Manipur: मैतेई संगठन ने उठाई कुकी उग्रवादियों पर हल्ला बोलने की मांग, NRC लागू करने के लिए सरकार से खास अपील

Manipur News: मणिपुर में अवैध घुसपैठियों की पहचान के लिए नेशनल रजिस्टर फॉर सिटीजन्स (NRC) लागू करने की मांग उठनी शुरू हो गई है। मैतेई ग्रुप कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी (COCOMI) ने रविवार को यह मांग की है। इसके मुताबिक केंद्र सरकार राज्य में अगर एनआरसी लागू करती है तो म्यांमार से आए अवैध घुसपैठियों की पहचान की जा सकेगी। इसके साथ ही संगठन ने कुकी उग्रवादियों के खिलाफ मिलिट्री ऑपरेशन शुरू करने की भी मांग कर दी है।

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Manipur: मैतेई संगठन ने कुकी उग्रवादियों के खिलाफ मिलिट्री एक्शन शुरू करने की मांग की

COCOMI के संयोजक सोमेन्द्रो थोकचोम ने कहा है, 'कदांगबंद में इस महीने की शुरुआत में ताजा बमबारी के बावजूद केंद्र ने कोई एक्शन नहीं लिया है। इससे लगता है कि राज्य की जनता को देश का नागरिक नहीं समझा जा रहा है।' 14 जनवरी को मणिपुर के इंफाल वेस्ट जिले के कदांगबंद इलाके में संदिग्ध आतंकियों ने बमों से हमला शुरू कर दिया था।

थोकचोम के मुताबिक, 'यह संघर्ष तभी खत्म होगा जब केंद्र सरकार ठोस कार्रवाई करेगी और कुकी उग्रवादियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू करेगी।' इंफाल के कई सिविल सोसाइटी संगठनों ने भी सरकार से मांग की है कि कुकी उग्रवादियों के खिलाफ कार्रवाई करे। राज्य में जारी जातीय हिंसा में अबतक 250 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और हजारों बेघर हो चुके हैं।

Manipur: अवैध घुसपैठियों की पहचान के लिए मणिपुर में एनआरसी लागू करना जरूरी- मैतेई संगठन

इसके साथ ही उन्होंने कहा है, 'अवैध घुसपैठियों की पहचान के लिए (मणिपुर में) एनआरसी लागू करने की जरूरत है। म्यांमार के लोगों के लिए शरणार्थी डिटेंशन कैंप केवल मणिपुर तक ही सीमित नहीं होने चाहिए। राज्य में भू-संसाधन सीमित हैं। दूसरे राज्यों में भी कैंप स्थापित किए जाने चाहिए।'

उनका कहना है कि म्यांमार सीमा पर जल्द से जल्द बाड़बंदी आवश्यक है, ताकि अवैध घुसपैठियों की आवक भी रुके और पड़ोसी मुल्क से हथियारों और ड्रग्स की सप्लाई पर भी ब्रेक लगे।

Manipur:अवैध घुसपैठ, हथियार और ड्रग्स की तस्करी संघर्ष की मूल वजह- मैतेई संगठन

उन्होंने कहा, 'म्यांमार से मणिपुर में अवैध घुसपैठ, हथियार और ड्रग्स की तस्करी राज्य के संघर्ष का मूल मुद्दा बना हुआ है। उनके मुताबिक,'राज्य में हालात में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। कार्रवाई हो रही है, इसका कोई संकेत नहीं है। पिछले साल नवंबर में जिरीबाम जिले में कुकी और हमार उग्रवादियों के हाथों तीन महिलाओं और तीन बच्चों की हत्या और कांगपोकपी जिले के लेइमाखोंग में सेना शिविर से एक शख्स के लापता होने का मामला अभी तक अनसुलझा है।' (इनपुट-पीटीआई)

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