भारत ने पाकिस्तान की लगाई लताड़, कहा- CAA आंतरिक मामला

नई दिल्ली। भारत के नागरिकता अधिनियम (संशोधित) से बौखलाए पाकिस्तान की संसद ने ध्वनिमत से निंदा प्रस्ताव पारित किया है। संसद ने इसके कई अंशों को भेदभावपूर्ण बताते निरस्त करने को कहा है। भारत ने पाकिस्तान के इस कदम की आलोचना की है। भारत ने कहा है कि, ये देश का आंतरिक मामला है। हम उनके प्रस्ताव को स्पष्ट तौर पर अस्वीकार करते हैं। यह जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के मुद्दे पर पाकिस्तान की एक और चाल है।

Ministry of External Affairs Pakistan Citizenship Amendment Act India Resolution

विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि, पाकिस्तान का यह कदम भारत में सीमा पार आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन देने वाला है। हमें विश्वास है कि उनके इस तरह के प्रयास विफल होंगे। मंत्रालय ने कहा कि, पाकिस्तान का ये कदम उनके यहां के अल्पसंख्यकों पर किए जा रहे आत्याचारों से ध्यान हटाने के लिए किया जा रहा है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि खान ने भारत के बिल्कुल अंदरूनी मामलों में अनावश्यक और अवांछित टिप्पणियां की हैं तथा अपने 'संकीर्ण' राजनीतिक एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए बहुपक्षीय मंच पर एक बार फिर 'पहले की भांति झूठ' का प्रचार किया है। जिनेवा में वैश्विक शरणार्थी मंच पर अपने संबोधन में खान ने जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे को निरस्त करने और संशोधित नागरिकता कानून बनाने को लेकर भारत की कड़ी आलोचना की। कुमार ने कहा, 'अब पूरी दुनिया के लिए बिल्कुल स्पष्ट हो जाना चाहिए कि वैश्विक मंच पर खान द्वारा आदतन और जबरन गालियां देना एक ढर्रा बन गया है।

उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान के ज्यादातर पड़ोसियों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण अनुभव रहा है कि उसकी हरकतों का पड़ोसियों पर बहुत बुरा असर रहा है। इक्कीसवीं सदी में शरणार्थियों पर वैश्विक शरणार्थी मंच' नामक इस पहली बैठक का आयोजन यूएनएचसीआर, यूएन शरणार्थी एजेंसी और स्विटरजरलैंड सरकार ने संयुक्त रूप से किया।

रवीश कुमार नागरिकता कानून की खान द्वारा आलोचना को खारिज करते हुए कुमार ने कहा, 'पिछले 72 सालों से पाकिस्तान इस्लामिक गणराज्य ने सुनियोजित ढंग से अपने अल्पसंख्यकों पर अत्याचार किया है। फलस्वरूप उनमें से ज्यादातर बाध्य होकर भारत भाग आये।

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