Mamata Banerjee News: ममता सरकार को सुप्रीम कोर्ट से झटका, देना होगा कर्मचारियों को 25% DA
Mamata Banerjee News: पश्चिम बंगाल के लाखों सरकारी कर्मचारियों के लिए गुरुवार (5 फरवरी) को बड़ी राहत की खबर है। हालांकि, चुनाव से ठीक पहले ममता बनर्जी सरकार के लिए यह करारा झटका है। सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी सरकार को सख्त निर्देश देते हुए कर्मचारियों के डीए भत्ते के भुगतान का आदेश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार को 31 मार्च 2026 तक कर्मचारियों के लंबित महंगाई भत्ते (DA) के कुल बकाये का 25 प्रतिशत भुगतान करने का निर्देश दिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब राज्य विधानसभा में लेखानुदान पेश किया जा रहा है। कोर्ट के फैसले पर राजनीतिक बयानबाजी और प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया है।

Bengal Chunav से पहले ममता बनर्जी सरकार को झटका
- जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की खंडपीठ ने यह फैसला दिया है। दो जजों की पीठ ने कहा कि कर्मचारियों का बकाया DA लंबे समय से लंबित है और इसका एक-चौथाई हिस्सा तय समय सीमा के भीतर देना अनिवार्य होगा।
- कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि बाकी 75 प्रतिशत राशि के भुगतान की रूपरेखा तय करने के लिए अदालत ने चार सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति गठित करने का निर्देश दिया है।
- चुनाव से पहले डीए भत्ता भुगतान के आदेश पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। बंगाल सरकार के लिए अब इस आदेश का पालन बाध्यता है और बीजेपी के लिए यह बड़ा मुद्दा बन सकता है।
TMC को झटका, पिछले साल भी कोर्ट ने दिया था आदेश
दरअसल, पिछले साल 16 मई को सुप्रीम कोर्ट ने तीन महीने के भीतर DA भुगतान का आदेश दिया था। हालांकि, राज्य सरकार ने वित्तीय संसाधनों की कमी का हवाला देते हुए समय-सीमा बढ़ाने की मांग की थी। सरकार ने छह महीने का अतिरिक्त समय मांगा था। लगातार टलती तारीखों को देखते हुए अदालत ने अब अंतिम समय-सीमा तय कर दी है।
Mamata Banerjee News: सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार पर की सख्त टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने भुगतान का आदेश देते हुए राज्य सरकार पर सरकार पर सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि डीए कर्मचारियों को मिलने वाला दान नहीं, उनका अधिकार है। इसे तत्काल जारी किया जाना चाहिए। कोर्ट के फैसले के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह कर्मचारियों के अधिकारों की जीत है।
बीजेपी नेता ने कहा, 'ममता सरकार वर्षों से यह तर्क देती रही कि DA अधिकार नहीं बल्कि अनुदान है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि महंगाई भत्ता कर्मचारियों का कानूनी हक है।' उन्होंने टीएमसी पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार ने इस लड़ाई में महंगे वकीलों पर करोड़ों रुपये खर्च किए, लेकिन कर्मचारियों की बकाया राशि देने के लिए राजी नहीं हुई।
केंद्र और राज्य DA में बड़ा अंतर
पश्चिम बंगाल में DA को लेकर विवाद काफी पुराना है। वर्तमान में राज्य कर्मचारियों को मूल वेतन का 18 प्रतिशत DA मिल रहा है, जबकि केंद्र सरकार के कर्मचारियों को 55 प्रतिशत तक महंगाई भत्ता दिया जा रहा है। इस तरह दोनों के बीच लगभग 37 से 40 प्रतिशत का भारी अंतर बना हुआ है, जो कर्मचारियों में नाराजगी की बड़ी वजह है। अब सभी की नजरें सरकार द्वारा गठित समिति और अगली कार्यवाही पर टिकी हैं। कर्मचारियों को डीए भुगतान से जरूर बड़ी राहत मिलेगी।












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