मंदिर पर हमला: पाकिस्तान के सामने भारत ने दर्ज करवाया विरोध, कहा- अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के दावे झूठे
नई दिल्ली, 5 अगस्त: पाकिस्तान अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तमाम दावे करता है, लेकिन वो सब झूठे निकलते हैं। गुरुवार को भारत ने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि वो धार्मिक अल्पसंख्यकों की रक्षा करने में पूरी तरह से विफल रहा है। ये बयान उस घटना के एक दिन बाद आया, जहां पंजाब प्रांत में एक हिंदू मंदिर पर हमला किया गया। साथ ही उपद्रवियों ने उसमें रखी मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया।

मामले में विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और उत्पीड़न की ऐसी घटनाएं बेरोकटोक जारी हैं। हाल ही की घटना में मंदिर पर हमले के अलावा आसपास के कुछ घरों पर हमला किया गया। जिसमें हिंदू समुदाय के लोग रहते थे। इससे साफ है कि पाकिस्तानी अधिकारी इस मामले में पूरी तरह से निष्क्रिय हैं, जिस वजह से अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा, भेदभाव और उत्पीड़न की घटनाएं बेरोकटोक जारी हैं।
बागची के मुताबिक भारत ने गुरुवार दोपहर पाकिस्तानी डिप्लोमैट को भी तलब किया। साथ ही इस घटना को निंदनीय बताते हुए अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की। हालांकि पाकिस्तान लगातार कह रहा है कि वो घटना की निष्पक्ष जांच करवाएगा, साथ ही दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, लेकिन अल्पसंख्यक समुदाय को उस पर विश्वास नहीं है।
क्यों हुई हिंसा?
पाकिस्तान पुलिस के मुताबिक मामला रहीम यार खान जिले के भोंग शहर का है, जो लाहौर से 590 किलोमीटर दूर है। वहां पर मदरसे के अपमान का बदला लेने के लिए भीड़ मंदिर में घुस गई। इस दौरान जमकर तोड़फोड़ हुई है। पुलिस का आरोप है कि एक बच्चे ने मदरसे की लाइब्रेरी में पेशाब कर दिया था। जिसका बदला लेने के लिए ये हमला हुआ है।












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