कोरोना महामारी के बीच आई गुड न्यूज, मलेरिया की वैक्सीन के मिले अच्छे रिजल्ट
नई दिल्ली, अप्रैल 23: कोरोना महामारी ने दुनिया भर में कहर बरपा रखा है, अब तक इस बीमारी से लाखों लोगों की जान जा चुकी है, करोड़ों लोग इससे संक्रमित हैं। इसी बीच एक राहत देने वाली खबर सामने आई है। ब्रिटिश वैज्ञानिकों द्वारा तैयार की गई एक मलेरिया वैक्सीन शुरुआती परीक्षणों में 77% प्रभावी साबित हुई है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के अपने डेवलपर्स का कहना है कि यह बीमारी के खिलाफ एक बड़ी सफलता हो सकती है। इस वैक्सीन पर ऑक्सफोर्ड काम कर रहा है। बता दें कि भारत में कोरोना की एक वैक्सीन को भी ऑक्सफोर्ड ने तैयार किया है।

हर साल मलेरिया से 4 लाख से अधिक लोग मरते हैं,
बता दें कि हर साल मलेरिया से 4 लाख से अधिक लोग मरते हैं, मरने वालों में सबसे बड़ी संख्या उप-सहारा अफ्रीका के बच्चों की होती है। मलेरिया को लेकर कई सालों से वैक्सीन बनाने का काम चल रहा है, लेकिन अभी तक सफलता हासिल नहीं हो सकी है। ऐसे में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा बनाई गई इस वैक्सीन के 77 फीसदी तक प्रभावी पाए जाने के बाद एक उम्मीद की किरण जागी है। शोधकर्ताओं का कहना है कि वैक्सीन एक बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रभाव डालेगी।

टीके का अफ्रीकी देश बुर्किना फासो में ट्रायल किया गया
मलेरिया के इस टीके का अफ्रीकी देश बुर्किना फासो में ट्रायल किया गया है। शोधकर्ताओं ने टीके का 450 बच्चों पर ट्रायल किया था, इस दौरान वैक्सीन सुरक्षित पाई गई है, 12 महीने के फॉलोअप में वैक्सीन ने उच्च-स्तरीय प्रभावकारिता दिखाई है। वैक्सीन के प्रभावों को और पुख्ता करने के लिए शोधकर्ता अब पांच महीने से तीन साल के बीच के लगभग 5,000 बच्चों में बड़े परीक्षणों को अब चार अफ्रीकी देशों में करने वाले हैं।

WHO के मानक तक पहुंचने वाला पहला टीका
जेनर इंस्टीट्यूट के निदेशकऔर ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में वैक्सीन के प्रोफेसर और शोधपत्र के सह-लेखक एड्रियन हिल ने कहा कि उनका मानना है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के कम से कम 75% प्रभावकारिता के लक्ष्य तक पहुंचने वाला यह पहला टीका है। अब तक के सबसे प्रभावी मलेरिया वैक्सीन ने अफ्रीकी बच्चों पर परीक्षण में केवल 55% प्रभावकारिता दिखाई है। प्रो हिल ने कहा कि कोरोनोवायरस के प्रकट होने से बहुत पहले मलेरिया वैक्सीन के परीक्षण 2019 में शुरू हो गए थे।

वैक्सीन सार्वजनिक स्वास्थ्य पर बड़ा प्रभाव डालेगी
उन्होंने कहा कि एक मलेरिया वैक्सीन को आने में काफी समय लगा है क्योंकि कोरोनो वायरस में लगभग एक दर्जन की तुलना में मलेरिया में हजारों जीन होते हैं, और बीमारी से लड़ने के लिए बहुत उच्च प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया की आवश्यकता होती है। यह एक वास्तविक तकनीकी चुनौती है। प्रो हिल ने कहा कि, यह वैक्सीन सार्वजनिक स्वास्थ्य पर बड़ा प्रभाव डालने वाली साबित होगी।












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