भारत में कोरोना के खिलाफ लड़ाई में अहम साबित हो सकती है ये वैक्सीन, रखरखाव के लिए नहीं करना होगा खास इंतजाम
नई दिल्ली। अमेरिका की दवा निर्माता कंपनी मॉडर्ना ने कोरोना वैक्सीन को लेकर अहम घोषणा की है। मॉडर्ना ने जो विश्लेषण पेश किया है उसके मुताबिक कंपनी को कोविड-19 वैक्सीन 94.5 प्रतिशत असरदार है जो कि बड़ी सफलता मानी जा रही है। मॉडर्ना ने ये दावा अंतिम चरण के क्लीनिकल ट्रायल के नतीजों के आधार पर किया है। कंपनी जल्द ही आम लोगों के लिए वैक्सीन निर्माण के लिए अमेरिकी सरकार से अनुमति मांगेगी। साथ ही इस वैक्सीन को दूसरे देशों के लिए भी तैयार किया जाएगा।

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मॉडर्ना की कोरोना वैक्सीन की सबसे खास बात ये है कि ये सामान्य फ्रिज में एक महीने तक आसानी से रखी जा सकती है। वहीं माइनस 20 डिग्री तापमान पर यह स्थिर रहेगी यानि कि डीप फ्रीजर में इसे 6 महीने तक सुरक्षित रखा जा सकता है। अपनी इसी खूबी के चलते इस वैक्सीन का भंडारण करना काफी आसान है जो कि भारत जैसे देश जहां पर रखरखाव और परिवहन की उतनी अच्छी व्यवस्था नहीं है के लिए वरदान की तरह है।
रखरखाव बेहद आसान
वैसे तो कई कंपनियां वैक्सीन निर्माण में लगी हैं लेकिन मॉडर्ना की वैक्सीन भारत के लिहाज से काफी अहम हैं। अमेरिकी कंपनी फाइजर की वैक्सीन भी 90 प्रतिशत कोरोना वायरस मरीजों पर असरदार है लेकिन फाइजर की वैक्सीन को रखने के लिए माइनस 70 डिग्री तापमान की जरूरत होती है। ऐसा ही भारत में एस्ट्राजेंका के साथ मिलकर कोरोना के खिलाफ वैक्सीन बना रही सीरम इंस्टीट्यूट की वैक्सीन के साथ भी है। इसे भी रखने के लिए माइनस 70 डिग्री तापमान की जरूरत होती है। भारत में बहुत कम ही मेडिकल स्टोर ऐसे होंगे जहां पर इस तरह की सुविधा उपलब्ध हो। जबकि सामान्य स्टैंडर्ड फ्रीज में यह वैक्सीन 4 से 5 दिन ही रह सकती है।
भारत जैसे देश जहां पर वैक्सीन के रखरखाव और वितरण के लिए जरूरी रेफ्रिजरेशन, बिजली और सड़क की सुविधाओं की भारी कमी हैं वहां पर ज्यादा हाईटेक और कृत्रिम वातावरण में सुरक्षित रहने वाली वैक्सीन बहुत अच्छी नहीं है। इन वैक्सीन के तैयार होने के बाद उन्हें देश के सुदूर हिस्से तक सुरक्षित पहुंचाना बहुत ही मुश्किल काम होगा। इस दौरान बड़ी मात्रा में वैक्सीन के खराब अथवा क्षतिग्रस्त होने की आशंका रहेगी।
वहीं मॉडर्ना की वैक्सीन को 2 से 8 डिग्री तापमान तक में सुरक्षित रखा जा सकता है। ऐसे में इसे सामान्य फ्रीजर ट्रक या दूसरे परिवहन माध्यमों में आसानी से रिमोट एरिया में भी पहुंचाया जा सकता है।
सबसे ज्यादा असरदार
मॉडर्ना वैक्सीन की दूसरी खासियत इसका सबसे असरदार होना है। कंपनी के मुताबिक ये अब तक की सबसे सफल वैक्सीन है। तीसरे चरण के पूरे हुए हालिया विश्लेषण से पता चला है कि मॉडर्ना की वैक्सीन कोरोना वायरस के 94.5 प्रतिशत मरीजों पर कारगर है। वहीं अमेरिका की ही फाइजर ने दावा किया था कि जर्मनी की बॉयोएनटेक के साथ मिलकर बन रही उसकी वैक्सीन 90 फीसदी कारगर है। सबसे पहले बनकर तैयार हुई रूस की स्पुतनिक-वी वैक्सीन के 92 फीसदी असरदार होने का दावा किया गया था। ऐसे में अभी तक जो भी विश्लेषण सामने आए हैं उनमें मॉडर्ना सबसे कारगर वैक्सीन है। रखरखाव में आसानी के चलते भारत जैसे देशों के लिए और भी खास हो जाती है।












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