इसबार TMC की मदद से Triple Talaq बिल पास करा सकती है BJP,समझिए कैसे?

नई दिल्ली- मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल के पहले ही हफ्ते में ट्रिपल तलाक बिल फिर से लोकसभा में लाकर जता चुकी है कि इस मुद्दे पर वह कितनी संजीदा है। पिछले कार्यकाल में राज्यसभा में एनडीए के पास बहुमत नहीं होने के चलते प्रधानमंत्री मोदी चाहकर भी इसपर कानून नहीं बना पाए थे। इसके चलते उन्हें हर 6 महीने में अध्यादेश लाकर इस कुप्रथा पर बैन लगाए रखना पड़ रहा है। राज्यसभा में अभी भी बीजेपी या एनडीए के पास पूर्ण बहुमत नहीं है। लेकिन, अब तृणमूल कांग्रेस के स्टैंड से लग रहा है कि वह सीधे नहीं, तो परोक्ष तौर पर ही सही राज्यसभा में इस बिल को पास कराने में इसबार मोदी सरकार की मदद कर सकती है। आइए समझने की कोशिश करते हैं ऐसी संभावना कैसे बन रही है कि ममता बनर्जी के रवैए के कारण मोदी के लिए राज्यसभा से भी इस बिल को पास कराना अब ज्यादा मुमकिन लग रहा है।

हिंदू-विरोधी छवि से बचना चाहती है टीएमसी!

हिंदू-विरोधी छवि से बचना चाहती है टीएमसी!

माना जा रहा है कि बजट के बाद अगले हफ्ते सरकार लोकसभा से तीन तलाक बिल को पास करा लेगी। लोकसभा से इस बिल को पास कराना पिछली सरकार में भी मुश्किल नहीं हुआ था और मौजूदा सरकार में तो सत्तापक्षा के पास संख्याबल और भी बढ़ गया है। लोकसभा से पास कराने के बाद सरकार उसे फौरन राज्यसभा में पेश करेगी। खबरें हैं कि इसको लेकर ममता बनर्जी की टीएमसी ने भी अपनी तैयारी शुरू कर दी है। राज्यसभा में टीएमसी के पास 13 सांसद हैं। लेकिन, खबरें हैं कि गहन मंथन के बाद टीएमसी के नेता इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि इस बिल का विरोध करने का मतलब प्रदेश में बीजेपी की जाल में और ज्यादा फंस जाना होगा। उसे डर है कि भाजपा इसे हिंदू-विरोधी और मुस्लिम तुष्टिकरण के तौर पर प्रचारित करेगी और विधानसभा में उसकी चुनौती और बढ़ा देगी।

वोटिंग और बहस से गायब रह सकती है टीएमसी

वोटिंग और बहस से गायब रह सकती है टीएमसी

लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने जो बढ़त हासिल की है उसके बाद ममता बनर्जी की पार्टी खुद पर किसी भी सूरत में हिंदू-विरोध का ठप्पा नहीं झेल सकती। इसलिए पार्टी इसपर कोई बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रही है। खबरें हैं कि इस विषय पर पार्टी दो विकल्पों पर विचार कर रही है। पहला- बिल पर तटस्थ रहकर वोटिंग के समय उसमें हिस्सा नहीं लिया जाए या दूसरा- बिल का बायकॉट करके सभी 13 सांसद सदन से बाहर निकल जाएं। इन दोनों विकल्पों में से पार्टी का फाइनल स्टैंड क्या होगा, वह अंतिम समय में बताया जा सकता है। जाहिर है कि अगर तृणमूल इन दोनों विकल्पों पर विचार कर रही है, तो उससे मोदी सरकार को सीधा फायदा पहुंचने वाला है। क्योंकि, इससे सदन के कुल सांसदों की संख्या 13 घट जाएगी, जिससे सरकार के लिए बिल पास कराने के लिए जरूरी संख्या में भी आधे की कमी हो जाएगी।

टीएमसी के रुख से एनडीए को मिल सकता है बहुमत

टीएमसी के रुख से एनडीए को मिल सकता है बहुमत

दरअसल, कुल 245 सीटों वाली राज्यसभा में अभी 235 सांसद हैं और 10 सीट खाली है। इसमें एनडीए के पास 111 सांसद हैं। 5 जुलाई को राज्यसभा के 6 सीटों के लिए उपचुनाव हो रहे हैं, उसके बाद एनडीए सांसदों की संख्या बढ़कर 115 हो जाने की संभावना है और सदन में सदस्यों की संख्या बढ़कर 241 हो जाएगी। इसमें बहुमत के लिए एनडीए को 121 सीटों की आवश्यकता पड़ेगी। लेकिन, 241 सदस्यों वाले ऊपरी सदन से अगर टीएमसी के 13 सांसद वोटिंग से नदारद रहते हैं, तो बहुमत के लिए जादूई आंकड़ा घटकर सिर्फ 115 रह जाएगा, जहां तक एनडीए 5 जुलाई को खुद भी पहुंचने जा रहा है। यानी इस तरह से टीएमसी विपक्ष में रहकर भी परोक्ष तौर पर मोदी सरकार के ट्रिपल तलाक बिल का समर्थन कर सकती है।

एनडीए को इन दलों से भी है उम्मीद

एनडीए को इन दलों से भी है उम्मीद

टीएमसी अगर ट्रिपल तलाक बिल पर गायब रहकर मोदी सरकार की परोक्ष मदद कर सकती है, तो बीजेपी को बीजेडी के 5, टीआरएस के 6 और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के 2 सांसदों के समर्थन मिलने की भी उम्मीद है। यानी इन पार्टियों के सांसदों को मिलाने के बाद राज्यसभा में सरकार के समर्थन में कुल 128 सांसद जुट सकते हैं, जो कि सदन में पूर्ण बहुमत के लिए जरूरी सदस्य संख्या 123 से भी 5 ज्यादा है। इस तरह से ट्रिपल तलाक पर राज्यसभा का जो गणित बैठ रहा है, वह सरकार के फेवर में है और लगता है कि इसबार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ट्रिपल तलाक को पूरी तरह से खत्म करने में कामयाब होने सकते हैं।

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