Fake News: काले रंग की ब्रा से होता है कैंसर? व्हाट्सऐप पर शेयर हो रही ये अफवाह

पिछले कुछ सालों में भारत में व्हाट्सऐप पर फेक न्यूज का चलन काफी बढ़ गया है। आए दिन लोगों को व्हाट्सऐप पर सेहत से लेकर मंदिर, लड़ाई, तस्वीरें इनफॉर्मेशन और न जानें क्या-क्या व्हाट्सऐप पर फॉरवर्ड के रूप में मिलता है।

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नई दिल्ली। पिछले कुछ सालों में भारत में व्हाट्सऐप पर फेक न्यूज का चलन काफी बढ़ गया है। आए दिन लोगों को व्हाट्सऐप पर सेहत से लेकर मंदिर, लड़ाई, तस्वीरें इनफॉर्मेशन और न जानें क्या-क्या व्हाट्सऐप पर फॉरवर्ड के रूप में मिलता है। ऐसा ही एक फॉरवर्ड इन दिनों व्हाट्सऐप पर खूब शेयर किया जा रहा है। ब्रेस्ट कैंसर से जुड़े इस फॉरवर्ड से डॉक्टरों भी चकरा गए हैं। व्हाट्सऐप पर ये मैसेज इन दिनों खूब फॉरवर्ड किया जा रहा है कि काले रंग की ब्रा पहनने से ब्रेस्ट कैंसर होता है। अगर आपके पास भी ये मैसेज आए तो समझ जाएं कि ये खबर सरासर झूठ है।

क्या काले रंग की ब्रा से होता है कैंसर?

क्या काले रंग की ब्रा से होता है कैंसर?

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक व्हाट्सऐप पर ब्रेस्ट कैंसर को लेकर एक गलत मैसेज इन दिनों व्हाट्सऐप पर धड़ल्ले से शेयर किया जा रहा है। व्हाट्सऐप पर मैसेज शेयर किया जा रहा है कि काले रंग की ब्रा पहनने से कैंसर होता है। इसलिए आप ब्रेस्ट कैंसर को खुद से दूर रखना चाहते हैं तो काले रंग की ब्रा न पहनें। मैसेजे में लिखा है, 'ब्रेस्ट कैंसर को दूर रखें... गर्मी में काली ब्रा न पहनें। धूप में निकलते समय अपनी छाती हमेशा दुपट्टे या स्कार्फ से ढकें। सभी महिलाओं को ये मैसेज बिना किसी झिझक के भेजें।' व्हाट्सऐप पर ये मैसेज टाटा मेमोरियल अस्पताल की तरफ से लिखकर शेयर किया जा रहा है।

25 फीसदी फेक न्यूज सेहत से जुड़ी

25 फीसदी फेक न्यूज सेहत से जुड़ी

ये मैसेज खासतौर पर बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनाली बेंद्रे को कैंसर होने के बाद ज्यादा शेयर किया जा रहा है। अगर आपके पास भी ऊपर लिखा मैसेज आता है तो संभल जाएं, ये मैसेज एकदम गलत है। डॉक्टरों ने ऐसी कोई एडवाइस जारी नहीं की है। पिछले कुछ सालों में व्हाट्सऐप पर फेक न्यूज काफी सर्कुलेट होने लगी है। ऐसे मैसेज में अधिकतर सेहत से जुड़े होते हैं। फेक न्यूज का पता लगाने वाली वेबसाइट check4spam.com के सह-संस्थापक शमस ओलियथ के अनुसार फेक खबरों में 25 प्रतिशत मैसेज सेहत से जुड़े होते हैं। 'सोशल मीडिया पर मेडिकल पोस्ट काफी कॉमन है। हम जिन एलोपैथिक डॉक्टर्स से बात करते हैं उनके अनुसार ऐसी खबरों में साइंटिफिक प्रूफ नहीं होता।'

'मरीजों को समझाने में बर्बाद होता वक्त'

'मरीजों को समझाने में बर्बाद होता वक्त'

फोर्टिस बेंगलुरू में सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. संदीप नायक ने कहा कि लोगों में बायोप्सी को लेकर भी काफी गलतफहमियां हैं। 'मेरे एक मरीज ने बायोप्सी कराने से मना कर दिया था। उसे समझाने में मुझे काफी वक्त लगा।' व्हाट्सऐप पर महिलाओं की सेहत को लेकर भी खूब झूठे मैसेजेस वायरल होते हैं। डॉक्टरों के अनुसार ऐसे फेक मैसेज के वायरल होने के पीछे देश में डॉक्टरों की कमी भी एक कारण है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में 100 करोड़ लोगों पर केवल 10 लाख ऐलोपैथिक डॉक्टर मौजूद हैं। ऐसे में लोग इन व्हाट्सऐप फॉरवर्ड पर भरोसा कर लेते हैं।

फेक न्यूज से कई लोगों ने गंवाई जान

फेक न्यूज से कई लोगों ने गंवाई जान

टीओआई से बातचीत में दिल्ली के मैक्स अस्पातल के डॉ. संदीप बुधिराजा ने कहा कि डॉक्टरों के लिए इस वक्त सबसे बड़ा चैलेंज फेक न्यूज को कंट्रोल और खत्म करना है। 'आज अगर आप किसी मरीज को उस ट्रीटमेंट के लिए मना कर देते हैं जो उसने ऑनलाइन पढ़ा है, तो वो आपकी बात मानने के लिए ही तैयार नहीं होता।' check4spam.com के सह-संस्थापक ओलियथ का कहना है कि ऐसे मैसेज कौन फैलाता है और इससे किसे फायदा पहुंचता है, इसका सवाल अभी किसी के पास नहीं है। बता दें फेक न्यूज रोकने के लिए व्हाट्सऐप ने कई कदम भी उठाए हैं। व्हाट्सऐप पर फेक न्यूज के कारण देश में अब तक दो दर्जन से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

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