RBI से मिले 1.76 लाख करोड़ के फंड का क्या करेगी मोदी सरकार?

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    Modi Government को RBI दिए 1.76 लाख करोड़, जानिए कहा लग सकता है पैसा

    नई दिल्ली। अर्थव्यवस्था में छाई मंदी के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से केंद्र सरकार के लिए अच्छी खबर है। इकोनॉमी को सुधारने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से किए गए कई बड़े ऐलान के बाद आरबीआई ने भी सरकार के लिए खजाना खोला है। भारतीय रिजर्व बैंक ने सोमवार को केंद्र सरकार को लाभांश और सरप्लस फंड की मद से रिकॉर्ड 1.76 लाख करोड़ रुपये ट्रांसफर करने का फैसला लिया है। आर्थिक मंदी का सामना कर रही मोदी सरकार के लिए यह बड़ी राहत की खबर है। माना जा रहा है कि आरबीआई के इस फंड से सरकार को जरूरी योजनाओं को आगे बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी। सरकार इस फंड के जरिए अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए बड़े फैसले भी ले सकती है। आइये जानते हैं कि आरबीआई से मिले 1.76 लाख करोड़ के फंड का मोदी सरकार क्या करेगी?

    सरकार ले सकती है ये बड़े फैसले

    सरकार ले सकती है ये बड़े फैसले

    मंदी से बचाने के लिए RBI ने खोला खजाना, सरकार को देगी 1.76 लाख करोड़

    माना जा रहा कि भारतीय रिजर्व बैंक से मिले खजाने का एक बड़ा हिस्सा सरकार इन्फ्रास्ट्रक्चर यानी बुनियादी ढांचे के विकास के लिए कर सकती है। अभी बैंक भी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को कर्ज देने से हिचक रहे हैं। सरकार से बड़ी पूंजी मिलने के बाद उनके लिए भी ऐसी परियोजनाओं को कर्ज देना आसान हो जाएगा। आरबीआई से मिले फंड का इस्तेमाल सरकार नेशनल हाउसिंग बैंक (एनएचबी), सिडबी और नाबार्ड जैसी एजेंसियों की पूंजी बढ़ाने में कर सकती है। इसके साथ ही सरकार बड़े पूंजीगत खर्च कर सकेगी।

    राजकोषीय घाटे के मोर्चे पर सरकार को बड़ी राहत

    राजकोषीय घाटे के मोर्चे पर सरकार को बड़ी राहत

    चालू वित्त वर्ष में केंद्र को सौंपी गई ये बड़ी राशि सरकार को राजकोषीय घाटे के मोर्चे पर बड़ी राहत प्रदान कर सकती है। आरबीआई के लाभांश के कारण, 65,000 करोड़ रुपये या उससे अधिक अतिरिक्त गैर-कर राजस्व (वित्त वर्ष 2020 के लिए जो भी बजट में चुना गया था) से काफी हद तक केंद्र को कर संग्रह में कमी को संभाल सकता है। जीएसटी संग्रह पर भी बहुत अनिश्चितता है। इसलिए RBI का अधिशेष केंद्र के लिए कुल राजस्व को बढ़ावा दे सकता है और अपने वित्तीय घाटे के लक्ष्य को पूरा करने में मदद कर सकता है। सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष के लिए 3.3 फीसदी का फिस्कल डेफिसिट टारगेट फिक्स किया था, जिसे 2019-20 के यूनियन बजट में रिवाइज करके 3.4 फीसदी कर दिया था।

    RBI सरकार को देगी 1.76 लाख करोड़

    RBI सरकार को देगी 1.76 लाख करोड़

    भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बिमल जालान की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों के आधार पर 1,76,051 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने का फैसला लिया है। इसमें से 1,23,414 करोड़ रुपये की सरप्लस राशि 2018-19 के लिए होगी। इसके अलावा संशोधित आर्थिक पूंजी ढांचे के अनुसार अतिरिक्त प्रावधानों के तहत 52,637 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। अतिरिक्त प्रावधान की यह राशि आरबीआई की आर्थिक पूंजी से संबंधित संशोधित नियमों (ECF) के आधार पर निकाली गई है।

    बिमल जालान की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिश पर फैसला

    बिमल जालान की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिश पर फैसला

    आरबीआई अपने निवेश और नोटों-सिक्कों की छपाई से होने वाले मुनाफे के आधार पर हर साल सरकार को लाभांश का भुगतान करता है। इस बार भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से सरकार को 1.76 लाख करोड़ रुपये के हस्तांतरण का फैसला लिया गया। RBI की ओर से सरप्लस ट्रांसफर से केंद्र सरकार को सार्वजनिक ऋण चुकाने तथा बैंकों में पूंजी डालने में मदद मिलेगी। इस साल आरबीआई को दिया जा रहा लाभांश पिछले रिकॉर्ड 65,896 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग दोगुना है।

    आरबीआई के फैसले पर राहुल गांधी का पलटवार

    आरबीआई के फैसले पर राहुल गांधी का पलटवार

    हालांकि, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने जिस तरह से केंद्र सरकार को 1.76 लाख करोड़ रुपये की मदद देने का ऐलान किया है, उसके बाद कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने कहा, 'प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को समझ नहीं आ रहा है कि देश चौपट अर्थव्यवस्था को कैसे पटरी पर लाया जाए। रिजर्व बैंक से चोरी काम नहीं आएगी, यह चोरी ऐसी है जैसे किसी मेडिकल स्टोर से बैंडएड लेकर बंदूक से लगी चोट पर लगाना।"

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