मराठा आरक्षण के मामले में कैसे उलझ चुकी है महाराष्ट्र सरकार?

महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मसला इस बार राज्य की एकनाथ शिंदे की सरकार के लिए बहुत बड़ी चुनौती बन गया है। मराठा आरक्षण की मांग करने वाले सरकार को बात नहीं मानने पर परिणाम भुगतने की कह रहे हैं। दूसरी तरफ उनकी मांगों के विरोध में एक समानांतर वर्ग और खड़ा हो चुका है।

तात्कालिक दिक्कत ये है कि मराठा आरक्षण की मांग को लेकर नांदेड़ में 24 साल का एक युवक अपनी जान दे चुका है। मराठा आरक्षण की मांग करने वाले इस समुदाय से यह कम से कम तीसरी आत्महत्या है।

maratha reservation

अनिश्चितकालीन उपवास का एलान कर चुके हैं मराठा नेता
मराठा आरक्षण के अगुवा नेताओं में शामिल मनोज जारांगे पाटिल ने अब ऐलान किया है कि अगर 24 अक्टूबर तक उन्हें आरक्षण नहीं मिलता तो अगले दिन से वे फिर से अनिश्चितकालीन उपवास शुरू कर देंगे। उनके मुताबिक मराठा समाज के कई और लोग भी 28 अक्टूबर से पूरे प्रदेश में इसी तरह से अनिश्चितकालीन क्रमिक उपवास पर बैठ जाएंगे।

नेताओं से दूरी बनाकर चलेगा मराठा आरक्षण आंदोलन
जारांगे ने महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे सरकार को चेतावनी दी है कि इस बार उसके लिए विरोध का सामना करना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा है, 'मैं किसी भी तरह की मेडिकल सहायता नहीं लूंगा। 25 अक्टूबर से किसी भी नेता को अंतरवाली सराती (जारांगे का गांव जहां वे उपवास करने वाले हैं) में नहीं घुसने दिया जाएगा.....'

मराठा गांवों में नेताओं की नो-एंट्री वाले बोर्ड
इससे पहले उन्होंने इसी साल अगस्त-सितंबर में 17 दिनों का जो उपवास किया था, उसने मराठों को इस मुद्दे पर गोलबंद कर दिया था। लेकिन, इस मुद्दे पर जिस तरह से समाज के एक युवक की जान गई है, उसने इन्हें बहुत ही ज्यादा नाराज कर दिया है। राज्य में छत्रपति संभाजी नगर, नाशिक, नांदेड़ और सोलापुर जिलों में 500 से ज्यादा गांवों में मराठों की बड़ी आबादी है। इनमें से कम से कम 515 गांवों नेताओं की नो-एंट्री वाले बोर्ड लग चुके हैं।

शिंदे सरकार ने कुछ और समय देने का किया अनुरोध
जाहिर लोकसभा चुनावों से पहले राज्य की बीजेपी-शिवसेना और एनसीपी गठबंधन सरकार के लिए यह बहुत बड़ी चुनौती बन गई है। सीएम शिंदे ने मराठा नेताओं से यही गुजारिश की है कि सरकार को कुछ समय और दें, ताकि वह इस मसले का कोई समाधान खोज सके।

उन्होंने कहा है, 'मैं पूरे महाराष्ट्र को अपना परिवार मानता हूं। आत्महत्या दुर्भाग्यपूर्ण है। मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि महाराष्ट्र सरकार मराठों को आरक्षण देने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रही है। हमने सुप्रीम कोर्ट में एक क्यूरेटिव पिटीशन भी डाला है। थोड़ा धैर्य रखें, हमें कुछ समय दें, राज्य सरकार इस समुदाय को आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध है।'

सुप्रीम कोर्ट से खारिज हो चुका है मराठा आरक्षण
दरअसल, महाराष्ट्र सरकार ने मराठों को शैक्षणिक और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग के तौर पर कोटा दिया था। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने इसे 50% आरक्षण की सीमा से ज्यादा बताते हुए और कई अन्य वजहों से खारिज कर दिया था।

ओबीसी जाति का दर्जा देने का हो रहा है समानांतर विरोध
इसके बाद जारांगे समेत कई और मराठा नेताओं ने समाज के लिए कुनबी होने का सर्टिफिकेट देने की मांग शुरू की है। राज्य में कुनबी जाति ओबीसी में शामिल है। लेकिन, खुद कुनबी जाति और अन्य ओबीसी जातियों के संगठनों की ओर से इस मांग का भारी विरोध हो रहा है। इसलिए राज्य सरकार के लिए यह रास्ता भी आसान नहीं है।

विपक्षी दलों के स्टैंड ने भी मराठों को किया है नाराज
हालांकि, महाराष्ट्र में मराठा जहां शुरू में शिंदे सरकार से आरक्षण नहीं मिल पाने की वजह से नाराज थे, अब वे दूसरे राजनीतिक दलों से भी नाखुश हैं। जैसे कांग्रेस उन्हें कोटा देने का समर्थन तो कर रही है, लेकिन मराठा समाज को ओबीसी के दायरे में लाने के पक्ष में नहीं है।

इस बार फंस गई सरकार?
बहरहाल, राज्य सरकार के लिए परिस्थियां अनुकूल नहीं हैं। सितंबर में तो मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे मनोज जारांगे पाटिल का उपवास खत्म करवाने में सफल हो गए थे। लेकिन, इस बार आंदोलन का दायरा बड़ा है और आत्महत्याओं की कड़ी ने इसकी संवेदनशीलता बहुत ही ज्यादा बढ़ा दी है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+