मध्य प्रदेश: वो मज़दूर जिनकी मदद राहुल गांधी ने की थी

उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले कुछ मज़दूर जिनसे दिल्ली में राहुल गांधी मिले थे, वो अब अपने घर पहुंच चुके है.
ये मज़दूर राहुल गांधी से हुई अपनी मुलाक़ात को इस मायने में यादगार मानते हैं कि उनसे मुलाक़ात के बाद उन्हें आगे का सफर पैदल नहीं तय करना पड़ा.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी जब शनिवार के दिन दिल्ली के सुखदेव विहार फ्लाईओवर के नज़दीक पहुंचे थे तब यह मज़दूर वहां पर बैठकर थोड़ी देर आराम कर रहे थे.
राहुल गांधी की मुलाक़ात 14 मज़दूरों से हुई थी, जिनमें से 12 लोग उत्तर प्रदेश के थे जबकि दो मध्य प्रदेश के थे.
उत्तर प्रदेश के मज़दूर झांसी से लगभग 55 किलोमीटर दूर मौजूद रानीपुर के रहने वाले थे. वहीं मध्यप्रदेश के मज़दूर जतारा के रहने वाले थे.
ये सभी मज़दूर अब अपने गांव पहुंच चुके हैं.
राहुल गांधी से मुलाकात
फिलहाल झांसी में अपने घर क्वारंटीन में रह रहे राजकुमार प्रजापति ने हमें उस दिन के बारे में बताया जिस दिन उनकी मुलाक़ात राहुल गांधी से हुई थी.
वो कहते हैं, "दिन के लगभग ढाई बजे होंगे. हम लोग वहां छांव में सुस्ता रहे थे. तभी राहुल गंधी हमसे मिलने आए. उन्होंने हमारे साथ 25 से 30 मिनट गुज़ारे और हमसे हमारा हालचाल जाना."
राजकुमार ने बताया कि उन्होंने हमसे पूछा कि हमारे पैदल चलने की क्या वजह थी, "तो हमने उन्हें बताया कि हमारे पास न राशन बचा था और न ही पैसे. इसलिए हम लोगों ने अपने गांव की तक का सफर पैदल ही पूरा करने के बारे में सोचा."
राजकुमार का दावा है कि दिल्ली पहुंचने से पहले वह 100 से 125 किलोमीटर तक पैदल सफर कर चुके थे.
राहुल गांधी ने उनसे यह भी पूछा कि क्या उन्हें लॉकडाउन होने के बारे में ज़रा-सा भी अंदाज़ा नहीं था.

लॉकडाउन शुरू होने से पहले
राजकुमार कहते हैं, "हमने उन्हें बताया कि हमें इसके बारे में कुछ नहीं मालूम था वरना लॉकडाउन शुरू होने से पहले ही हम अपने गांव की तरफ निकल पड़ते."
सफर के दौरान राजकुमार के भाई देवेंद्र उनके साथ थे.
उन्होंने बताया कि राहुल गांधी ने उनसे यह पूछा कि उन्होंने और इंतज़ार करने के बारे में क्यों नहीं सोचा क्योंकि अब तो लॉकडाउन में ढील दी जाएगी और काम भी शुरू होगा.
देवेंद्र कहते हैं, "मैंने कहा कि लॉकडाउन लगातार बढ़ रहा था. पहली बार, दूसरी बार, तीसरी बार और फिर न पैसा बचा था और न राशन. इसलिए फिर हम लोगों ने फै़सला किया कि किसी तरह गांव पहुंचना ही ठीक है, हमने सोचा पैदल चलना ही बेहतर है."
इन 14 लोगों के समूह में पांच महिलाएं और 1 बच्चा भी था. यह लोग मिस्त्री और लेबर के तौर पर निर्माणाधीन इमारतों में काम करते थे.

लॉकडाउन के बाद
देवेंद्र बताते हैं कि मिस्त्री के काम के लिए एक दिन का 500 रुपये और लेबर के काम के लिए दिन का 300 रुपये मेहनताना मिलता था. लेकिन लॉकडाउन के बाद से इन्हें कोई भी काम नहीं मिला था और दिन-ब-दिन हालात बिगड़ रहे थे.
वो खुशी से बताते हैं कि दिल्ली में राहुल गांधी के उनसे मिलने आने के बाद फिर उन्हें और पैदल चलने की जरुरत नहीं पड़ी.
वो कहते हैं कि राहुल गांधी ने उनसे पूछा कि क्या वो इनकी लोगों की मदद कर सकते हैं. तब इन लोगों ने कहा कि "अगर आप मदद करते हैं तो बहुत अच्छी बात होगी."
देवेंद्र बताते हैं, "इसके बाद हम लोगों के लिए उन्होंने गाड़ी बुलाई. पुलिस ने उनको बताया कि एक गाड़ी में दो से ज़्यादा लोग नहीं जा पायेंगे. इसके बाद हम लोगों के लिए 7 गाड़ियां बुलाई गई और हर गाड़ी में दो-दो लोग बैठे."
पहले गाड़ी से उन्हें दिल्ली पार कराया गया जिसके बाद हरियाणा पार करने के लिए हरियाणा से अगल गाड़ियां बुलाई गईं.
मज़दूरों की जांच की गई
इसके बाद उत्तर प्रदेश की गाड़ी बुलवाई गई और उन्हें मथुरा तक छोड़ा गया जहां से छोटी बस से वो घर तक पहुंचे.
मज़दूरों में से एक आनंद कुमार ने बताया, "राहुल गांधी उस दिन हमारे लिये भगवान बन कर आए थे. अगर वो नहीं आते तो हमें पैदल ही अपने गांव तक आना पड़ता."
झांसी के आनंद कुमार बताते हैं कि सफ़र के दौरान कुछ जगहों पर उन्हें खाने को भी मिला.
गांव पहुंचने पर सबसे पहले सभी मज़दूरों की जांच की गई और जिसके बाद उन्हें घर पर ही क्वारंटीन कर दिया गया है.
वो बताते हैं कि गांव पहुंचने के बाद कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने उनके लिए राशन और फल-सब्ज़ियां भी उपलब्ध कराई हैं.
राजकुमार और आनंद बताते हैं कि कांग्रेस के कई स्थानीय नेता भी इनसे मिलने आए हैं और मदद का भरोसा दिलाया है.

बीजेपी ने की राहुल की आलोचना
राहुल गांधी के मज़दूरों से मुलाक़ात की सत्ताधारी बीजेपी ने आलोचना की थी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसे ड्रामेबाज़ी बताया था.
उनका कहना था, "जिन राज्यों में कांग्रेस सरकार है वो उन राज्यों से और ट्रेनें मंगवाने के लिए कहें और उन्हें ट्रेन में बैठा कर उनके गांव तक पहुंचाएं. ये नहीं कि जब वो दुख के साथ पैदल जा रहे हैं उनका टाइम बर्बाद कर उनके साथ बैठ कर बात करना, उससे बेहतर होगा उनके साथ पैदल जा कर उनके बच्चे को, उनके सूटकेस को कैरी कर के उनसे बात करते चलते."
#WATCH "I want to tell the opposition party that on the issue of migrants we all must work together.We are working with all states on this issue. With folded hands, I say to Sonia Gandhi ji that we must speak & deal with our migrants more responsibly": Finance Minister Sitharaman pic.twitter.com/fV96VwLPEW
— ANI (@ANI) May 17, 2020
उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्यप्रदेश जैसे राज्यों से लाखों की तादाद में मज़दूर काम करने के लिये हर साल अपने घरों से बड़े शहरों की तरफ जाते है.
इस बार भी इन मज़दूरों ने दूसरी जगहों का रुख़ किया था लेकिन लॉकडाउन की वजह से यह लोग फंस गये.
लॉकडाउन के कारण हुई कामबंदी से पैदा हुए हालातों को देखते हुए ये प्रवासी अपने गांवों की तरफ लौटने लगे हैं.
अब अभी भी लाखों का तादाद में यह मज़दूर सड़कों पर है और किसी तरह अपने गांव पहुंचने की जद्दोजहद में है.












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