मोदी सरकार ने एक साल बढ़ाया अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल का कार्यकाल
नई दिल्ली, 28 जून: केंद्र सरकार ने अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ाने का फैसला किया है। जल्द ही इससे संबंधित अधिसूचना जारी कर दी जाएगी, जो 1 जुलाई से लागू होगी। ऐसे में अब वेणुगोपाल 30 जून 2022 तक अपनी सेवाएं जारी रखेंगे। सूत्रों के मुताबिक इस प्रस्ताव को सोमवार को केंद्रीय कैबिनेट के सामने रखा गया था, जिस पर सभी ने उसे सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी। अटॉर्नी जनरल का पद एक संवैधानिक पद है, जिसे देश का सबसे बड़ा कानूनी अधिकारी माना जाता है।

पिछले साल जून में ही वेणुगोपाल का तीन साल का कार्यकाल समाप्त हो गया था। उस दौरान उनकी उम्र 91 साल थी, ऐसे में उन्होंने सरकार से उसे ना बढ़ाने की अपील की। इस पर केंद्र ने उनसे एक और साल इस पद पर बने रहने का अनुरोध किया। जिस पर उन्होंने भी सहमति व्यक्त कर दी। वेणुगोपाल ने 1 जुलाई 2017 को देश के 15वें अटॉर्नी जनरल के रूप में पदभार ग्रहण किया था। उस दौरान उन्होंने मुकुल रोहतगी की जगह ली थी, जो 2014-17 तक इस पद पर रहे। वहीं पिछले जुलाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता का भी कार्यकाल तीन साल बढ़ा दिया गया था।
क्या है कार्यकाल बढ़ाने की वजह?
वेणुगोपाल कई प्रमुख मामलों में केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। जिसमें अनुच्छेद 370 को कमजोर करने की संवैधानिक चुनौती, केंद्र सरकार का कोविड -19 महामारी प्रबंधन समेत कई अहम मामले शामिल हैं। वहीं 2018 में जब कांग्रेस ने राफेल खरीद का मुद्दा उठाया और उसे सुप्रीम कोर्ट लेकर गई, तो वेणुगोपाल ने ही मोदी सरकार का बचाव किया था। जिस वजह से सरकार बिना किसी आरोप के इस विवाद से निकल पाई। सू्त्रों के मुताबिक कई अहम केस में मोदी सरकार उनके अनुभव का इस्तेमाल करना चाहती है, जिस वजह से कार्यकाल एक साल बढ़ाया गया है।












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