Majhi Ladki Bahin Scheme: महायुति गठबंधन के लिए 'माझी लाडकी बहीण' क्यों साबित हो सकती है बड़ी चुनौती?

Maharashtra Vidhan Sabha Chunav: महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली महायुति सरकार ने जिस तरह से बजट में 'माझी लाडकी बहीण योजना' (मेरी प्यारी बहन) की घोषणा की है, उसे कुछ लोगों की ओर से मास्टरस्ट्रोक बताया जा रहा है।

क्योंकि, लोकसभा चुनावों में महाराष्ट्र की 48 में से सिर्फ 17 लोकसभा सीटें जीतने की वजह सत्ताधारी गठबंधन की हालत डंवाडोल नजर आ रही थी।

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'लाडली बहन योजना' की तरह बनेगी जीत की गारंटी!
ऐसे में माना गया कि जिस तरह से मध्य प्रदेश में 'लाडली बहन योजना' भाजपा की सत्ता में जबर्दस्त बहुमत से कायम रहने की गारंटी बन गई, उसी तरह से महाराष्ट्र में भी माहौल बनते देर नहीं लगेगी।

'माझी लाडकी बहीण योजना' क्या है?
'माझी लाडकी बहीण योजना' के तहत महायुति सरकार ने गरीब परिवार की 21 से 65 साल की हर महिला को प्रत्येक महीने 1,500 रुपए और साल में तीन फ्री एलपीजी सिलेंडर देने का वादा किया है। इसके लिए महिलाओं को गरीब होने का प्रमाण देने के लिए इनकम सर्टिफिकेट दाखिल करना है।

घोषणा के साथ ही महिलाओं की लग गई कतार
जैसे ही शिंदे सरकार की ओर से उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री अजित पवार ने बजट में इस योजना की घोषणा की, सरकारी दफ्तरों के बाहर इनकम सर्टिफिकेट लेने और अपना नाम दर्ज करवान के लिए महिलाओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं। महिलाओं की लाइन में खड़ी होने वाले वीडियो लगातार वायरल हो रहे हैं।

सरकारी कर्मचारियों पर लगे आवेदन के लिए वसूरी के आरोप
यहां तक तो सबकुछ सत्ताधारी बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी गठबंधन की उम्मीदों के अनुसार ही चल रहा था। लेकिन, इसके बाद कुछ ऐसी चुनौतियां देखने को मिलीं, जिससे सरकार के इरादों पर ही पानी फिरने की आशंका पैदा होने लगी।

क्योंकि, योजना की घोषणा के साथ ही ये शिकायतें भी मिलनी शुरू हो गईं कि सरकारी कर्मचारियों ने संभावित लाभार्थियों से प्रत्येक आवेदन के लिए 50 रुपए तक की उगाही चालू कर दी है। कुछ महिलाओं ने छिपे हुए कैमरों से कुछ वीडियो रिकॉर्ड करने का भी दावा किया है।

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को सरकारी कर्मियों को देनी पड़ी जेल भेजने की चेतावनी
अकोला का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एक कर्मचारी आवेदकों से ली गई रकम रखते हुए देखा गया। उस अधिकारी को तो निलंबित किया जा चुका है, लेकिन उसने सरकार का माथा ठनका दिया है। मुख्यमंत्री को चेतावनी देनी पड़ी है कि किसी ने रिश्वत ली तो उसे जेल जाना होगा।

महायुति सरकार के सामने चुनौती?
राजनीति के जानकारों को लगता है कि शिंदे सरकार ने भले ही 'माझी लाडकी बहीण योजना' को विधानसभा चुनावों में जीत की गारंटी समझ ली हो, लेकिन अगर इसे लागू करने में जरा भी अनियमितता हुई तो यह सरकार पर भारी भी पड़ सकती है। इसलिए, सरकार के सामने यह चुनौती होगी कि कैसे इसे सही तरीके से बिना किसी भेदभाव के अमल में लाया जाए।

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अगर इस योजना के दम पर महायुति गठबंध सत्ता में वापसी कर लेता है, तब एक नई तरह की चुनौती खड़ी होगी कि इसके लिए फंड कहां से जुटाई जाए। क्योंकि, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में देश का नंबर वन राज्य, कर्ज के मामले में तमिलनाडु के बाद दूसरे स्थान पर है, जो 7.82 लाख करोड़ रुपए का है।

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