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VB G RAM G: मनरेगा गया, ‘जी राम जी’ आया! नाम के साथ क्या-क्या बदला? रोजगार के नियम, खर्च से जुड़े 5 सवाल-जवाब

'VB G RAM G': मोदी सरकार ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव करने जा रही है। संसद में पेश हुए नए बिल के बाद साफ हो गया है कि देश की सबसे चर्चित योजना मनरेगा अब इतिहास बनने वाली है। उसकी जगह एक नया कानून लाया गया है, जिसका नाम है - विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण), यानी संक्षेप में ''VB G RAM G'' या 'जी राम जी'। नाम सुनते ही सियासत गरमा गई है, लेकिन सरकार का दावा है कि बदलाव सिर्फ नाम का नहीं, सोच और ढांचे का भी है।

▶️ क्या है 'जी राम जी' बिल और क्यों हुआ हंगामा?

मंगलवार (16 दिसंबर) को लोकसभा में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने VB-G RAM G बिल 2025 पेश किया। इसके तुरंत बाद विपक्ष ने विरोध शुरू कर दिया। वजह साफ है - यह बिल सीधे तौर पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (MGNREGA) को खत्म करता है। बिल में साफ लिखा है कि 2005 का मनरेगा कानून रद्द किया जाएगा और उसकी जगह नया कानून लागू होगा। सरकार का कहना है कि यह कदम विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप है, ताकि ग्रामीण रोजगार को नए हालात के हिसाब से मजबूत किया जा सके।

VB G RAM G

▶️ काम के दिन बढ़े, लेकिन जिम्मेदारी भी बदली

नए कानून की सबसे बड़ी घोषणा है कि ग्रामीण परिवारों को मिलने वाले गारंटीड रोजगार के दिन 100 से बढ़ाकर 125 कर दिए जाएंगे। पहली नजर में यह फैसला राहत भरा लगता है, लेकिन इसके साथ एक बड़ा बदलाव भी जुड़ा है। अब इस योजना का पूरा खर्च केंद्र सरकार नहीं उठाएगी। राज्यों को 10 से 40 प्रतिशत तक खर्च अपनी जेब से देना होगा। यानी जहां पहले मनरेगा पूरी तरह केंद्र प्रायोजित योजना थी, अब राज्यों पर आर्थिक बोझ बढ़ने वाला है।

▶️ खेती के मौसम में नहीं मिलेगा काम

'जी राम जी' बिल में एक और अहम प्रावधान है। बुवाई और कटाई के मौसम के दौरान करीब 60 दिन तक इस योजना के तहत काम नहीं दिया जाएगा। सरकार का तर्क है कि इससे खेती के समय मजदूरों की कमी नहीं होगी और किसान परेशान नहीं होंगे। हालांकि विपक्ष का कहना है कि इससे गरीब मजदूरों को महीनों तक काम से वंचित रहना पड़ेगा।

'VB G RAM G' Bill 2025: ग्रामीण रोजगार पर नया कानून, 5 अहम सवाल और उनके जवाब

🟡 सवाल 1: VB-G राम जी बिल 2025 क्या है और इसे क्यों लाया गया है?

VB-G राम जी यानी विकसित भारत - गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) एक नया कानून है, जो मौजूदा मनरेगा की जगह लेने का प्रस्ताव करता है। सरकार का कहना है कि इसका मकसद ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप बनाना, आजीविका से जुड़ी परिसंपत्तियों का निर्माण करना और खेती व रोजगार के बीच संतुलन कायम करना है।

🟡सवाल 2: इस बिल में रोजगार के दिनों को लेकर क्या बड़ा बदलाव किया गया है?

नए बिल के तहत हर ग्रामीण परिवार को साल में 125 दिन का गारंटीड रोजगार देने का प्रावधान है, जबकि मनरेगा में यह सीमा 100 दिन थी। सरकार इसे बड़ा सुधार बता रही है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि ज्यादा दिनों की गारंटी तभी मायने रखेगी जब जमीन पर वास्तव में काम उपलब्ध कराया जाए।

🟡सवाल 3: क्या अब रोजगार योजना का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाएगी?

नहीं, यह बिल एक बड़ा बदलाव लेकर आया है। अब मजदूरी का खर्च केंद्र और राज्य मिलकर उठाएंगे। सामान्य राज्यों के लिए फंड शेयरिंग 60:40 होगी, जबकि पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए 90:10 का फॉर्मूला रखा गया है। इससे राज्यों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।

🟡सवाल 4: खेती के मौसम में काम क्यों रोका जाएगा?

बिल में पहली बार यह प्रावधान जोड़ा गया है कि बुवाई और कटाई जैसे पीक एग्रीकल्चर सीजन में कुल 60 दिनों तक रोजगार कार्य रोका जा सकता है। सरकार का तर्क है कि इससे खेतों में मजदूरों की कमी नहीं होगी, लेकिन इसका मतलब यह भी है कि रोजगार पाने की अवधि सिमट जाएगी।

🟡सवाल 5: 'विकसित ग्राम पंचायत योजना' क्या है?

नए कानून के तहत सभी काम विकसित ग्राम पंचायत योजना से निकलेंगे, जिन्हें ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर जोड़कर विकसित भारत नेशनल रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर स्टैक बनाया जाएगा। इसका फोकस जल सुरक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचा, आजीविका से जुड़े कार्य और जलवायु आपदाओं से निपटने पर होगा।

▶️ मनरेगा नाम बदलने पर क्यों भड़का विपक्ष?

कांग्रेस ने इस बिल को सीधे महात्मा गांधी की विरासत से जोड़ दिया है। प्रियंका गांधी ने सवाल उठाया कि गांधी जी का नाम हटाने की क्या जरूरत थी। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यह कानून केंद्र को और ताकतवर बनाता है और राज्यों पर बोझ डालता है। उन्होंने कहा कि मनरेगा कोविड जैसे संकट में गरीबों का सुरक्षा कवच बना था, जिसे कमजोर किया जा रहा है।

समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव ने कहा कि नाम बदलने से गांव की हकीकत नहीं बदलती। बिहार में राजद ने भी इसे यूपीए दौर की योजनाओं का नाम बदलकर पेश करने का आरोप लगाया।

▶️ केंद्र सरकार का जवाब क्या है?

सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि महात्मा गांधी सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि प्रेरणा हैं। बापू का सपना रामराज और अंतिम व्यक्ति के कल्याण का था, और 'जी राम जी' उसी सोच को आगे बढ़ाता है। सरकार का दावा है कि यह बिल गरीबों के सम्मान और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत की दिशा में बड़ा कदम है।

▶️ मनरेगा का अनुभव क्या कहता है?

हकीकत यह है कि मनरेगा में 100 दिन की गारंटी होने के बावजूद ज्यादातर राज्यों में परिवारों को औसतन 50 से 55 दिन ही काम मिल पाया। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि पिछले पांच सालों में कोई भी राज्य 100 दिन का औसत नहीं छू सका। मजदूरी भी अलग-अलग राज्यों में अलग है, जिससे 'एक देश, एक मजदूरी' का सपना अधूरा ही रहा।

▶️ आगे क्या बदलेगा, क्या नहीं?

नया कानून संसद से पास होने और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू होगा। इसके छह महीने के भीतर राज्यों को नई योजना और डिजिटल, बायोमेट्रिक आधारित पंजीकरण व्यवस्था लागू करनी होगी। मजदूरी दरों को लेकर अभी कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की गई है।

'जी राम जी' के नाम, काम के दिन और ढांचे में बदलाव जरूर बड़ा है, लेकिन असली सवाल यही है कि क्या इससे गांवों में रोजगार की स्थिति सच में सुधरेगी। अनुभव बताता है कि सिर्फ नाम बदलने और कागजी गारंटी बढ़ाने से जमीन पर बदलाव नहीं आता। असली परीक्षा इस बात की होगी कि क्या गरीब मजदूर को नियमित काम, समय पर भुगतान और सम्मानजनक मजदूरी मिल पाती है या नहीं। फिलहाल, संसद की बहस और राजनीतिक घमासान के बीच देश की सबसे बड़ी रोजगार योजना एक नए दौर में प्रवेश करने जा रही है।

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