भगदड़ में छूटे जूते-चप्पल, प्लास्टिक की बोतलें पैरों में बांधकर घर की ओर निकले मजदूर
नई दिल्ली: देश में मजदूर वर्ग की हालत पहले से ही खराब थी। दिन-रात मेहनत करने के बाद उन्हें दो वक्त की रोटी नसीब होती थी। कोरोना की वजह से चल रहे लॉकडाउन ने मजदूरों की कमर तोड़कर रख दी है। काम धंधा बंद होने से मजदूर अपने गांवों की ओर रुख करने लगे हैं। उन्हें उम्मीद है कि गांव में पहुंचने के बाद अपने लोग उनकी मदद करेंगे और उन्हें भूखा नहीं सोना पड़ेगा, लेकिन मजदूरों के घर का रास्ता इतना आसान नहीं है। एक तो गर्मी, ऊपर से पुलिस वालों की सख्ती मजदूरों के लिए मुसीबत बनती जा रही है। सोशल मीडिया पर मजदूरों के बुरे हालात को दिखाती एक फोटो वायरल हो रही है, जिसमें लोग प्लास्टिक की बोतल से बनी चप्पल पहने नजर आ रहे हैं।

बॉर्डर पर पुलिस ने खदेड़ा
दरअसल लॉकडाउन के बाद बड़ी संख्या में मजदूर पंजाब से हरियाणा की ओर पलायन कर रहे हैं। जिसमें से ज्यादातर मजदूरों के पास लॉकडाउन पास नहीं था। जिस वजह से अंबाला पुलिस ने उन्हें नेशनल हाईवे पर रोककर वापस खदेड़ा दिया। पुलिस की मार के डर से वहां पर भगदड़ मच गई। इस दौरान कई मजदूरों के जूते-चप्पल वहीं छूट गए। पंजाब और हरियाणा में तेज गर्मी पड़ रही है। नंगे पैर चार कदम भी चलना मुश्किल था। बिना जूते-चप्पल के घर जाना नामुमकिन सा लग रहा था। ऐसे में उनके दिमाग में एक आइडिया आया। उन्होंने पानी की बोतल को पिचका कर उसे कपड़े से पैरों में बांध लिया और अपनी मंजिल की ओर निकल पड़े।
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तपती हुई धूप और ये तस्वीरें, मजदूरों की ये हालत बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है.😰घिस गईं चप्पलें, पैरों में पानी की बोतल बांधकर पैदल चल रहे मजदूर😥
पता नही देश में कब मजदूर और गरीबो की हालत में सुधार होगा @PMOIndia@CMOfficeUP@narendramodi pic.twitter.com/xytdWCEi1z
— Deepak (@Deepak885857) May 9, 2020
मजदूरों की मदद को आगे आए विधायक
इसी बीच अंबाला के विधायक असीम गोयल की नजर इन मजदूरों पर पड़ी। उन्होंने तुरंत मजदूरों के लिए चप्पल की व्यवस्था करवाई। मजदूरों ने उन्हें बताया कि लॉकडाउन की वजह से रास्ते में कुछ खाने को नहीं मिल रहा। जिस पर विधायक ने उनके लिए नाश्ता भी मंगवाया। इसके बाद विधायक ने उनको हरियाणा में घुसने की इजाजत देने के लिए पुलिस के उच्चाधिकारियों से बात की। तब जाकर मजदूर दोबारा अपने घर की ओर रवाना हुए।

क्यों पैदल जा रहे मजदूर?
देश में कोरोना वायरस की चेन तोड़ने के लिए 17 मई तक लॉकडाउन का ऐलान किया गया है। इस लॉकडाउन से मजदूर बुरी तरह से प्रभावित हैं। सरकार ने मजदूरों को घर पहुंचाने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलवाई हैं, लेकिन ये काफी नहीं हैं। लाखों की संख्या में मजदूर दूसरे राज्यों में फंसे हैं, जबकि श्रमिक ट्रेनों की संख्या बहुत ही कम है। एक ट्रेन में सिर्फ 1200 लोगों को ले जाने की इजाजत है, जिस वजह से परेशान लोग पैदल ही घरों की ओर निकल पड़े हैं।












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