पैंगोंग झील पर चीन के पुल बनाए जाने पर बोला विदेश मंत्रालय- हमारी स्थिति पर बारीक नजर
नई दिल्ली, 6 जनवरी: पैंगोंग झील पर चीन के पुल बनाए जाने से जुड़ी खबरों को लेकर भारत ने कहा है कि इस मामले पर सरकार बारीक नजर रखे हुए है। गुरुवार को विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि इस ब्रिज का निर्माण उस इलाके में हो रहा है, जो करीब 60 साल से चीन के अवैध कब्जे में हैं। सरकार सुरक्षा हितों को देखते हुए सभी जरूरी कदम उठा रही है।

हाल ही में सेटे लाइट तस्वीरों के जरिए सामने आया था कि चीन एलएसी के बेहद करीब पैंगोंग झील के अपने कब्जे वाले क्षेत्र में पुल का निर्माण कर रहा है। पुल पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारों को जोड़ेगा, जिससे चीनी सेना को काफी फायदा होगा। इस पर अब भारत ने प्रतिक्रिया दी है। भारत ने कहा है कि हमें उम्मीद है चीन इस तरह की हरकतों में शामिल होने के बजाय उन मुद्दों को सुलझाने के लिए भारत के साथ मिलकर कदम उठाएगा, जिन पर दोनों देशों में टकराव है।
अरुणाचल में क्षेत्रों का नाम बदलना चीन की बेकार की कवायद
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि हमने पिछले सप्ताह चीनी की ओर से अरुणाचल प्रदेश में कुछ स्थानों के नाम बदलने से जुड़ी रिपोर्ट भी देखी थीं। किसी क्षेत्र को अपना बताने की इस तरह की कवायद हास्यास्पद है।
गलवान में चीनी सेना के झंडा फहराते हुए वीडियो को लेकर विदेश मंत्रालय प्रवक्ता ने कहा, इस पर मीडिया में आई खबरें तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं। भारत में कई मीडिया घरानों ने दावे के विपरीत तस्वीरें जारी की हैं।
अफगानिस्तान को मदद की प्रतिबद्धता
अरिंदम बागची ने बताया है कि भारत ने अफग़ानिस्तान को मानवीय सहायता के रूप में 50 हजार मीट्रिक टन गेहूं के साथ जीवन रक्षक दवाइयों की आपूर्ति करने की प्रतिबद्धता की है। इस संबंध में हम पाकिस्तानी प्राधिकारियों के साथ गेहूं के शिपमेंट के सही तौर तरीकों पर बात कर रहे हैं।
श्रीलंका में मछुआरों की गिरफ्तारी पर मंत्रालय
श्रीलंका में भारतीय मछुआरों की गिरफ्तारी पर विदेश मंत्रालय प्रवक्ता ने कहा, श्रीलंका प्रशासन ने 18-20 दिसंबर के बीच तमिलनाडु के 68 मछुआरों और 10 नौकाओं को हिरासत में लिया था। इस मामले के संबंध में भारत सरकार ने श्रीलंका सरकार से बात की है। इन मछुआरों को जरूरत की सभी सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। कोलंबो में भारतीय उच्चायोग ने इन भारतीय मछुआरों की शीघ्र रिहाई का मुद्दा उठाया है। अभी तक 12 मछुआरों को रिहा किया जा चुका है। भारतीय उच्चायोग बाकी मछुआरों की जल्द रिहाई के लिए भी कोशिश कर रहा है।












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