खतरे में पड़ी सीएम की कुर्सी तो उद्धव ठाकरे ने फोन कर पीएम मोदी से मांगी मदद
मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने खुद को एमएलसी मनोनीत करने को लेकर राज्यपाल के फैसले पर असमंजस के बीच बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया। सूत्रों ने यह जानकारी दी है। सूत्रों ने बताया कि उद्धव ठाकरे ने पीएम मोदी से फोन पर बात कर उन्हें बताया कि राज्य में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिशें की जा रही है। कोरोना संकट के चलते राज्य में विधानसभा या विधान परिषद का उप-चुनाव अभी संभव नहीं है। ऐसे में राज्य मंत्रिमंडल ने राज्यपाल से आग्रह किया है कि वह अपने कोटे से मुख्यमंत्री को विधान परिषद के लिए मनोनीत करें।
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राज्यपाल के पास विधान परिषद में दो सदस्यों करने को मनोनीत करने का अधिकार है। हालांकि, राज्यपाल ने अभी तक इस बारे में कोई निर्णय नहीं लिया है। अगर राज्यपाल एक महीने के भीतर ठाकरे को विधान परिषद का सदस्य मनोनीत नहीं करते हैं, तो उनका मुख्यमंत्री बने रहना संभव नहीं होगा और इस्तीफा देना पड़ सकता है। बताया जा रहा है कि उद्धव की बातें सुनकर पीएम मोदी ने उन्हें मामले को जल्द देखने की बात कही है। बता दें कि उद्धव ठाकरे को 28 मई से पहले संविधान के अनुसार किसी सदन का सदस्य बनना जरूरी है। जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक राज्यपाल ने कहा कि वह एक सप्ताह के भीतर अपने फैसले की जानकारी देंगे।
इन नेताओं ने भेजा राज्यपाल को पत्र
किसान और वर्कर्स पार्टी (पीडब्ल्यूपी) के नेता जयंत पाटिल, जनता दल (एस) के महाराष्ट्र अध्यक्ष शरद पाटिल, स्वाभिमानी शेतकारी संगठन (एसएसएस) के राजू शेट्टी और आरपीआई (एस) के नेता श्याम गायकवाड़ ने यह पत्र भेजा है। पत्र में इन दलों ने कहा कि महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने राज्य के विधान परिषद में ठाकरे की नियुक्ति करने का प्रस्ताव पहले 9 अप्रैल को भजा था और उन्हें 28 अप्रैल (मंगलवार) को इसके बारे में याद दिलाया था, लेकिन अब तक निर्णय लिया जाना बाकी है।
कोश्यारी पर टिकी सबकी नजर
महाराष्ट्र के सियासी संकट के बीच अब सबकी नजरें सिर्फ और सिर्फ महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी पर टिकी हुई हैं। उद्धव कैबिनेट के सदस्य ने कहा कि कोश्यारी ने हमारी बात सुनी लेकिन उनका रवैया टाल-मटोल वाला रहा। इसलिए हमें नहीं पता कि वह हमारी याचिका को स्वीकार करेंगे या नहीं। उन्होंने कहा कि ठाकरे के नामांकन पर अनिश्चितता के मद्देनजर सरकार विधान परिषद चुनावों के लिए चुनाव आयोग से संपर्क करने पर विचार कर रही है।












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