वो अधिकारी जो चलाते हैं मध्यप्रदेश की सरकार, खुद चुनाव आयोग की परीक्षा में हो गए फेल

नई दिल्ली। देश के तीन बड़े राज्यों मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ सहित कुछ राज्यों में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसे लेकर जहां राजनीतिक गलियारों में सरगर्मियां तेज हो गई हैं तो वहीं चुनाव आयोग भी इन विधानसभा चुनावों को लेकर तैयारी में जुटा हुआ है। राज्यों के दौरे के अलावा चुनाव आयोग इन विधानसभा चुनावों के लिए वहां के आधिकारियों को तैयार कर रहा है। इसके लिए ट्रेनिंग और अन्य तरह की जानकारियां चुनाव में तैनात होने वाले अधिकारियों को दी जा रही हैं। ऐसी ही एक कवायद के तहत चुनाव आयोग ने मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले अधिकारियों की तैयारी के आंकलन को लेकर एक परीक्षा आयोजित कराई। लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि इस परीक्षा को 58 फीसदी अधिकारी पास नहीं कर पाए यानी वो इसमें फेल हो गए। चुनाव आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और वो एक बार फिर इनकी परीक्षा लेगा और पास ना होने पर फेल होने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है।

eci

विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इस परीक्षा में फेल हुए अधिकारियों पर निशाना साधा है। पार्टी ने कहा है कि अगर आईएएस और राज्य प्रशासनिक सेवाओं के अधिकारी सरल सवालों का जवाब नहीं दे सकते तो वो सरकार कैसे चला रहे हैं। उन्हें सेवा में रहने का कोई अधिकार नहीं है।

कलेक्टर से लेकर तहसीलदार तक सब फेल

कलेक्टर से लेकर तहसीलदार तक सब फेल

भारत के चुनाव आयोग ने 18 अगस्त को मध्यप्रदेश में चुनाव रिटर्निंग और सहायक रिटर्निंग अफसरों के लिए एक लिखित परीक्षा का आयोजन किया था। चुनाव प्रक्रिया में शामिल होने वाले 1,000 अधिकारियों में से इसमें 567 ने परीक्षा दी थी लेकिन उसमें से सिर्फ 244 ही परीक्षा पास करने के लिए जरूरी 70 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर पाए। फेल होने वाले अधिकारियों में डिप्टी कलेक्टर, उप-मंडल अधिकारी और तहसीलदार तक सब शामिल हैं।

पूछे गए थे ये सवाल

पूछे गए थे ये सवाल

चुनाव आयोग की इस परीक्षा में अधिकारियों से कई तरह के सवाल किए गए थे। मसलन पूछा गया था कि अगर किसी पार्टी की तरफ से दो उम्मीदवार नामांकन पर्चा दाखिल करते हैं तो किस उम्मीदवार को पार्टी का आधिकारिक उम्मीदवार माना जाएगा? अगर किसी व्यक्ति को निचली अदालत से तीन साल की सजा मिली है और उसे हाई कोर्ट ने जमानत दे दी है तो क्या वो चुनाव लड़ सकता है? किसी उम्मीदवार की जमानत कब जब्त होती है? इसी तरह के कई सवाल परीक्षा में पूछे गए थे।
ये भी पढ़ें:- तेलंगाना में केसीआर के खिलाफ टीडीपी, कांग्रेस, सीपीआई का महागठबंधन

फिर फेल हुए तो होगी कार्रवाई

फिर फेल हुए तो होगी कार्रवाई

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) वीएल कांताराव ने कहा है कि फेल हुए अधिकारियों को फिर से ट्रेनिंग दी जा रही है। इस प्रशिक्षण के दौरान मतदान प्रक्रिया की बारीकियों को समझाया जा रहा है। इसके बाद फिर से परीक्षा होगी और अगर ये अधिकारी फिर से फेल होते हैं तो सीईओ कार्यालय सरकार को उनके खराब प्रदर्शन के बारे में लिखेगा और उनके खिलाफ कार्रवाई करने को कहेगा। चुनाव आयोग ने पहली बार इस तरह की लिखित परीक्षा आयोजित की है। परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले अधिकारियों को प्रमाण पत्र दिए जाएंगे। 2013 में चुनाव में तैनात सरकारी अधिकारियों को एक महीने का वेतन प्रोत्साहन के रूप में दिया गया था।

मुख्य चुनाव आयुक्त नाराज़

मुख्य चुनाव आयुक्त नाराज़

खबर है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ओ पी रावत ने वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ बैठक में इस मामले को लेकर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा है कि अगर एक युवा कलेक्टर ये नहीं समझ सकता कि वीवीपीएटी कैसे काम करती है तो ये चिंता की बात है।

ये भी पढ़ें:- भीमा कोरेगांव: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली, 17 सितंबर तक घर में नजरबंद रहेंगे पांचों वामपंथी विचारक

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+