ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में शामिल होने की दिग्विजय सिंह ने दी बधाई

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में चल रहे सियासी संकट के बीच कांग्रेस की कमलनाथ सरकार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। जिस तरह से वरिष्ठ कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी का दामन छोड़ भाजपा का हाथ थामा उसने हर किसी को चौंका दिया है। यहां तक कि खुद कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को इस बात का यकीन नहीं हो रहा है कि सिंधिया कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हो सकते हैं। वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भी यह बात मानी है कि उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा में शामिल हो जाएंगे। लेकिन सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के बाद दिग्विजय सिंह ने अब उन्हें बधाई दी है।

सिंधिया को दी बधाई

सिंधिया को दी बधाई

दिग्विजय सिंह ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को बधाई देते हुए ट्वीट किया कि ज्योतिरादित्य सिंधिया जी को भाजपा में शामिल होने पर बधाई। भाजपा के मप्र के नेताओं को भी मेरी हार्दिक बधाई। इससे पहले दिग्विजय सिंह ने कहा था कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को उनके कौशल को देखते हुए अमित शाह या निर्मला सीतारमण के मंत्रालय की जिम्मेदारी देनी चाहिए। उम्मीद है कि सिंधिया मोदी-शाह के संरक्षण में बेहतर बनें। हमारी महाराज जी को शुभकामनाएं।

भाजपा में शामिल हुए सिंधिया

भाजपा में शामिल हुए सिंधिया

गौरतलब है कि आज ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भोपाल में भाजपा मुख्यालय में भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। इस दौरान सिंधिया ने कहा कि सिंधिया ने कहा कि मैं पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा का शुक्रगुजार हूं, जिन्होंने अपने परिवार में मुझे जगह दी, आज मैं बहुत दुखी भी हूं और व्यथित भी क्योंकि कांग्रेस अब वह पार्टी नहीं है, जिसकी स्थापना हुई थी, कांग्रेस पार्टी में रहकर मैंने 18-19 वर्षों में पूरी श्रद्धा के साथ देश-प्रदेश की सेवा करने की कोशिश की है। लेकिन मन दुखी है कि जो स्थिति आज उत्पन्न हुई है, मैं कह सकता हूं कि जनसेवा के लक्ष्य की पूर्ति उस संगठन से नहीं हो पा रही है।

क्या है समीकरण

क्या है समीकरण

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सीटें हैं, जिसमे कांग्रेस के पास 114 विधायक हैं और उन्हें 7 अन्य विधायकों का समर्थन प्राप्त है। लेकिन जिस तरह से 22 विधायकों ने इस्तीफा दिया उसके बाद कुल विधायकों की संख्या 208 हो गई। विधायकों के इस्तीफे के बाद बहुमत के लिए 105 सीटों की जरूरत होगी। भाजपा के पास कुल 107 विधायक हैं।

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