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कमाई से गरीबी-अमीरी का स्टेटस कैसे तय होता है,मिडिल क्लास और अमीरों की आमदनी में कितना फर्क है ? जानिए

भारत में नागरिकों की आमदनी के आधार पर उनका एक स्टेटस तय किया जाता है। लोगों के अमीर वर्ग-मध्यम वर्ग और गरीब वर्ग की श्रेणियां इसी आधार पर तय की जाती हैं। इसी पर एक ताजा सर्वे आया है, जिसके मुताबिक देश में मिडिल क्लास या मध्यम वर्ग की जनसंख्या बहुत ही तेजी से बढ़ती जा रही है। आजादी के 100 वर्ष पूरे होने के समय देश की करीब दो-तिहाई जनसंख्या मध्यम वर्ग की होगी। अमीरों की एक मलाईदार श्रेणी भी होगी, लेकिन राहत की बात होगी कि गरीबों की संख्या में कमी आएगी। आइए जानते हैं कि इस सर्वे में कितनी आदमी वालों को अमीर माना गया है और कितनी कमाई वाले मध्यम वर्ग या निराश्रितों की श्रेणी में रखे गए हैं।

2047 तक करीब दो-तिहाई तक होगी मिडिल क्लास की आबादी

2047 तक करीब दो-तिहाई तक होगी मिडिल क्लास की आबादी

भारत में मिडिल क्लास की जनसंख्या बीते दशक में लगातार बढ़ी है और करीब ढाई दशकों तक इसमें और भी बढ़ोतरी होने की संभावना है। अर्थव्यवस्था पर रिसर्च करने वाली एक संस्था PRICE (पीपुल रिसर्च ऑन इंडियाज कंज्यूमर इकोनॉमी) ने इसपर एक बड़ा सर्वे करके बताया है कि किसी तरह से आर्थिक सुधारों और अर्थव्यवस्था के विस्तार से देश में लोगों की आमदनी बढ़ रही है और उनकी कमाई के आधार पर उनका स्टेटस भी बढ़ता जा रहा है। इस सर्वे के अनुसार इस समय भारत में मिडिल क्लास या मध्यम वर्ग की जनसंख्या एक-तिहाई से थोड़ा कम है, लेकिन 2047 तक जाते-जाते इस वर्ग की आबादी कुल जनसंख्या के करीब दो-तिहाई तक पहुंच जाएगी।

पिछले साल तक 31% थे मिडिल क्लास के लोग

पिछले साल तक 31% थे मिडिल क्लास के लोग

इस सर्वे के अनुसार साल 2004-05 तक भारत में मिडिल क्लास की आबादी 14% थी, जो पिछले साल तक बढ़कर 31% पहुंच चुकी थी। अनुमानों के मुताबिक आने वाले 8 वर्ष में देश की लगभग आधी आबादी यानि 46% लोग मिडिल क्लास में शामिल हो जाएंगे और 2047 तक यानि देश को अंग्रेजी हुकूमत से मिली स्वतंत्रता के 100 साल पूरे होने तक 63% लोग मध्यम वर्ग में शामिल हो चुके रहेंगे।

2047 तक गरीबी में आएगी काफी कमी-रिपोर्ट

2047 तक गरीबी में आएगी काफी कमी-रिपोर्ट

यह रिपोर्ट 'द राइज ऑफ इंडियाज मिडिल क्लास' के नाम से प्रकाशित हुई है। PRICE के एमडी -सीईओ और इस रिपोर्ट के लेखक राजेश शुक्ला ने कहा, 'यदि राजनीतिक और आर्थिक सुधारों का वांछित प्रभाव पड़ा तो 2047 तक भारत के आय पिरामिड में नीचे की ओर एक छोटी सी परत होगी, जिसमें निराश्रित और आकांक्षी समूह के लोग होंगे, मिडिल क्लास का एक बड़ा उभार दिखेगा और शीर्ष पर एक बड़ी मलाईदार 'समृद्ध' परत होगी। शुक्ला का कहना है कि इस रहस्यमय 'मध्यम' को परिभाषित करना शिक्षाविदों से लेकर बाजार के जानकारों के लिए भी हमेशा से मुश्किल रहा है।

कितनी कमाई होने पर अमीर कहलाएंगे आप ?

कितनी कमाई होने पर अमीर कहलाएंगे आप ?

प्राइस ने 2020-21 की कीमतों के आधार पर परिवारों के वार्षिक आय के मुताबिक जो आर्थिक स्टेटस की श्रेणियां विभाजित की हैं, उसके अनुसार 30 लाख रुपए से अधिक आय वर्ग वालों को अमीर वर्ग में माना गया है। अगर प्रतिशत में देखें तो देश में अमीर वर्ग की तस्वीर (देश की कुल जनसंख्या में) कुछ इस तरह से बनती है-

परिवार- 3%

आबादी- 4%

आमदनी- 23%

खर्च- 17%

बचत- 43%

मिडिल क्लास वाले कितना कमाते हैं ?

मिडिल क्लास वाले कितना कमाते हैं ?

अब सबसे बड़े मिडिल क्लास या मध्यम वर्ग के आंकड़े देख लीजिए, जिनकी जनसंख्या लगातार बढ़ती चली जा रही है और यह देश की समृद्धि का संकेत है। मध्यम वर्ग में उन्हें शामिल किया गया है, जिनकी सालाना आय 5 लाख रुपए से लेकर 30 लाख रुपए के बीच है।

परिवार- 30%

आबादी- 31%

आमदनी- 50%

खर्च- 48%

बचत- 56%

भारत का आकांक्षी वर्ग कौन है ?

भारत का आकांक्षी वर्ग कौन है ?

प्राइस ने मिडिल क्लास के बाद आकांक्षी (aspirers) श्रेणी की जनसंख्या को रखा है, जिनकी सालाना आमदनी 1.25 लाख रुपए से लेकर 5 लाख रुपए के बीच है।

परिवार- 52%

आबादी- 52%

आमदनी- 25%

खर्च- 32%

बचत- 1%

निराश्रितों की कोई बचत नहीं होती-रिपोर्ट

निराश्रितों की कोई बचत नहीं होती-रिपोर्ट

सबसे आखिर में निराश्रित (destitutes) वर्ग को रखा गया है। इनकी वार्षिक आय 1.25 लाख रुपए से भी कम है।

परिवार- 15%

आबादी- 13%

आमदनी- 2%

खर्च- 3%

बचत- 0%

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