ठाकरे सरकार फ्लोर टेस्ट: शपथ ग्रहण में पहुंचे राज ठाकरे के अकेले विधायक ने किसे दिया समर्थन?
मुंबई। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी सरकार ने शनिवार को महाराष्ट्र विधानसभा में बहुमत साबित कर दिया। फ्लोर टेस्ट के लिए शनिवार को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया था। महाराष्ट्र विधानसभा का विशेष सत्र शुरू होते ही बीजेपी ने जमकर हंगामा किया। इस दौरान प्रोटेम स्पीकर के निर्देश पर सदन में बहुमत साबित करने की प्रक्रिया शुरू हुई तो महा अघाड़ी के पक्ष में 169 सदस्यों ने वोट किया। वहीं, सभी की नजरें भाई राज ठाकरे की पार्टी के एकमात्र विधायक पर भी थीं।

उद्धव ठाकरे की सरकार के पक्ष में पड़े 169 वोट
स्पीकर के आदेश पर विधानसभा में विश्वास मत साबित करने की प्रक्रिया शुरू हुई। इस दौरान सीक्रेट बैलेट से वोटिंग नहीं की गई। अशोक चव्हाण सदन में विश्वास प्रस्ताव लेकर आए थे। इस प्रस्ताव के पक्ष में सदस्यों को 'हां' और विरोध में 'ना' बोलना था। इस प्रक्रिया के दौरान सदन में मौजूद सदस्यों की गिनती की जाने लगी। जैसे ही ये गिनती 145 तक पहुंची, महा अघाड़ी के सदस्यों से तालियां बजानी शुरू की। संकेत साफ था कि उद्धव ठाकरे ने विश्वास मत जीत लिया है। उद्धव सरकार के पक्ष में कुल 169 वोट पड़े। जबकि चार विधायकों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।

वोटिंग के दौरान चार विधायक रहे तटस्थ
इन 4 तटस्थ विधायकों में राज ठाकरे की पार्टी एमएनएस के एकमात्र विधायक प्रमोद राजू रतन भी शामिल थे, जबकि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के दो विधायकों और सीपीआई-एम के एक विधायक ने भी वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। दरअसल, उद्धव ठाकरे के शपथ ग्रहण समारोह में भाई राज ठाकरे पहुंचे थे। लंबे अरसे के बाद किसी राजनीतिक कार्यक्रम में ठाकरे परिवार के सदस्य एक साथ नजर आए थे। इसके बाद से ही सियासी गलियारों में दोनों भाइयों के बीच सुलह की अटकलें तेज हो गई थीं। हालांकि, विधानसभा में विश्वास मत पर वोटिंग के दौरान मनसे ने तटस्थ रहकर इन अटकलों को फिलहाल विराम दे दिया है।

ओवैसी की पार्टी भी तटस्थ की भूमिका में
इसके पहले, सत्र की शुरुआत में ही बीजेपी ने आरोप लगाया कि प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति असंवैधानिक है और ये सत्र नियमों के मुताबिक नहीं है। बीजेपी के आरोपों पर प्रोटेम स्पीकर ने कहा कि जो सत्र बुलाया गया है वह नियमों के मुताबिक है और पूरी प्रक्रिया का नियमानुसार पालन किया जा रहा है, अब मैं आगे की कार्यवाही शुरू कर रहा हूं। प्रोटेम स्पीकर ने विश्वास मत पर वोटिंग से पहले, बीजेपी विधायकों से शांत रहने की अपील की लेकिन नारेबाजी करते हुए बीजेपी के सारे विधायक सदन से बाहर आ गए।

बीजेपी विधायकों का वॉकआउट, सत्र को बताया असंवैधानिक
सदन से वॉकआउट करने के बाद बाहर आए देवेंद्र फडणवीस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा, 'यह सत्र असंवैधानिक और गैरकानूनी है। प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति भी असंवैधानिक थी। सरकार रेगुलर स्पीकर के चुनाव को लेकर डरी हुई थी क्योंकि उनको अपने विधायकों पर भरोसा नहीं था, इसीलिए उनको होटल में रखा गया था। इसी प्रकार नियमों का उल्लंघन करते हुए प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति की गई। हम इसको लेकर राज्यपाल को पत्र लिखेंगे। हमारी मांग है कि संविधान के नियमों के मुताबिक सदन की कार्यवाही चलनी चाहिए।












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