90 प्रतिशत टीकाकरण के लिए शुरू हो गया है मिशन इन्द्रधनुष

नई दिल्ली। कोविड काल में श्रमिकों के पलायन और अन्य कई वजहों से 21 लाख बच्चे नियमित टीकाकरण से छूट गए। कोरोना वैक्सीन के साथ ही 19 फरवरी से नियमित टीकाकरण कार्यक्रम मिशन इन्द्रधनुष तीन के पहले चरण की शुरूआत कर दी गई है। इसमें वैक्सीन ड्रापआउड बच्चों को दोबारा मिशन से जोड़ा जाएगा। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 की अपेक्षा वर्ष 2020 में टीकाकरण में 26 प्रतिशत की कमी देखी गई। कोविड गाइड लाइन का पालन करते हुए एक बार फिर जरूरी जीवन रक्षक वैक्सीन दिए जाएगें।

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टीकाकरण में देखी गई है कमी

स्वास्थ्य सेवाओं पर लॉकडाउन के असर को देखते हुए गृह मंत्रालय ने 15 अप्रैल 2020 को जारी आदेश में कहा कि नियमित टीकाकरण एक अनिवार्य प्रक्रिया है, इसपर लॉकडाउन का असर नहीं पड़ना चाहिए। बावजूद इसके वर्ष 2020 में नियमित टीकाकरण के शत प्रतिशत लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया जा सका। हालांकि लॉकडाउन में भी राज्यों के साथ वर्चुअल प्लेटफॉर्म के जरिए टीकाकरण कार्यक्रमों की नियमित समीक्षा की गई। कुछ जगहों पर स्वास्थ्य कर्मियों की कमी, मजदूरों का पलायन और संक्रमण के जोखिम की वजह से टीकाकरण नहीं हो पाया। वर्ष 2020 में वर्ष 2019 की अपेक्षा टीकाकरण में 26 प्रतिशत की कमी देखी गई। हेल्थ मैनेजमेंट इंफारमेशन सिस्टम (एचएमआईआईएस) द्वारा नौ अक्टूबर 2020 को जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 में मार्च से जून के बीच कुल 8,440,136 बच्चों का टीकाकरण हुआ, जबकि वर्ष 2020 में मार्च से जून के बीच 6,276,798 बच्चों का टीकाकरण किया गया। वर्ष 2019 के एवज में वर्ष 2020 में 21,63,338 कम बच्चों का टीकाकरण किया गया या किसी वजह से वह टीकाकरण के लिए उपलब्ध नहीं हो पाए। कोविड के कारण वैक्सीन ड्रापआउट बच्चों को सर्विलांस के जरिए दोबारा जोड़ा जाएगा। स्वास्थ्य मंत्रालय के यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन कार्यक्रम के तहत महिला और बच्चों की 10 जानलेवा बिमारियों से रक्षा की जाती है।

दो चरण में होगा मिशन इन्द्रधनुष

लक्षित टीकाकरण को पूरा करने के लिए सरकार दो चरणों में इंटेंसिफाइड मिशन इन्द्रधनुष (आईएमआई) शुरू करेगी। पहला चरण 22 फरवरी और दूसरा चरण 22 मार्च से शुरू किया जाएगा। प्रत्येक चरण पन्द्रह दिन के लिए आयोजित किया जाएगा, सभी राज्य 19 फरवरी तक टीकाकरण पोर्टल वैक्सीन से वंचित हुए बच्चों की जानकारी अपटेड कर सकते हैं।

ईविन एप से होगी टीकाकरण की मॉनिटरिंग

इलेक्ट्रानिक वैक्सीन इंटेलिजेंस नेटवर्क (ईविन) प्लेटफार्म के जरिए राज्यों से टीकाकरण की जिलेवार सूचना एकत्र की जाएगी। जिसमें वैक्सीन संरक्षण के अलावा वैक्सीन की उपलब्धता का भी पता लगाया जा सकेगा। सेफवैक के जरिए वैक्सीन लेने के बाद किसी तरह के एडवर्स इवेंट फॉलोविंग इम्यूजाइजेशन (एईएफआई) के मामलों की जानकारी तुरंत दी जा सकेगी।

क्या है नियमित टीकाकरण कार्यक्रम

स्वास्थ्य मंत्रालय ने वर्ष 1985 में यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन कार्यक्रम (यूआईपी) शुरू किया गया। इसमें ऐसी बिमारियों को शामिल किया गया, जिनसे वैक्सीन से रक्षा कवच बनाया जा सके। वर्तमान में 2.6 करोड़ बच्चों और 2.9 गर्भवती महिलाओं को हर साल नियमित टीकाकरण के तहत वैक्सीन दिया जाता है। कार्यक्रम के जरिए दस जानलेवा बिमारियां, डिप्थीरिया, काली खांसी, टिटनेस, पोलियो, खसरा, रूबेला, बच्चों का टीबी, रोटावायरस, डायरिया, हेपेटाइटिस बी, मेनिनजाइटिस, हीमोफिलिक इंफ्लूएंजा, न्यूमोकॉकल और जैपनीज इंसेफालाइटिस से सुरक्षा दी जाती है। इसमें जेई की वैक्सीन प्रभावित जिलों में ही दी जाती है। वर्ष 2014 में नियमित टीकाकरण कार्यक्रम को मिशन इन्द्रधनुष के साथ नये कलेवर में शुरू किया गया। जिसके बाद देशभर में टीकाकरण में तेजी से बढ़ोतरी हुई। मिशन इन्द्रधनुष के अब तक आयोजित हुए दो कैंपेन की मदद से 3.76 करोड़ बच्चों और 94.6 लाख गर्भवती महिलाओं को जोड़ा गया।

2019 में हुआ था 91 प्रतिशत टीकाकरण

कोरोना काल से ठीक पहले वर्ष 2019 में देश के मिशन इन्द्रधनुष ने 91 प्रतिशत टीकाकरण के लक्ष्य को प्राप्त किया था। डब्लूएचओ / यूनिसेफ के अनुसार वर्ष 2019 में भारत की पेंटा थ्री राष्ट्रीय टीकाकरण कवरेज की दर 91 प्रतिशत देखी गई। वर्ष 2006 में 65, वर्ष 2007 में 64 और वर्ष 2017 में 89 प्रतिशत टीकाकरण हुआ।

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