Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

मिलिए उस शख्‍स से जिसने पीड़िता को दिया था निर्भया नाम, जानिए उसका निर्भया से क्या था रिश्‍ता

Meet the Narrator Who Gave The Victim Nirbhaya's Name, Know What Her Relationship Was With Nirbhayaमिलिए उस शख्‍स से जिसने पीड़िता को दिया था निर्भया नाम, जानिए उसका निर्भया से क्या था रिश्‍ता

बेंगलुरु। सात साल तीन महीने और तीन दिन बाद ही सही लेकिन 20 मार्च की सुबह वो खुशनुमा खबर लेकर आई जिसका वर्षों से इंजतार था। तिहाड़ जेल में निर्भया के चारों दरिंदों को फांसी पर एक साथ लटका दिया गया और आखिरकार निर्भया को इंसाफ मिला। 16 दिसंबर 2012 की वो काली रात निर्भया के साथ दरिंदगी करने वाले दोषी अंत तक जिंदगी के लिए गिड़गिड़ाते रहे लेकिन अंतत: उन्‍हें उनके किए की उन्‍हें सजा मिली। चारों की फांसी के बाद पूरे देश में जश्‍न मनाया गया। इतने वर्षों तक कोर्ट-कचेहरी के चक्कर काटने के बाद निर्भया के मां-बाप की बेटी को न्‍याय दिलाने के लिए लड़ी जा रही लड़ाई का अंत हुआ और न्‍याय की जीत हुई।

इस सख्‍स ने दिया निर्भया नाम

इस सख्‍स ने दिया निर्भया नाम

दरअसल, निर्भया को न्‍याय दिलाने में एक शख्‍स की शुरुआत से महत्वपूर्ण भूमिका रही जिसने उन दंरिदों से अंत तक अपने बचाव में लड़ाई लड़ने वाली उस बहादुर लड़की को निर्भया का नाम दिया था। बता दें उस रात चलती बस में जिस 23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा के साथ ये दर्दनाक घटना हुई उस पीडि़ता का असली नाम निर्भया नही था। ये नाम उसे बिहार के चंपारण के समाजसेवी सर्वेश तिवारी ने दिया था।

दोषियों को फांसी होने के बाद सर्वेश ने कहा काश...

दोषियों को फांसी होने के बाद सर्वेश ने कहा काश...

सर्वेश शुरुआती दिनों से लेकर अब तक निर्भया की मां आशा देवी और पिता का हर कदम पर साथ दिया। निर्भया के दोषियों की फांसी की खबर सुनकर सर्वेश की आंखें खुशी से छलक पड़ी और कहां काश आज हमारे बीच निर्भया जिंदा होती। इस सख्‍स ने पीडि़ता को न केवल नाम दिया बल्कि मानवत की एक मिसाल कायम की।

सर्वेश ने इस निर्भया के अभिभावकों का दिया ऐसे साथ

सर्वेश ने इस निर्भया के अभिभावकों का दिया ऐसे साथ

इतने वर्षों से निर्भया के माता-पिता के साथ न्याय के लिए लंबी लड़ाई लडऩे वाले सर्वेश तिवारी पूर्वी चंपारण जिले के पहाड़पुर प्रखंड के गांव विशुनपुर मटियरिया के रहने वाले हैं। इन्‍हीं ने निर्भया को न्याय दिलाने के लिए उनके माता-पिता ने निर्भया ज्योति ट्रस्ट की स्थापना की। ट्रस्ट की अध्यक्ष निर्भया की मां आशा देवी व उपाध्यक्ष पिता बद्रीनाथ सिंह ने ट्रस्ट को आगे ले जाने का जिम्मा संघर्ष के शुरुआती दिनों से उनके साथ रहे सर्वेश तिवारी को सौंपा था।

संघर्ष में हर कदम पर दिया साथ

संघर्ष में हर कदम पर दिया साथ

वो इस ट्रस्‍ट के जनरल सेक्रेटरी हैं। निर्भया ज्योति ट्रस्ट के जरिए वह लगातार न्याय के लिए आवाज उठाते रहे इतना ही नही अपने क्षेत्र की अन्‍य लड़कियों के लिए भी वो न्‍याय की लड़ाई लड़ रहे हैं और किशोर न्याय बोर्ड के पुनर्गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सर्वेश निर्भया की मां को न केवल दीदी कहकर संबोधित करते हैं बल्कि वो इतने वर्षों से एक छोटे भाई के सारे फर्ज निभाते आए हैं। सर्वेश तिवारी ने तिहाड़ जेल में चारों को फांसी मिलने के बाद कहा कि बहादुर बेटी निर्भया के लिए पूरा देश एकजुट हुआ, मैं भी उन्हीं में से एक था लेकिन हम सबके संघर्ष की लड़ाई बहुत लंबी होती गई इतने वर्षों में मेरा इन सभी से भावानात्मक जुड़ाव हो गया। मुझे गर्व है कि मैं अपनी बेटी के लिए लड़ाई लड़ी और अंजाम तक पहुंचाया। अगर आज निर्भया जिंदा होती तो मैं एक डाक्टर की मां होती।

मैं जिंदगी भर शुक्रगुजार रहूंगी।

मैं जिंदगी भर शुक्रगुजार रहूंगी।

दोषियों को फांसी मिलने के बाद निर्भया की मां आशा देवी ने संघर्ष के दिनों में उनका साथ निभाने के लिए सर्वेश तिवारी का धन्यवाद भी किया। आशा देवी ने कहा कि सात साल पहले मैंने अपनी बेटी को खो दिया। उसे न्याय दिलाने की लड़ाई में कुछ ऐसे लोग हमारे साथ आए जो अब परिवार का हिस्सा बन गए हैं। आशा देवी ने बताया कि वह मेरे लिए भी छोटे भाई की तरह हैं और इस संघर्ष में लगातार समय, संसाधन और आत्मबल देते रहे़। इन्‍हीं सभी के हर समय साथ देने से दोषियों के वकीलों की हर बार चाल चलने के बावजूद मैं कभी निराश नहीं हुई इन सभी ने जो मेरे से इंसानियत का रिश्‍ता जोड़ कर सदा साथ दिया उसकी मैं जिंदगी भर शुक्रगुजार रहूंगी। आप सभी ने हमेशा साथ देकर हौसला दिया।

फांसी के बाद किसने क्या कहा?

फांसी के बाद किसने क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोषियों की फांसी को न्याय की जीत बताया। उन्होंने कहा, "महिलाओं का सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित किया जाना ज़रूरी है। हमारी नारी शक्ति ने हर क्षेत्र में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। आज हमें मिलकर ऐसे राष्ट्र का निर्माण करना है जो महिला सशक्तीकरण पर आधारित हो और जहां समानता और अवसरों पर ज़ोर हो। वहीं "राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा कि आज एक उदाहरण कायम किया गया है लेकिन ये काम पहले भी किया जा सकता था। उन्होंने कहा, "अब लोगों को पता चलेगा कि भले की सज़ा मिलने में देरी हो लेकिन उन्हें गुनाह करने पर सज़ा ज़रूर मिलेगी। "

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+