चाबहार बंदरगाह पर विशेष छूट के लिए भारत ने अमेरिका को सराहा
नई दिल्ली। भारत ने चाबहार बंदरगाह के विकास के लिये छूट पर अमेरिका की सराहना की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने गुरुवार को कहा, चाबहार परियोजना के महत्व पर अमेरिका ने समझदारी दिखाई है। पूरी बात किस तरह का असर डालती है, अभी यह नहीं कहा जा सकता है, इसे हमें देखना होगा। इसके बावजूद हम अमेरिका की ओर से चाबहार बंदरगाह को प्रतिबंधों से छूट देने की सराहना करते हैं।

चाबहार बंदरगाह को भारत, ईरान और अफगानिस्तान संयुक्त तौर पर विकसित कर रहे हैं। यह ईरान के सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत में स्थित है तथा हिंद महासागर के तट पर है। अमेरिका ने ईरान के साथ तनाव के बीच हाल ही में कहा है कि हमने भारत को चाबहार बंदरगाह के विकास की छूट दी है। जबतक इस निर्माण में ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स संलिप्त नहीं होती है, प्रतिबंधों से छूट दी जाती रहेगी। इसके बाद अब भारत के विदेश मंत्रालय का बयान आया है।
विदेश मंत्रालय प्रवक्ता ने पाकिस्तान के ननकाना साहिब पर भीड़ के हमले और पेशावर में एक सिख युवक की हत्या पर कहा कि पड़ोसी देश में अल्पसंख्यक दहशत में हैं। पाकिस्तान इस पर ध्यान दे औक दूसरों को सलाह देना बंद करे।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने जम्मू-कश्मीर में 15 विदेशी दूतों की यात्रा को लेकर बताया कि इसका मकसद घाटी की सुरक्षा व्यवस्था के बारे में उनको जानकारी देना था। साथ ही वो जान सकें कि शांति व्यवस्था को बरकरार रखने के लिए आतंकवाद के खतरे से कैसे निबटा जाए। रवीश कुमार ने बताया कि सरकार, अपनी इस कोशिश के जरिए घाटी की स्थिति को सामान्य करने के लिए हो रहे प्रयासों की एक झलक दिखाना चाहती थी। इस ग्रुप में अमेरिका, दक्षिण कोरिया, नॉर्वे, वियतनाम, अर्जेंटीना, बांग्लादेश, मालदीव, मोरक्को, फिजी, फिलीपींस, पेरु, नाइजर, नाइजीरिया, टोगो और गुएना के राजदूत शामिल थे।












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