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Mehul Choksi के खिलाफ जारी इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस हटा, CBI इस बड़े एक्शन पर क्या बोली?

Mehul Choksi भगोड़ा हीरा कारोबारी होने के अलावा इंडिया की टॉप एजेंसी की वांटेड लिस्ट में है। फरवरी 2018 में भागे मेहुल चोकसी के खिलाफ इंटरपोल की रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी हुई, जो अब रिमूव हो चुकी है। CBI क्या बोली? जानिए

Mehul Choksi

Mehul Choksi Interpol की रेड कॉर्नर रिमूव होने के बाद फिर से सुर्खियों में हैं। भारत की शीर्ष जांच एजेंसी- केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) मेहुल चोकसी के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस हटाने के बाद इंटरपोल के साथ सक्रिय संपर्क में है। सीबीआई ने मंगलवार को कहा कि वह मेहुल चोकसी के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस को हटाने के बाद इंटरपोल की फाइलों के नियंत्रण आयोग (सीसीएफ) और इंटरपोल में अन्य निकायों के साथ सक्रिय संचार में बनी हुई है।

इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस पर क्या कहा?

इस संबंध में समाचार एजेंसी ANI ने इंटरपोल अधिकारियों का पक्ष बताया। एएनआई के अनुसार रेड कॉर्नर नोटिस सूची से मेहुल चोकसी का नाम हटाने पर इंटरपोल अधिकारियों ने कहा, संगठन विशिष्ट मामलों, जांच या व्यक्तियों पर टिप्पणी नहीं करता है, हम आपको सलाह देते हैं कि आप संबंधित राष्ट्रीय अधिकारियों से संपर्क करें।

Mehul Choksi

CBI Interpol के एक्शन पर क्या बोली

इंटरपोल के एक्शन के एक दिन बाद सीबीआई ने कहा कि एजेंसी आपराधिक न्याय की प्रक्रिया का सामना करने के लिए भगोड़ों और अपराधियों को भारत वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध है। एजेंसी ने अपने बयान में कहा, वांछित अपराधियों और आर्थिक अपराधियों की भौगोलिक लोकेशन पता लगाने (geo-locating) और इन्हें वापस भारत लाने के लिए विदेशी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ निकट समन्वय के लिए व्यवस्थित कदम उठाए गए हैं। पिछले 15 महीनों में, 30 से अधिक वांछित अपराधी भारत प्रत्यर्पित किए गए हैं।

पांच साल में कई मामले दर्ज किए

सीबीआई ने कहा कि मेहुल चोकसी और अन्य आरोपियों के खिलाफ करीब पांच साल पहले- 15 फरवरी, 2018 को पंजाब नेशनल बैंक से धोखाधड़ी करने का मामला दर्ज किया गया था। सीबीआई पहले ही चोकसी समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ दो आरोप पत्र दायर कर चुकी है। 2022 में, सीबीआई ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों को धोखा देने के लिए मेहुल चोकसी और अन्य के खिलाफ पांच और आपराधिक मामले दर्ज किए।

एंटीगुआ में भी चोकसी का झूठ पकड़ा गया

सीबीआई रेड कॉर्नर नोटिस की बहाली के लिए इंटरपोल के भीतर उपलब्ध अपीलीय विकल्पों का लगातार इस्तेमाल कर रही है। सीबीआई ने कहा, चोकसी ने एंटीगुआ और बारबुडा की नागरिकता के लिए आवेदन किया है। एंटीगुआ के अधिकारियों का भी मानना है कि आवेदक ने भौतिक तथ्यों को छिपाया या झूठे कागजात तैयार किए। यह साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। इनसे अपराधी के पिछले आचरण का भी पता चलता है।

क्या भारत लाया जाएगा 63 वर्षीय भगोड़ा कारोबारी

बता दें कि 63 वर्षीय हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में 13,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के सिलसिले में भारत में वांछित हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार मेहुल चोकसी के खिलाफ जारी रेड कॉर्नर नोटिस हटाने से संकेत मिलता है कि मेहुल चोकसी अब इंटरपोल की वांटेड लिस्ट में नहीं है। कई रिपोर्ट्स में ये भी कहा गया कि नोटिस हटाए जाने से चोकसी के भारत प्रत्यर्पण में अड़चन आ सकती है।

PNB बैंक घोटाले की जांच पर क्या असर पड़ेगा

चोकसी मामले में समाचार एजेंसी ANI की रिपोर्ट के अनुसार, चोकसी के खिलाफ Interpol की रेड कॉर्नर नोटिस हटाने का पंजाब नेशनल बैंक घोटाला मामले पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इस मामले की जांच पहले से ही एडवांस स्टेज में है।

सीबीआई केवल इंटरपोल के नोटिस पर निर्भर नहीं

सीबीआई के अनुसार, प्रत्यर्पण कार्यवाही के लिए इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस न तो एक शर्त है और न ही इसकी जरूरत होती है। सीबीआई का ग्लोबल ऑपरेशंस सेंटर मेहुल चोकसी जैसे वांछित अपराधियों की बारीकी से निगरानी करता है। सीबीआई केवल इंटरपोल चैनलों पर निर्भर नहीं है। सीबीआई के अनुसार भारत का प्रत्यर्पण अनुरोध एंटीगुआ और बारबुडा में अधिकारियों के समक्ष विचाराधीन है। इंटरपोल के नोटिस से इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

क्या है Interpol Red Corner Notice

गौरतलब है कि रेड कॉर्नर नोटिस भगोड़ों के खिलाफ जारी किए जाते हैं। इसे दुनिया भर में कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अनुरोध के रूप में माना जाता है। इसका मकसद प्रत्यर्पण, आत्मसमर्पण या इसी तरह की कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे आरोपी का पता लगाना होता है। इस नोटिस की मदद से आरोपी को अस्थायी रूप से गिरफ्तार भी किया जा सकता है।

पांच साल से फरार चोकसी एंटीगुआ में दिखा

सीबीआई ने फरवरी 2018 में फरार अपराधी मेहुल चिनूभाई चोकसी का पता लगाने के लिए इंटरपोल से संपर्क किया था। चोकसी की गतिविधियों को सीबीआई ने विदेशी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सीधे समन्वय बनाने के बाद ट्रैक किया। इसके बाद चोकसी को एंटीगुआ और बारबुडा में देखा गया। राजनयिक चैनलों के माध्यम से एंटीगुआ और बारबुडा के अधिकारियों से चोकसी को भारत प्रत्यर्पित किए जाने का अनुरोध अगस्त 2018 में भेजा गया।

कैसे जारी हुआ रेड कॉर्नर नोटिस

भारत लाने की कोशिशों के बीच चोकसी ने इंटरपोल की रेड नोटिस के गैर-प्रकाशन का अनुरोध करते हुए इंटरपोल की फाइलों के नियंत्रण आयोग (सीसीएफ) से संपर्क किया। सीबीआई ने चोकसी की इस अपील के संबंध में कहा, सीसीएफ इंटरपोल के भीतर एक अलग निकाय है जो इंटरपोल सचिवालय के नियंत्रण में नहीं है और मुख्य रूप से विभिन्न देशों के निर्वाचित वकील इसमें काम करते हैं। सीसीएफ ने चोकसी के अनुरोध पर विचार करने के बाद सीबीआई से परामर्श किया। सीसीएफ ने मेहुल चोकसी की अपील खारिज कर दी। जिसके बाद इंटरपोल ने सीबीआई और ईडी के अनुरोध पर दिसंबर 2018 में वांछित आरोपी मेहुल चोकसी के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया।

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    2020 में फिर से खारिज हुई चोकसी की अपील

    2019 में चोकसी ने फिर से इंटरपोल की फाइलों का नियंत्रण पाने के लिए आयोग (सीसीएफ) से संपर्क किया। चोकसी ने इंटरपोल की वेबसाइट से रेड नोटिस को हटाने की मांग की। सीसीएफ ने सीबीआई से परामर्श और इनपुट के आधार पर, 2020 में फिर से चोकसी की याचिका खारिज कर दी।

    CCF ने फैसले में चोकसी के अपराधों पर क्या कहा?

    CBI के अनुसार CCF इस बात को स्पष्ट कर चुकी है कि रेड कॉर्नर नोटिस पर उसके निर्णय में भारत में आरोपित मेहुल चोकसी को किसी भी तरह से अपराधों के लिए दोषी नहीं माना गया है। न ही चोकसी को निर्दोषता करार दिया गया है। सीसीएफ ने दोहराया कि उसने अपने फैसले में तथ्यात्मक निष्कर्ष नहीं निकाला है। ऐसे में चोकसी के निष्पक्ष परीक्षण का रास्ता खुला है। नई जानकारी और निर्णय में गंभीर त्रुटियों के आधार पर सीबीआई सीसीएफ के निर्णय को संशोधित करने के लिए कदम उठा रही है।

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