चंद्रबाबू या नीतीश के समर्थन के बिना भी मोदी सरकार संभव! जानें कैसे ये भी है मुमकिन?

Modi Government News: 18वीं लोकसभा की तस्वीर पूरी तरह से साफ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाले एनडीए गठबंधन को 293 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत मिला है। विपक्षी इंडिया ब्लॉक के पास टीएमसी समेत सीटों का आंकड़ा 234 है। अन्य सांसदों की संख्या 9 और निर्दलीयों की 7 है।

लेकिन, पीएम मोदी की नई सरकार के गठन को लेकर अटकलबाजियों का दौर भी गर्म है। इसकी वजह ये है कि भारतीय जनता पार्टी के पास सिर्फ 240 सांसद हैं और वह अपने दम पर बहुमत के 272 वाले आंकड़े से 32 सीट दूर रह गई है।

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टीडीपी और जेडीयू को लेकर अटकलबाजियों का दौर
अभी तक चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार का रुख साफ है कि वह एनडीए के साथ हैं और केंद्र में फिर से एनडीए की ही सरकार बनने जा रही है। लेकिन, नीतीश कुमार का पलटी मार वाला ट्रैक रिकॉर्ड ऐसा रहा है कि उनके बारे में कुछ भी अंदाजा लगाना खुद उनके सबसे करीबी सहयोगियों के लिए भी संभव नहीं है।

जहां तक चंद्रबाबू नायडू की बात है तो उनका बीजेपी के साथ बहुत लंबे समय तक गठबंधन रह चुका है। लेकिन, 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले उनकी खटपट हो गई थी तो उन्होंने बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए को हराने के लिए अपना पूरा दम लगा दिया था। दांव उलटा पड़ा और भाजपा और ज्यादा प्रचंड बहुमत से सत्ता में आई थी।

आंध्र प्रदेश के लिए नायडू को चाहिए केंद्र में स्थिर सरकार
लेकिन, अभी तथ्य ये है कि वे इस चुनाव से पहले ही काफी थक-हारकर वापस एनडीए में आए हैं। नए संसद भवन के उद्घाटन के मौके से लेकर अयोध्या में भगवान राम लला की प्राण प्रतिष्ठा का भी हिस्सा बन चुके हैं। एनडीए में वापसी होते ही, उनकी आंध्र प्रदेश में सत्ता में वापसी हुई है। उन्हें आंध्र प्रदेश के विकास के लिए केंद्र में विकास को प्राथमिकता देने वाली स्थिर सरकार की जरूरत है। इसलिए उन्होंने एनडीए में ही रहनी की बात दोहराई है।

चंद्रबाबू या नीतीश के समर्थन के बिना भी एनडीए सरकार संभव!
एनडीए की सहयोगियों में चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी के पास 16 और नीतीश कुमार के जेडीयू के पास 12 सांसद हैं। इसके बाद एकनाथ शिंदे की शिवसेना का स्थान है, जिसके पास 7 सांसद हैं।

अब अगर अटकलों के आधार पर हिसाब लगाएं तो बगैर टीडीपी के भी एनडीए के पास बहुमत का आंकड़ा संभव है: 293-16= 277 (272 के जादुई आंकड़े से 5 ज्यादा)।

इसी तरह से अगर जेडीयू के बगैर एनडीए सरकार के पास बहुमत के आंकड़े को देखें तो ये नंबर रहता है: 293-12= 281 (272 के जादुई आंकड़े से 7 ज्यादा)। मतलब, एनडीए सरकार को तभी दिक्कत होगी, जब यह दोनों पार्टियां ही गठबंधन छोड़ने का फैसला करें: 293-28= 265 (272 के जादुई आंकड़े से 7 कम)।

बहुमत के समीकरण को ये भी कर सकते हैं संतुलित
इन दोनों दलों के अलावा एनडीए के पास कुछ और जुगाड़ संभव है। जो अन्य 9 छोटे दल चुनाव जीते हैं और जो किसी गठबंधन के साथ नहीं हैं, उनमें से अधिकतर कभी न कभी एनडीए का हिस्सा रह चुके हैं और 7 निर्दलीय में से कुछ को छोड़कर भी इसके लिए बहुमत के समीकरण को संतुलित करने का काम कर सकते हैं।

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