प्रणालियां चिंता का विषय हैं क्योंकि उनके आकार के कारण उन के चोरी होने का खतरा है। भारत और पाकिस्तान के बीच पारंपरिक युद्ध होने की स्थिति में इन छोटे हथियारों के मद्देनजर परमाणु हथियारों के प्रयोग का खतरा बढ गया है।












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