MA Baby कौन हैं? CPM के पहले अल्पसंख्यक महासचिव बने, केरल में सियासी समीकरण बदलने के संकेत!
MA Baby CPM new general secretary: सीपीएम (CPM) के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि पार्टी ने अपने महासचिव पद के लिए किसी अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले नेता को चुना है। तमिलनाडु के मदुरै में संपन्न पार्टी कांग्रेस में माकपा ने वरिष्ठ नेता मरियम अलेक्जेंडर बेबी (MA Baby) को अपना नया महासचिव बनाया है।
मरियम अलेक्जेंडर बेबी केरल से इस पद तक पहुंचने वाले दूसरे सीपीएम नेता हैं, उनसे पहले ईएमएस नंबूदरीपाद इस जिम्मेदारी को निभा चुके हैं।

Mariam Alexander Baby: कौन हैं सीपीएम नेता MA Baby?
एमए बेबी की पहचान न केवल सीपीएम के एक अनुभवी नेता के तौर पर है, बल्कि वे इस वामपंथी दल के सांस्कृतिक चेहरे के रूप में भी जाने जाते हैं। वैसे वे खुद को नास्तिक कहते हैं, लेकिन तथ्य यह भी है कि पार्टी पोलित ब्यूरो में वे एकमात्र ईसाई चेहरा हैं।
यही नहीं, वे पहले अल्पसंख्यक नेता हैं जो सीपीएम के सबसे ऊंचे पद तक पहुंचे हैं। उनकी यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब पार्टी के सामने पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा जैसे पारंपरिक गढ़ों में वापसी की चुनौती है और राष्ट्रीय स्तर पर उसका जनाधार मात्र केरल तक ही सिमट कर रह गया है।
MA Baby CPM: छात्र राजनीति से संसद तक का सफर
बेबी का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ। उन्होंने केरल स्टूडेंट्स फेडरेशन (KSF), जो आज की एसएफआई (SFI) का पूर्ववर्ती संगठन है, से अपनी राजनीति की शुरुआत की। वे SFI और बाद में DYFI के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे। आपातकाल के दौरान वे छात्र आंदोलनों का नेतृत्व करते हुए जेल भी जा चुके हैं।
1986 में सिर्फ 32 साल की उम्र में वे राज्यसभा पहुंचे और 1998 तक उच्च सदन में रहे। 1999 में उन्हें सीपीएम की केंद्रीय समिति में शामिल किया गया। हालांकि, केरल की आंतरिक गुटबाजी और मौजूदा मुख्यमंत्री पिनराई विजयन जैसे नेताओं के उभार ने उनकी रफ्तार को थोड़ा धीमा कर दिया।
CPM new general secretary MA Baby: वीएस अच्युतानंदन सरकार में शिक्षा मंत्री भी रहे
2006 में उन्होंने केरल की कुंदरा विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया और वीएस अच्युतानंदन सरकार में शिक्षा मंत्री बने। इस दौरान उनके द्वारा किए गए शिक्षा सुधार विवादों में रहे, खासकर उन पर पाठ्यपुस्तकों के जरिए नास्तिकता को बढ़ावा देने का आरोप लगा।
First minority CPM general secretary MA Baby: सांस्कृतिक चेहरा और राष्ट्रीय पहचान
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक बेबी का झुकाव हमेशा से कला, साहित्य और संगीत की ओर रहा है। वे कोच्चि बिएनाले जैसे प्रतिष्ठित कला आयोजन को शुरू करवाने में अहम भूमिका में रहे। दिल्ली में उन्होंने स्वरलय संगठन और शोरनूर में केरलीयम जैसे कार्यक्रमों की नींव रखी। त्रिवेंद्रम में 'मानवीयम वीथि' नामक सांस्कृतिक आयोजन की शुरुआत भी उनके ही प्रयासों का नतीजा थी।
कला जगत के प्रसिद्ध चेहरों जैसे अदूर गोपालकृष्णन, कमल हासन, विवान सुंदरम, गीत कपूर आदि के वे नजदीकी माने जाते हैं। थैक्कुडम ब्रिज म्यूजिक बैंड में उनके बेटे अशोक नेल्सन गिटारिस्ट हैं।
CPM leadership change: दिल्ली की सियासत में भी पहुंच
मरियम अलेक्जेंडर बेबी उन गिने-चुने केरल के नेताओं में से हैं, जिन्हें दिल्ली की राजनीति की अच्छी समझ है। जब ईएमएस नंबूदरीपाद पार्टी महासचिव थे, तब वे राष्ट्रीय राजनीति में पार्टी का कामकाज संभालते थे।
अब जब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) लगभग केरल तक सिमट चुकी है, बेबी जैसे नेतृत्व से यह उम्मीद की जा रही है कि वे पार्टी को नए सांस्कृतिक और सामाजिक मोर्चों पर फिर से खड़ा करने की रणनीति तैयार करेंगे।
MA Baby CPM: नया सियासी समीकरण?
बेबी की नियुक्ति को सिर्फ सीपीएम के संगठनात्मक बदलाव न मानते हुए इसे एक सियासी संदेश भी माना जा रहा है। जिस तरह कांग्रेस पार्टी राहुल गांधी के नेतृत्व में मुस्लिम वोट बैंक को गोलबंद करने की कोशिश कर रही है, उसी तरह सीपीएम ने एक ईसाई चेहरे को महासचिव बनाकर संकेत दिया है कि वह केरल के ईसाई मतदाताओं को जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है।
वर्तमान में केरल की राजनीति में अल्पसंख्यक वोट बैंक निर्णायक भूमिका निभाता है, और ऐसे में एमए बेबी की ताजपोशी आने वाले दिनों में सियासी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। केरल में भी बंगाल की तरह है अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं।












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