Love Story: अटल बिहारी वाजपेयी के सलाहकार की बेटी की बिंदास है लव स्टोरी, प्यार के लिए लड़ी कानूनी जंग
Love Story Menaka Guruswamy Arundhati Katju: कहते हैं कि प्यार में इंसान सारी जंजीरें तोड़ देता है। यह बात सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी और अरुंधति काटजू की प्रेम कहानी पर बिल्कुल फिट बैठती है। दोनों की प्रेम कहानी भारत में कानूनी और सामाजिक बदलाव की दिशा में भी मील का पत्थर साबित हुई। इन दोनों ने न सिर्फ अपनी निजी पहचान को साहस के साथ दुनिया के सामने रखा, बल्कि LGBTQ समुदाय के अधिकारों के लिए कानूनी मोर्चे पर लड़ाई भी लड़ी।
मेनका गुरुस्वामी और अरुंधति काटजू दोनों सुप्रीम कोर्ट में वकील हैं। दोनों देश के जाने-माने परिवारों से ताल्लुक रखती हैं। अरुंधति काटजू का परिवार न्यायिक सेवाओं से जुड़ा रहा है जबकि डॉक्टर मेनका के पिता वाजपेयी सरकार में आर्थिक सलाहकार रहे। प्रोफेशनल सफर के दौरान दोनों की दोस्ती गहरी हुई और यही रिश्ता आगे चलकर पार्टनर के रूप में बदल गया।

Love Story: मेनका और अरुंधति ने दी थी आर्टिकल 377 को चुनौती
उनकी जोड़ी उस समय सुर्खियों में आई, जब उन्होंने धारा 377 को चुनौती देने वाले ऐतिहासिक 'नवतेज सिंह जौहर बनाम भारत संघ' मामले में याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व किया। मेनका गुरुस्वामी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि भारत जैसे देश में समलैंगिक पहचान को स्वीकार करना बहुत चुनौतीपूर्ण है। 2013 में जब सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 को बरकरार रखा, तो यह उनके लिए झटका था।
उन्होंने कहा कि सिर्फ एक वकील के तौर पर नहीं, बल्कि नागरिक के रूप में मेरे लिए यह खुद को 'अपराधी' मानने जैसा था। उन्होंने कहा कि यह फैसला डरावना और मनोबल तोड़ने वाला था। हालांकि, उन्होंने और कई याचिकाकर्ताओं के साथ कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला किया। आखिरकार, सितंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए धारा 377 के उस हिस्से को रद्द कर दिया, जो वयस्कों के समलैंगिक संबंधों को अपराध मानता था।
Menaka Guruswamy Arundhati Katju: 2019 में किया रिश्ते का ऐलान
इस कानूनी जीत के लगभग एक साल बाद दोनों ने दुनिया के सामने अपने प्यार का इजहार किया। जुलाई 2019 में मेनका गुरुस्वामी और अरुंधति काटजू ने CNN के पत्रकार फरीद जकारिया को दिए इंटरव्यू में सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि वे एक कपल हैं। यह कदम न सिर्फ व्यक्तिगत साहस का प्रतीक था, बल्कि भारत में LGBTQ समुदाय के लिए उम्मीद की एक नई किरण भी बना। उनके इस साहसी कदम और कानूनी योगदान को अंतर्राष्ट्रीय पहचान भी मिली। TIME पत्रिका ने 2019 में उन्हें दुनिया के '100 सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों' की सूची में शामिल किया।
LGBTQ के मुद्दों पर रहती हैं मुखर
धारा 377 की लड़ाई जीतने के बाद भी उनकी जंग खत्म नहीं हुई। इस जोड़ी ने भारत में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता दिलाने के लिए भी लड़ाई लड़ी थी। उनका मानना है कि समानता का अधिकार तब तक अधूरा है, जब तक हर व्यक्ति को अपने जीवनसाथी को चुनने और कानूनी सुरक्षा पाने का हक नहीं मिलता।
पारिवारिक पृष्ठभूमि की बात करें तो अरुंधति काटजू, पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज मार्कंडेय काटजू की भतीजी हैं, जबकि मेनका गुरुस्वामी, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सलाहकार रहे मोहन गुरुस्वामी की बेटी हैं। मेनका और अरुंधति की कहानी आज लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी है। यह दिखाती है कि प्रेम, कानून और साहस मिलकर समाज में ऐतिहासिक बदलाव ला सकते हैं।
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