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Mandsaur: मंदसौर में अब भी शिवराज सरकार से मदद की बाट जोह रहे किसान, मुआवजे के बाद भी नहीं बदली स्थिति

By Ankur Singh
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    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के मंदसौर में जिस तरह से किसानों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस की गोली से किसानों की मौत हुई थी, उसके बाद आजतक किसानों के भीतर गुस्सा बरकरार है। आज भी किसान अपनी जमीन की बेहतर कीमत के लिए सरकार से मांग कर रहे है। अधिकतर किसान जोकि मध्य प्रदेश सरकार से नाराज चल रहे हैं वह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से आज मुलाकात की योजना बना रहे हैं। हालांकि इस घटना में मारे गए किसानों के परिजनों को सरकार ने एक करोड़ रुपए का मुआवजा और सरकारी नौकरी दी थी, लेकिन इन लोगों का मानना है कि इस समस्या की जड़ कुछ और है और अभी तक इसका समाधान नहीं किया गया है, उन्हें अभी तक इस मामले में न्याय नहीं मिला है।

    mandsaur

    सही कीमत नहीं मिल रही
    चिल्लौड पिपल्या गांव में रहने वाले कन्हैया कुमार पाटीदार जिनकी पिछले वर्ष जून माह में हत्या कर दी गई थी, उनके बड़े भाई जगदीश का कहना है कि सरकार ने पुलिस फायरिंग में मारे गए किसानों के परिजनों को एक करोड़ रुपए और परिवार के सदस्यों को नौकरी दी है, लेकिन इसके बावजूद भी किसानों के लिए खेती घाटे का सौदा है। मंडियों में हमेशा से फसल की कीमत कम रहती है, बड़े व्यापारी अधिकतर फसल को खरीद लेते हैं और दाम को बाद में बढ़ा देते हैं, जिसकी वजह से इसका फायदा व्यापारियों को होता है नाकि किसानों को।

    देर से मिलता है पैसा
    पिछले वर्ष मध्य प्रदेश सरकार ने खरीफ फसल के लिए किसानों को बेहतर दाम दिलाने के लिए अहम कदम उठाया था और जिन किसानों को उनकी मूल्य की सही कीमत नहीं मिली थी, उसे सीधे उनके बैंक खाते में जमा कराया गया था। किसानों को एमएसपी सीधे उनके बैंक खाते में डाली गई थी। जगदीश का कहना है कि हम जैसे किसानों को कर्ज चुकाने के लिए तुरंत पैसा चाहिए होता है, लेकिन सरकार की योजना में कम से कम 2-3 महीने का वक्त लग जाता है। मैंने 20 दिन पहले आठ कुंटल चना 4400 रुपए प्रति कुंटल के दाम से बेचा था। जोकि तकरीबन 1000 रुपए मंडी के दाम से अधिक है, लेकिन मुझे अभी तक यह पैसा नहीं मिला है।

    पुलिस का खौफ
    वहीं एक और किसान प्रवीण कुमार का कहना है कि मैंने पिछले वर्ष 75000 रुपए का अदरक बेचा था, लेकिन अगर इसे आज मंडी में बेचता तो 80000 रुपए मिलता। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार की वजह से किसानों को इस योजना से जोड़ा नहीं जा रहा है, जिसकी वजह से व्यापारी फसल को खरीद लेते हैं और किसानों को बीबीवाई योजना का लाभ नहीं मिल पाता है। किसानों का कहना है कि हमारे गांव में पुलिस का भी काफी खौफ है। किसान पुलिस के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, जिसकी वजह से वह लगातार पुलिस के निशाने पर रहते हैं।

    आज भी सदमे में परिवार
    कन्हैयालाल के घर में एक करोड़ रुपए की वजह से कुछ खास बदलाव नहीं आया है, आज भी उनकी मोटरसाइकिल घर में खड़ी है और उनका परिवार मिट्टी में बैठने को मजबूर है। उनकी पत्नी सुमित्रा और मां देबू बाई उनसे दूर रहते हैं। उनके पास कुल 6 बीघा जमीन है, जिसपर खेती नहीं होती है। सुमित्रा का कहना है कि मैं आधा बोरी सामान भी नहीं उठा पाती हूं क्योंकि यह आदमियों का काम है, वह आज भी अपने पति की मृत्यु से सदमे में हैं। सुमित्रा को सरकार की ओर से सकुल 34 लाख रुपए मिले और उनके दो बच्चों को 33-33 लाख रुपए। जिसमे से अधिकतर पैसा एफडी में है, इसमे से एक भी पैसा खर्च नहीं किया गया है।

    घर में रखी है फसल
    वहीं बरखेड़ा पंथ में अभिषेक दिनेश के माता-पिता दिनेश और अल्का बाई को सरकार की ओर से दिए गए पैसे में से 13 लाख रुपए कुंआ खुदाने में खर्च हो गया है, जिसके बाद उनकी चार बीघे की खेती उपजाउ हो सकी है, साथ ही वह अपने घर की छत इन पैसों से बनवा सके हैं। दिनेश ने अभी तक अपनी फसल इस वर्ष नहीं बेची है। उनके खेत में इस बार 60 कुंतल मसूर की दाल, सोयाबीन, चना और सरसो का तेल हुआ था, जोकि घर में ही पड़ा हुआ है। इनकी समस्या यह है कि पूरी जमीन दिनेश के पिता भंवर लाल की है जिनके साथ वह रहते नहीं हैं।

    राहुल से आज होगी मुलाकात
    कांग्रेस की ओर से पांच किसान परिवारों को राहुल गांधी से मुलाकात करने के लिए बुलाया गया है, इसपर दिनेश का कहना है कि मुझे किसी भी नेता से कुछ भी लेना देना नहीं है, लेकिन मैं राहुल गांधी से मिलने के लिए जाउंगा। उनका कहना है कि सरकार ने प्रदर्शन को रोकने के लिए पूरी ताकत लगा दी थी, लेकिन कांग्रेस और योगेंद्र यादव जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार को झुकने के लिए मजबूर किया था।

    इसे भी पढ़ें- Mandsaur Farmers Rally: 6 जून 2017 को मंदसौर में दरअसल हुआ क्या था?

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    English summary
    Mandsaur There is hardly any change in the life of farmers even after the compensation. Farmers are still pleading.

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