Maharashtra Politics: बचेगी या गिर जाएगी एकनाथ शिंदे-बीजेपी सरकार, कुछ ही देर में फैसला
महाराष्ट्र की राजनीति में आज बहुत बड़े फैसले की घड़ी है। विधानसभा के स्पीकर राहुल नार्वेकर आज शिवसेना के विधायकों की अयोग्यता पर फैसला सुनाने वाले हैं। इसके लिए 10 जनवरी, 2024 की डेडलाइन सुप्रीम कोर्ट ने तय की थी।
महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर ने शिवसेना और शिवसेना (यूबीटी) की ओर से विधायकों की अयोग्यता को लेकर 34 याचिकाओं पर सुनवाई पूरी की है, जिसपर वह अपना फैसला सुनाने वाले हैं। उन्होंने इन सारी याचिकाओं को 6 समूहों में बांटा है और उसी के आधार पर आदेश जारी करने वाले हैं।

2.5 लाख पन्नों से ज्यादा के दस्तावेज को देखने के बाद फैसला
याचिकाओं के 6 समूहों में से 4 उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (यूबीटी) की ओर से दायर याचिकाएं हैं और दो मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना की ओर से दायर याचिकाएं हैं।
विधानसभा के अधिकारियों के मुताबिक शिवसेना के दोनों गुटों की ओर से करीब 2.5 लाख पन्नों के दस्तावेज जमा किए गए हैं और नतीजे पर पहुंचने के लिए उन सबसे होकर गुजरना पड़ा है। जानकारी के मुताबिक स्पीकर का फैसला 150 से ज्यादा पन्नों में आने की संभावना है।
फैसले को पुख्ता रखने के लिए सॉलिसिटर जनरल से भी सलाह ली
जानकारी के मुताबिक स्पीकर नार्वेकर ने अपने आदेश को सभी कसौटी पर कसने के लिए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से भी सलाह ली है, ताकि यह सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के मुताबिक रहे और उसमें किसी तरह की गलती की गुंजाइश न बच जाए।
स्पीकर के सामने क्या थे मुख्य मुद्दे?
स्पीकर के सामने शिवसेना विधायकों को अयोग्य ठहराने को लेकर जो सवाल थे, उसमें 'पार्टी की बैठक में शामिल नहीं होने, पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने और स्पीकर के चुनाव के दौरान पार्टी व्हिप को नहीं मानने या पार्टी व्हिप से उलट वोटिंग करने' जैसे मसले शामिल हैं। स्पीकर ने इन सभी मुद्दों पर सुनवाई की है
एकनाथ शिंदे या उद्धव ठाकरे का बिगड़ेगा खेल?
उद्धव ठाकरे गुट स्पीकर फैसले को लेकर आशंकित लग रहा है। लेकिन, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट का दावा है कि विधानसभा में बहुमत उसके पास है, इसलिए आदेश उसके पक्ष में आना चाहिए।
वैसे स्पीकर के आदेश आने से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में जो चर्चा है, उससे इतना तय है कि फैसला जो भी आए, दूसरा गुट सुप्रीम कोर्ट जा सकता है।
शिवसेना (यूबीटी) के एमएलसी अनिल परब का कहना है, 'हमने सुप्रीम कोर्ट और स्पीकर दोनों के सामने एक समान दलीलें दी हैं। हम पूरी तरह से तैयार हैं। स्पीकर को यह काम सुप्रीम कोर्ट ने दिया है और सुप्रीम कोर्ट से तय फ्रेमवर्क के आधार पर उनसे फैसला लेने को कहा गया है।'
उन्होंने कहा है, 'हम इंतजार कर रहे हैं कि किसे अयोग्य ठहराया जाता है। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने चीजें पहले ही साफ कर दी हैं, हम देखेंगे कि स्पीकर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करते हैं या नहीं। कुछ भी हो स्पीकर के आदेश की समीक्षा सुप्रीम कोर्ट करेगा, इसलिए यह यहीं नहीं खत्म होने वाला है। हमें उम्मीद है कि स्पीकर एक राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ता की तरह काम नहीं करेंगे।'
वहीं शिंदे सरकार के मंत्री उदय सामंत का कहना है कि उन्हें फैसले को लेकर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि उनका (उद्ध गुट का) स्टैंड टिकेगा.... उन्होंने वही सारे बड़े-बड़े दावे सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग के सामने भी किए थे, लेकिन कुछ नहीं हुआ।।'
महाराष्ट्र में आगे क्या होने वाला है?
पिछले साल चुनाव आयोग का फैसला एकनाथ शिंदे गुट के पक्ष में गया था। आयोग ने शिवसेना पार्टी का नाम और चुनाव निशान दोनों ही उसे ही आवंटित किया था।
अगर स्पीकर शिंदे गुट के पक्ष में फैसला लेते हैं तो महाराष्ट्र की महायुति सरकार (बीजेपी-शिवसेना और एनसीपी-अजित पवार गुट) में उनकी स्थिति और मजबूत होगी। सरकार भी मजबूत होगी। उद्धव ठाकरे के दावों को धक्का लगेगा और महा विकास अघाड़ी और इंडिया ब्लॉक में भी उनकी हैसियत घटेगी।
लेकिन, अगर फैसला शिवसेना (यूबीटी) के पक्ष में आता है तो उन्हें राजनीतिक और भावनात्मक तौर पर बड़ा फायदा मिलेगा। बागी विधायकों की वापसी से उनकी स्थिति मजबूत होगी। लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनावों में इंडिया गठबंधन में भी सीटों की सौदेबाजी में उनका दावा मजबूत होगा।
वैसे जहां तक महायुति सरकार के गिरने की बात है तो फिलहाल उसकी संभावना नजर नहीं आ रही है। क्योंकि, बीजेपी और अजित पवार गुट के पास इतने विधायक हैं, जिससे सरकार पर फिलहाल संकट नहीं दिख रहा। लेकिन, ऐसी स्थिति में अजित पवार की स्थिति सरकार में और मजूबत हो सकती है।
शिवसेना एमएलए के अयोग्यता मामले की टाइमलाइन
जून, 2022 में एकनाथ शिंदे ने शिवसेना के 39 विधायकों के साथ उद्धव ठाकरे की पार्टी में बगावत कर दी थी और फिर बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बना ली थी। उद्धव ठाकरे ने शिंदे समेत 17 बागी विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की अर्जी लगाई।
जुलाई, 2022 में बीजेपी के राहुल नार्वेकर महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर चुने गए और शिंदे सरकार ने सदन में बहुमत साबित कर दिया।
शिंदे गुट चुनाव आयोग गया और उसने शिवसेना नाम और चुनाव निशान पर दावा किया। उधर ठाकरे गुट सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और विधानसभा में हुई कार्यवाही को चुनौती दी। शिंदे समेत बागी विधायकों के निलंबन की मांग की।
अक्टूबर, 2022 में चुनाव आयोग ने पार्टी का चुनाव निशान जब्त कर लिया और दोनों गुटों को नया नाम दिया।
फरवरी, 2023 में चुनाव आयोग ने शिवसेना नाम और मूल चुनाव निशान पर शिंदे गुट का दावा माना और दोनों उसे आवंटित कर दिया।
मई, 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना (यूबीटी) की अयोग्यता पर सुनवाई में देरी वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र के तत्कालीन राज्यपाल बीएस कोश्यारी की उद्धव ठाकरे को बहुमत परीक्षण का आदेश देने के लिए उनकी आलोचना की।
हालांकि, अदालत ने शिंदे सरकार को भी वैधानिक माना और उसे मान्यता दी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उद्धव सरकार की बहाली नहीं हो सकती।
जुलाई, 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने स्पीकर को शिंदे और उद्धव गुट के विधायकों की अयोग्यता पर फैसला सुनाने में देरी के लिए नोटिस जारी किया।
इसपर स्पीकर ने शिवसेना के 40 और शिवसेना (यूबीटी) के 14 एमएलए को जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया।
18 अक्टूबर, 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए शेड्यूल देने के लिए स्पीकर को 30 अक्टूबर तक की डेडलाइन दी।
30 अक्टूबर,2023 को स्पीकर ने सुप्रीम कोर्ट को जो शेड्यूल दिया, उसमें संकेत था कि वह सुनवाई की प्रक्रिया फरवरी, 2024 तक पूरा करेंगे।
15 दिसंबर, 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने 10 जनवरी, 2024 को फैसला सुनाने की डेडलाइन दे दी।












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