मेघालय: अस्तित्व बचाने के चक्कर में बीजेपी और एनपीपी के करीब आ रही कांग्रेस, 12 विधायक दे चुके हैं 'धोखा'
गुवाहाटी, 18 दिसंबर: हाल ही में मेघालय में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा था, जहां 12 बागी विधायकों ने टीएमसी ज्वाइन कर ली। इसके बाद से कांग्रेस राज्य में अपने अस्तित्व को बचाने की कोशिश कर रही है। इसके चक्कर में उसे नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के करीब आना पड़ रहा, जो मौजूदा वक्त में राज्य के सत्तारूढ़ गठबंधन का नेतृत्व करती है। खास बात तो ये है कि अस्तित्व की इस लड़ाई में देश की सबसे पुरानी पार्टी बीजेपी के भी करीब आ गई, क्योंकि वो एनपीपी की सहयोगी है।

दरअसल नवंबर के मध्य तक मेघालय में कांग्रेस की मुख्य प्रतिद्वंद्वी पार्टी एनपीपी थी, लेकिन ममता बनर्जी ने वहां पर एक बढ़िया दांव चला और उसके 12 विधायक एक साथ टीएमसी में चले गए। इसके बाद कांग्रेस ने मेघालय लोकतांत्रिक गठबंधन (एमडीए) के साथ मिलकर काम करने का फैसला किया। इसके पीछे उनके नेता जनता का हित बता रहे हैं। पार्टी ने मुख्यमंत्री कोनराड संगमा को भी इसकी जानकारी दे दी है। मामले में कांग्रेस नेता अम्पारीन लिंगदोह ने कहा कि हमने मेघालय के लोगों के व्यापक हित में सरकार को समर्थन देने का फैसला किया है।
मेघालय के राजनीतिक विशेषज्ञों ने कहा कि कांग्रेस के पहले 17 विधायक थे, लेकिन 12 टीएमसी में चले गए। अगर 2023 की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बचे हुए पांच विधायक भी एनपीपी में विलय कर लें, तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए। विधायकों के अलावा बहुत से कार्यकर्ताओं और नेताओं ने भी पार्टी छोड़ी, जिस वजह से स्थिति ज्यादा गंभीर हो गई। वहीं कांग्रेस टीएमसी पर खरीद-फरोख्त का आरोप लगा रही, जिस पर प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि उनका इरादा किसी को धमकाना नहीं है। वो बस एक ऐसी पार्टी का निर्माण करना चाहते हैं, जो जनता के लिए काम करे।












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