INDIA ब्लॉक में रहकर BJP से ज्यादा विपक्ष को घाव क्यों देती है TMC? ममता के अबतक के 6 झटके

INDIA News: लोकसभा में 10 साल बाद विपक्ष का कुनबा बढ़ा है और कांग्रेस किसी तरह प्रतिपक्ष के नेता का पद हासिल कर सकी है, जिससे इंडिया ब्लॉक का हौसला बुलंद है। लेकिन, तृणमूल कांग्रेस इस कुनबे का हिस्सा बनकर भी उससे अलग दिखने की कोशिश में है। ताजा मामला निचले सदन में सीटिंग अरेंजमेंट को लेकर है।

बीजेपी की अगुआई वाले एनडीए के खिलाफ विपक्ष इंडिया ब्लॉक बनाकर चुनाव लड़ा। इसे बनाने में टीएमसी सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की खास भूमिका रही। लेकिन, कम से कम अबतक 6 ऐसे मौके आए हैं, जब तृणमूल कांग्रेस ने विपक्ष को भाजपा से ज्यादा सियासी घाव दिए हैं।

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लोकसभा में इंडिया ब्लॉक से अलग दिखेगी टीएमसी!
ऐसी जानकारी है कि लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला के साथ विपक्ष सदन में सीटिंग अरेंजमेंट को लेकर चर्चा कर रहा है। पता चला है कि स्पीकर ने इंडिया ब्लॉक को इसके लिए पेशकश भी की है, जिसमें टीएमसी को इस समूह में नहीं रखा गया है। सूत्रों का कहा कहना है कि ममता बनर्जी की पार्टी जिनके लोकसभा में 29 सांसद हैं, वह इसके लिए स्पीकर से अलग से बातचीत कर रही है।

सूत्रों का कहना है कि 18वीं लोकसभा के दूसरे सत्र चालू होने के बावजूद अबतक सीटों की सटीक अरेंजमेंट इसलिए नहीं हो पायी है क्योंकि संख्या बल बढ़ने की वजह से विपक्षी दल ज्यादा से ज्यादा पहली कतार की सीटों पर दावेदारी कर रहे हैं।

जाहिर है कि कांग्रेस अपने लिए ज्यादा सीटें चाह ही रही है तो 37 सांसद वाली समाजवादी पार्टी के लिए भी विपक्ष को उसी के हिसाब से अगली कतार की सीटों की दरकार पड़ेगी। इसी तरह से डीएमके और उद्धव ठाकरे की शिवसेना को भी छोड़ना कांग्रेस के लिए आसान नहीं होगा।

विपक्ष को घाव क्यों दे रही है तृणमूल?
इस वजह से टीएमसी की ओर से जो अलग से सौदेबाजी की जानकारी मिल रही है, उससे लग रहा है कि वह खुद को बीजेपी-विरोधी विपक्षी ताकत के रूप में अपनी अलग पहचान कायम करना चाह रही है। ममता बनर्जी की पार्टी इंडिया ब्लॉक बनने के बाद से कम से कम पांच बार पहले भी इसी तरह की रणनीति अपना चुकी है, जिससे विपक्षी गठबंधन को मायूसी मिली है।

नीति आयोग बैठक में पहुंचीं ममता
ममता बनर्जी 27, जुलाई, 2024 को नीति आयोग की बैठक में भी शामिल हो चुकी हैं, जो कि इंडिया ब्लॉक के फैसले से अलग लाइन थी। हालांकि, वह बैठक बीच में छोड़कर जरूर चली गईं, लेकिन इसमें पहुंचने को लेकर यह कह गईं कि इसके बहिष्कार को लेकर विपक्षी गठबंधन में तालमेल ही नहीं था।

इमरजेंसी पर प्रस्ताव के विरोध में कांग्रेस का साथ नहीं दिया
पिछले सत्र में संसद से इंदिरा सरकार की इमरजेंसी के खिलाफ प्रस्ताव पास हुआ था। कांग्रेस ने इसका जो विरोध किया, टीएमसी उसके साथ भी खड़ी नहीं हुई। आपातकाल की शिकार हुई कई इंडिया ब्लॉक की पार्टियां भी इसमें कांग्रेस के साथ नहीं थीं। लेकिन, उनका तर्क था कि वह भी आपातकाल की पीड़ित रही हैं।

लेकिन, जब इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाया था, तब तृणमूल के तमाम शीर्ष नेता उसी कांग्रेस का हिस्सा थे और पार्टी बनी भी नहीं थी।

स्पीकर के चुनाव में भी विपक्षी गठबंधन से अलग रुख
लोकसभा चुनाव के बाद जब कांग्रेस ने एनडीए के उम्मीदवार ओम बिरला के खिलाफ प्रत्याशी उतारा, तब भी टीएमसी विपक्ष के साथ खड़ी नहीं हुई। जब मतदान का समय आया तो कांग्रेस ने मत विभाजन के बजाय ध्वनि मत से स्पीकर के चुनाव का समर्थन किया, लेकिन टीएमसी इसके विरोध में उठकर चलती बनी।

1 जून को इंडिया ब्लॉक की बैठक से भी दूरी
लोकसभा चुनाव में अंतिम दौर के चुनाव के दिन 1 जून को कांग्रेस की ओर से दिल्ली में इंडिया ब्लॉक की एक बैठक आयोजित की गई थी। लेकिन, ममता बनर्जी की पार्टी ने इससे साफ तौर पर दूरी बना ली और कहा कि वह पहले मतदान पर फोकस करना चाहती है।

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बंगाल में इंडिया ब्लॉक से अलग चुनाव लड़ी तृणमूल
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी इंडिया ब्लॉक के तहत कांग्रेस और वामपंथी दलों के साथ सीटों के तालमेल पर राजी नहीं हुईं। नतीजा ये हुआ कि विपक्षी गठबंधन में रहते हुए टीएमसी और कांग्रेस के साथ-साथ वामपंथी दलों ने भी अपने उम्मीदवार उतारे। परिणाम ये हुआ कि लेफ्ट साफ हो गया और कांग्रेस की सीटें घटकर आधी रह गई।

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