भारत-चीन के बीच हुई एक और मीटिंग, LAC पर स्थिरता बरकरार रखने पर जोर
नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच बुधवार को पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के हालातों पर एक और दौर राजनयिक मीटिंग हुई है। दोनों देशों के बीच सीमा के मसलों को लेकर बनाए गए वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसलटेशन एंड को-ऑर्डिनेशन (WMCC) की 19वें दौर की मुलाकात हुई है। मई में जब से पूर्वी लद्दाख में टकराव की शुरुआत हुई है तब से यह इस ग्रुप की पांचवीं मीटिंग थी। भारत की तरफ से इस पर बयान जारी कर कहा गया है कि इस बात पर सहमति बनी है कि किसी भी गलतफहमी से बचा जाएगा और स्थिरता को बरकरार रखा जाएगा।

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20 अगस्त को हुई थी आखिरी मीटिंग
इस मीटिंग से एक ही दिन पहले चीन की तरफ से बयान दिया गया था। इस बयान में कहा गया था कि वह संघ शासित प्रदेश लद्दाख को नहीं मानता है। इसके साथ ही चीन की तरफ से यहां पर जारी निर्माण कार्यों का भी विरोध किया गया था। इसके बाद भारत और चीन के राजनयिकों के बीच एक वर्चुअल मीटिेंग हुई है। इस मीटिंग को विदेश मंत्रालय में पूर्वी एशिया की जिम्मेदारी संभाल रहे ज्वॉइन्ट सेक्रेटरी नवीन श्रीवास्तव लीड कर रहे थे। मीटिंग के बाद विदेश मंत्रालय की तरफ से एक बयान भी जारी किया गया है। इस बयान के मुताबिक दोनों देश कोर कमांडर स्तर की अगले दौर की वार्ता के लिए तैयार हुए हैं। जल्द से जल्द इस वार्ता का आयोजन होगा। इसके अलावा एलएसी पर तय नियमों के मुताबिक जल्द और संपूर्ण डिसइंगेजमेंट को भी अंजाम दिया जाएगा।
सभी समझौतों को मानने पर हुए राजी
दोनों देश सभी प्रोटोकॉल्स और द्विपक्षीय समझौतों को मानने और एलएसी पर शांति और स्थिरता को बहाल करने पर रजामंद हुए हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा, 'दोनों पक्षों ने एलएसी के हालातों का जायजा लिया है और बॉर्डर के इलाकों पर हालातों का जायजा लिया।' 20 अगस्त को इस ग्रुप के तहत हुई मीटिंग में दोनों देश आमने-सामने थे। विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि दोनों ही पक्षों ने सितंबर में हुई रक्षा और विदेश मंत्रियों की मुलाकातों को अहमियत दी है। साथ ही इस बात पर भी ध्यान दिया गया है कि कि दोनो विदेश मंत्रियों के बीच जो समझौतो हुआ है उसे गंभीरता से लागू किया जाना चाहिए।









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