Lok Sabha Elections 2024: 'इंडी' अलायंस में सीटों के बंटवारे में क्यों फंस रहा है पेच? कश्मीर से केरल तक उलझन
INDIA Bloc seat-sharing trouble: आधा फरवरी गुजरने को है, लेकिन विपक्षी दलों के इंडी अलायंस ने कहीं भी सीटों के बंटवारे को लेकर पूर्ण सहमति होने का दावा नहीं किया है। जबकि, हाल ये है कि बिहार से लेकर यूपी तक में विपक्षी गठबंधन को झटके पर झटके लग रहे हैं।
विपक्षी दलों के गठबंधन में अधिकतर जगहों पर कांग्रेस के साथ सीटों के बंटवारे पर ज्यादा उलझन देखने को मिल रही है। इसकी वजह से फॉर्मूले के एलान में देरी हो रही है और तबतक इसमें शामिल पार्टियां अपना अलग रास्ता भी निकाल ले रही हैं।

दिल्ली में गठबंधन की स्थिति क्या है?
कांग्रेस शुरू से उम्मीद लगाए बैठी थी कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी के साथ लोकसभा की 7 सीटों में साझा चुनाव लड़ने का कोई न कोई फॉर्मूला निकल जाएगा। कुल मिलाकर फैसला दिल्ली में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के ही भरोसा लटक रहा था।
रविवार को आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राजधानी की सातों सीटों पर पार्टी की जीत का दावा करके एक तरह से कांग्रेस को रास्ता नापने के लिए कह दिया है।
जबकि, कांग्रेस को लग रहा था कि वह दिल्ली में आम आदम पार्टी के साथ गठबंधन होने पर उसके लिए गुजरात में एक सीट छोड़ने का ऑफर दे सकती है।
पंजाब में क्यों बिगड़ी बात?
पंजाब में भी अब कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में सीटों पर तालमेल हो पाने की संभावना नहीं लग रही है। आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं ने पहले ही कह दिया है कि वह राज्य की सभी 13 सीटों पर अकेले लड़ेगी।
जहां तक कांग्रेस की बात है तो उसकी प्रदेश इकाई आम आदमी पार्टी से गठबंधन का शुरू से विरोध कर रही थी। इधर कांग्रेस के एक आंतरिक सर्वे को लेकर कहा जा रहा है कि अब पार्टी के लिए 2022 के विधानसभा चुनावों वाली स्थिति नहीं है।
दूसरी तरफ अगर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी मिलकर चुनाव लड़ती है तो विपक्ष की भूमिका में भारतीय जनता पार्टी आ जा सकती है और सत्ता-विरोधी वोटों पर आसानी से उसकी पकड़ बढ़ सकती है। पंजाब में तालमेल नहीं होने की यह एक प्रमुख वजह बताई जा रही है।
बंगाल में 'याचक' की भूमिका में नजर आ रही है कांग्रेस
इंडी अलायंस के विरोधाभासों के लिए पश्चिम बंगाल सर्वोत्तम उदाहरण है। यहां तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी एक बार नहीं कई बार दोहरा चुकी हैं कि राज्य में उनकी पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी और इंडी अलायंस को वह बंगाल से बाहर मदद करेंगी।
कांग्रेस को अभी भी उम्मीद है कि मुख्यमंत्री आखिरकार उसे उसकी जीती हुई दो सीटों के अलावा कुछ बेहतर ऑफर की पेशकश कर सकती हैं। जबकि, लेफ्ट के लिए तो टीएमसी ने पहले से ही रेड सिंग्नल दे रखा है। लेकिन, कांग्रेस के साथ उसकी तालमेल तो यहां पक्की है।
केरल में भी पंजाब वाली स्थिति
केरल में बीजेपी की स्थिति आज भी बहुत कमजोर है। यहां सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही भूमिका इंडी अलायंस ही निभा रहा है। सरकार की कमान सीपीएम की अगुवाई वाले एलडीएफ के हाथों में है तो विपक्षी यूडीएफ की कमान कांग्रेस संभाल रही है।
यहां दोनों ही गठबंधन एक-दूसरे के खिलाफ जोरदार चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं, लेकिन गारंटी इस बात की है कि चुनावों के बाद तिरुवनंतपुरम में दोनों पक्षों के सांसद भले ही एक-दूसरे के खिलाफ आग उगलेंगे, लेकिन दिल्ली पहुंचते ही उनके सारे मतभेद खत्म हो जाएंगे।
उत्तर प्रदेश में सीट बंटवारे का काम हो सकता है आसान
यूपी में अखिलेश यादव सपा की ओर से कांग्रेस को पहले 14 सीटों का ऑफर दे चुके हैं। जबकि, कांग्रेस को लगता था कि अगर 18 से 20 सीटें लड़ने को मिल जाए तो राज्य में भी उसका सम्मान बचा रह सकता है।
संयोग ये हुआ कि जयंत चौधरी की आरएलडी को बीच रास्ते में भाजपा का 'कमल' पसंद आ गया। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी दोनों के लिए सीटों के बंटवारे में अब समाधान निकलने की ज्यादा गुंजाइश बन सकती है।
अखिलेश कांग्रेस को कुछ और सीटों का ऑफर देकर इंडी अलायंस को सबसे ज्यादा लोकसभा सीटों वाले राज्य में जीवित रख सकते हैं।
जम्मू और कश्मीर में दिलचस्प है मामला
जम्मू और कश्मीर में लोकसभा की 5 सीटें हैं और एक सीट लद्दाख में है। यहां इंडी अलायंस की सहयोगी पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस कांग्रेस को जम्मू की दोनों सीटों का ऑफर दे रही हैं और कश्मीर से दूर रहने को कह रही हैं। बाय डिफॉल्ट लद्दाख भी कांग्रेस के लिए खुला ऑफर है।
लेकिन, दिक्कत ये है कि पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस जम्मू में चुनाव लड़ने से तो कतरा ही रही हैं, कांग्रेस भी दोनों सीटों पर लड़ने का जोखिम लेने को तैयार नहीं है। उसकी दावेदारी कश्मीर घाटी की तीन में से भी एक सीट पर है। अभी यहीं पर मामला फंस रहा है।
महाराष्ट्र, बिहार और झारखंड में क्या हाल है?
महाराष्ट्र और झारखंड में अन्य राज्यों के मुकाबले इंडी अलायंस में सीटों का बंटवारा पटरी पर बताया जा रहा है। लेकिन, महाराष्ट्र में गठबंधन की तीनों पार्टियों कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी शरदचंद्र पवार को झटके पर झटके लग रहे हैं।
कांग्रेस के दिग्गजों के पार्टी छोड़ने का सिलसिला थम नहीं रहा है तो उद्धव ठाकरे और शरद पवार की पार्टियों को विधानसभा स्पीकर और चुनाव आयोग से झटके लग रहे हैं।
जहां तक बिहार में सीटों के तालमेल की बात है तो जेडीयू के निकल जाने के बाद इंडी अलायंस का समीकरण बहुत ही कमजोर पड़ गया है। लेकिन, इससे सीटों के बंटवारे का संकट दूर करना आसान हो सकता है, क्योंकि जेडीयू कोटे की सीटें अब गठबंधन के अन्य सहयोगियों को मिल सकती हैं।












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