मोदी सरकार कर रही CBI,ED का गलत इस्तेमाल? सर्वे में जनता ने बताया फैसला, वोट चोरी से बेरोजगारी तक पर रिपोर्ट
Survey 2026: देश में चुनावी निष्पक्षता, जांच एजेंसियों की भूमिका और राजनीतिक आरोपों को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है। ऐसे माहौल में इंडिया टुडे-सी वोटर का ताजा 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे सामने आया है, जिसने जनता की सोच को साफ तौर पर उजागर किया है।
सर्वे में यह जानने की कोशिश की गई कि क्या मोदी सरकार CBI और ED जैसी जांच एजेंसियों का गलत इस्तेमाल कर रही है, राहुल गांधी के 'वोट चोरी' वाले आरोपों को लोग कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या देश में चुनाव आज भी स्वतंत्र और निष्पक्ष माने जा रहे हैं।

🟡 CBI-ED के इस्तेमाल पर जनता बंटी, विपक्ष को झटका या सरकार को राहत?
बीते कुछ वर्षों से विपक्ष यह आरोप लगाता रहा है कि केंद्र सरकार जांच एजेंसियों का राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है। इसी मुद्दे पर सर्वे में सीधा सवाल पूछा गया कि क्या बीजेपी दूसरी सरकारों के मुकाबले CBI और ED का ज्यादा गलत इस्तेमाल करती है। नतीजे दिलचस्प रहे।
47 प्रतिशत लोगों ने साफ कहा कि बीजेपी अन्य सरकारों की तुलना में एजेंसियों का गलत इस्तेमाल नहीं करती। वहीं 41 प्रतिशत ने माना कि हां, एजेंसियों का दुरुपयोग हो रहा है। 12 प्रतिशत लोग ऐसे रहे जो किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाए। यानी तस्वीर साफ है कि इस मुद्दे पर देश की राय दो हिस्सों में बंटी हुई है, लेकिन विपक्ष के दावों को पूर्ण बहुमत का समर्थन नहीं मिला।
🟡 'वोट चोरी' का आरोप कितना असरदार, जनता ने बता दी हकीकत
राहुल गांधी द्वारा लगाए गए 'वोट चोरी' के आरोप भी लंबे समय से सियासी बहस का केंद्र बने हुए हैं। सर्वे में पूछा गया कि क्या यह आरोप वाकई एक बड़ा मुद्दा है।
40 प्रतिशत लोगों का कहना है कि हां, यह एक मुद्दा है। 14 प्रतिशत ने इसे कुछ हद तक अहम माना।
लेकिन 27 प्रतिशत लोगों ने साफ कहा कि यह कोई मायने नहीं रखता। वहीं 10 प्रतिशत का मानना है कि देश के सामने इससे कहीं बड़े और जरूरी मुद्दे मौजूद हैं। इन आंकड़ों से साफ संकेत मिलता है कि वोट चोरी का आरोप सभी मतदाताओं को प्रभावित नहीं कर पा रहा है।
🟡 भारत में क्या चुनाव निष्पक्ष होते हैं? पब्लिक ने क्या कहा
सर्वे का सबसे चिंताजनक पहलू चुनावों की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर सामने आया। अगस्त 2025 में 64 प्रतिशत लोग मानते थे कि भारत में चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष होते हैं। लेकिन जनवरी 2026 में यह आंकड़ा घटकर 57 प्रतिशत रह गया।
इसी दौरान 'नहीं' कहने वालों की संख्या 32 प्रतिशत से बढ़कर 37 प्रतिशत हो गई। 'कह नहीं सकते' कहने वालों का आंकड़ा भी बढ़ा है। यह बदलाव दिखाता है कि समय के साथ लोगों के मन में चुनावी प्रक्रिया को लेकर संदेह बढ़ा है।
🟡 SIR प्रक्रिया पर सर्वे में क्या आया सामने?
वोटर लिस्ट से जुड़ी SIR प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। लेकिन इस मुद्दे पर जनता का रुख अपेक्षाकृत संतुलित नजर आया। 50 प्रतिशत लोगों का मानना है कि SIR प्रक्रिया राजनीतिक पक्षपात से मुक्त है।
38 प्रतिशत ने इसे पक्षपाती बताया, जबकि 12 प्रतिशत लोग कोई राय नहीं बना पाए। इससे संकेत मिलता है कि इस मामले में चुनाव आयोग पर भरोसा अभी पूरी तरह डगमगाया नहीं है।
'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे के नतीजे बताते हैं कि देश की जनता किसी एक ध्रुव में बंटी नहीं है। CBI-ED के इस्तेमाल से लेकर वोटर चोरी और चुनावी निष्पक्षता तक, हर मुद्दे पर राय अलग-अलग है। लेकिन इतना तय है कि चुनाव और संस्थानों पर भरोसा बनाए रखना आने वाले समय में सरकार और विपक्ष दोनों के लिए सबसे बड़ी चुनौती रहने वाला है।
🟡 Mood of the Nation 2026 सर्वे के 5 बड़े नतीजे
🔹 Op Sindoor पर ट्रंप के दावों को लेकर सरकार की प्रतिक्रिया पर बंटी राय
Mood of the Nation 2026 सर्वे के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ऑपरेशन सिंदूर को लेकर किए गए बार-बार के दावों पर भारत सरकार की प्रतिक्रिया को लेकर जनता की राय साफ तौर पर बंटी हुई है। 39 प्रतिशत लोगों का मानना है कि सरकार ने इस मुद्दे पर पर्याप्त जवाब दिया है, जबकि 38 प्रतिशत इससे सहमत नहीं हैं। वहीं 9 प्रतिशत लोगों को लगता है कि सरकार की प्रतिक्रिया कुछ हद तक प्रभावी रही है। आंकड़े बताते हैं कि इस संवेदनशील मुद्दे पर मतदाताओं के बीच लगभग बराबर की राय बनी हुई है।
🔹 बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार, भारत से सख्त कदम की मांग
सर्वे में सामने आया है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों को लेकर भारतीय जनता ज्यादा सख्त रुख चाहती है। 47 प्रतिशत लोगों का मानना है कि भारत को इस मामले में और मजबूत कदम उठाने चाहिए। 25 प्रतिशत का कहना है कि भारत की मौजूदा प्रतिक्रिया पर्याप्त है, जबकि 18 प्रतिशत लोग चाहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बनाकर इस मुद्दे को उठाया जाए। कुल मिलाकर जनता एक ज्यादा सक्रिय और निर्णायक भूमिका की उम्मीद कर रही है।
🔹 बेरोजगारी अब भी जनता की सबसे बड़ी चिंता
Mood of the Nation सर्वे में बेरोजगारी एक बार फिर बड़ी चिंता के तौर पर उभरकर सामने आई है। 42 प्रतिशत लोगों ने इसे बेहद गंभीर समस्या बताया है, जबकि 22 प्रतिशत का कहना है कि यह कुछ हद तक गंभीर है। सिर्फ 7 प्रतिशत लोगों को लगता है कि बेरोजगारी बहुत बड़ी समस्या नहीं है और 9 प्रतिशत इसे बिल्कुल भी गंभीर नहीं मानते। 14 प्रतिशत ऐसे भी हैं जो इस मुद्दे को लेकर चिंतित नहीं हैं। साफ है कि रोजगार का सवाल आज भी बड़ी आबादी के लिए अहम बना हुआ है।
🔹 GST स्लैब घटाने का उपभोक्ता खर्च पर सीमित असर
सर्वे के मुताबिक GST स्लैब में कटौती का असर आम लोगों की खरीदारी की आदतों पर ज्यादा नजर नहीं आया है। 49 प्रतिशत लोगों ने कहा कि टैक्स कम होने के बावजूद उनके खर्च में कोई बदलाव नहीं हुआ है। 23 प्रतिशत लोगों ने बताया कि वे अब पहले से ज्यादा खरीदारी कर रहे हैं, जबकि 21 प्रतिशत का कहना है कि उनका खर्च और कम हो गया है। इससे साफ है कि टैक्स कटौती से उपभोग में बड़ी तेजी नहीं आई।
🔹 भारतीय अर्थव्यवस्था के बेहतर मैनेजर के तौर पर मोदी आगे
आर्थिक प्रबंधन के सवाल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सर्वे में बढ़त मिलती दिखी है। जनवरी 2026 के आंकड़ों के मुताबिक 54 प्रतिशत लोगों का मानना है कि मोदी ने भारतीय अर्थव्यवस्था को बेहतर तरीके से संभाला है। वहीं पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को 36 प्रतिशत लोगों ने इस मामले में बेहतर बताया। बीते वर्षों में राय में उतार-चढ़ाव जरूर रहा है, लेकिन ताजा सर्वे में मोदी एक बार फिर स्पष्ट बढ़त के साथ आगे नजर आ रहे हैं।
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