वैक्सीन आने के बाद भी मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का करना होगा पालन: ICMR
नई दिल्ली: कोरोना वायरस का संक्रमण पूरे भारत में फैल चुका है। जिस वजह से लोगों को तमाम पाबंदियों के साथ जीना पड़ रहा है। इस बीच कुछ कंपनियों ने दावा किया है कि अगले दो-तीन महीने में उनकी वैक्सीन बाजार में आ जाएगी। लोगों का मानना है कि वैक्सीन आने के बाद पाबंदियां खत्म हो जाएंगी, लेकिन इस मामले में आईसीएमआर की राय अलग है। आईसीएमआर के मुताबिक अगर वैक्सीन आ भी जाएगी, तब भी लंबे वक्त तक लोगों को दिशानिर्देशों का पालन करना पड़ेगा। हालांकि लॉकडाउन को फिर से लागू करने की संभावना से ICMR ने इनकार किया है।

लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में आयोजित एक वेबिनार में ICMR के प्रमुख प्रोफेसर बलराम भार्गव ने भी हिस्सा लिया। इस दौरान डॉ. भार्गव ने कहा कि भारत कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। सब कुछ सही रहा तो अगले साल जुलाई तक 30 करोड़ भारतीयों को वैक्सीन उपलब्ध करवा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि भारत सिर्फ अपने लिए ही नहीं बल्कि विकासशील देशों के 60 प्रतिशत लोगों के लिए भी वैक्सीन का उत्पादन करेगा। अभी 24 विनिर्माण इकाइयां और 19 फर्म कोरोना वैक्सीन के उत्पादन में लगे हैं।
डॉ. भार्गव के मुताबिक जो लोग समझ रहे कि वैक्सीन आने के बाद मास्क से छुटकारा मिल जाएगा वो गलत हैं। वैक्सीन के बाद भी मास्क समेत अन्य निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा कि मास्क कपड़े की एक वैक्सीन की तरह है। जिसने कोविड-19 संक्रमण रोकने में अहम भूमिका निभाई। वैसे तो वैक्सीन पूरी सुरक्षा देगी, लेकिन मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग को हम छोड़ नहीं सकते हैं। डॉ. भार्गव ने बताया कि मौजूदा वक्त में भारत में 5 वैक्सीनों का ट्रायल चल रहा है। इसमें तो दो पूरी तरह से भारत में निर्मित हैं, जबकि तीन विदेशी हैं।












Click it and Unblock the Notifications