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मालदीव में चीन की 'कठपुतली' यामीन की हार से भारत क्यों है गदगद?

नई दिल्ली। मालदीव से भारत के लिए रविवार को एक बहुत बड़ी खबर आई जब अब्दुल्ला यामीन को राष्ट्रपति चुनाव में हार का सामना करना पड़ा और इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने जीत अपने नाम कर ली। अपनी जीत के बाद सोलिह ने कहा कि वे देश को फिर से लोकतंत्र की राह पर लाएंगे और कानून का राज स्थापित करेंगे। सोलिह की जीत पर भारत ने उन्हें बधाई दी है। मालदीव की सत्ता से अब्दुल्ला यामीन का बेदखल होना भारत के लिए एक अच्छे संकेत की तरह है, जो लगातार भारत विरोधी गतिविधियां चला रहे थे। हालांकि, मालदीव चुनाव आयोग ने कहा है कि वे एक सप्ताह के भीतर इलेक्शन की घोषणा की घोषणा करेंगे।

भारत ने दी बधाई

भारत ने दी बधाई

सोलिह की जीत पर भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा, 'हम मालदीव में तीसरे राष्ट्रपति चुनावों की समाप्ति का स्वागत करते हैं। पार्लियामेंटरी इन्फॉर्मेशन के मुताबिक, इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने जीत दर्ज कर ली है।' विदेश मंत्रालय ने कि हम इब्राहिम मोहम्मद सोलिह को उनकी जीत पर तहे दिल से बधाई देते हुए आशा करते हैं कि जल्द ही चुनाव आयोग रिजल्ट की घोषण करेगा। मालदीव के लोकल मीडिया के मुताबिक, सोलिह को 58 फीसदी लोगों ने वोट किया है, वहीं यामीन को 41 फीसदी वोट मिले।

भारत विरोधी थे यामीन

भारत विरोधी थे यामीन

यामीन अब्दुल्ला के कार्यकाल में भारत और मालदीव के रिश्तों में बहुत तल्खियां देखने को मिली। यामीन के दौर में हिंद महासागर में भारत विरोधी गतिविधियों से लेकर चीन की तरफ झुकाव से दोनों देशों के रिश्तों में खटास देखने को मिली। वहीं, इसी साल फरवरी में यामीन ने अपने देश में आपातकाल घोषिणा कर दी, जिसके बाद भारत के साथ तनाव और ज्यादा बढ़ गया था। उस दौरान विपक्ष और मालदीव के सुप्रीम कोर्ट ने भारत को दखल देने के लिए कहा था।

भारत के हस्तक्षेप नहीं करने की दी थी धमकी

भारत के हस्तक्षेप नहीं करने की दी थी धमकी

अपने कार्याकाल में तानाशाही रवैया अपनाते हुए यामीन ने उनके कई राजनीतिक विरोधियों को जेल में डाल दिया था। यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट के जजों को भी यामीन सरकार ने बंधक बनाया था। मालदीव में आपातकाल के दौरान भारत के राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर यामीन और चीन ने नई दिल्ली को गंभीर परिणाम भुगतने तक की धमकी दे दी थी। वहीं, पिछले माह अगस्त में मालदीव की अब्दुल्ला सरकार ने भारत को झटका देते हुए सैन्य हेलीकॉप्टर और सैनिकों को वापस बुलाने के लिए कह दिया था। बता दें कि एक समझौते के तहत भारत के दो हेलीकॉप्टर और करीब 50 जवान इस वक्त मालदीव में हैं।

मालदीव के बहाने भारत को घेरने में लगा था चीन

मालदीव के बहाने भारत को घेरने में लगा था चीन

रणनीतिक हिसाब से भारत के लिए मालदीव एक महत्वपू्र्ण देश है। बीते कुछ समय में चीन ने वन बेल्ट वन रोड (OBOR) परियोजना के तहत यहां निवेश करना शुरू किया है। मालदीव की मदद लेकर चीन लगातार भारत को घेरने की कोशिश करने में लगा है। हिंद महासागर में चीनी निवेश में मालदीव की भूमिका बहुत अहम है, जो अब तक भारत के लिए चिंता का विषय का बनता जा रहा था।

ये भी पढ़ें: मालदीव चुनाव में मौजूदा राष्ट्रपति को इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने हराया, भारत के लिए अच्छे संकेत

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