क्या विपक्ष खुद ही जिम्मेदार है एक के बाद एक झटके के लिए?

नई दिल्ली। हालिया कुछ घटनाओं को देखा जाए तो पता चलता है कि विपक्ष को एक के बाद एक लगातार झटके लग रहे हैं। अभी उसे सबसे बड़ा झटका एक्जिट पोल के अनुमानों में लगा था जिसमें उसकी लोकसभा चुनावों में करारी हार के स्पष्ट संकेत मिले हैं। उसके बाद अब उसे चुनाव आयोग से एक बार फिर करारा झटका मिला है जिसमें आयोग की ओर से 22 विपक्षी दलों की मांग सिरे से खारिज कर दी गई है। इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय की ओर से उसे बड़ा झटका मिल चुका है जिसमें वीवीपैट मिलान की विपक्ष की मांग पूरी तौर पर नहीं मानी गई थी। उससे भी थोड़ा पहले जाने पर पता चलता है कि चुनावों से पहले और चुनावों के दौरान उसकी आपस में एकता नहीं हो पाई थी जिसका परिणाम यह हुआ कि कुछ अपवादों को छोड़कर एक तरह से वह अकेले ही चुनाव मैदान में गया। अभी भी इसकी कोई ज्यादा संभावना नहीं नजर आती दिख रही है कि चुनाव के बाद भी उनमें एका हो सकेगा क्योंकि सभी के अपने-अपने राग सामने आ रहे हैं। यह जरूर है कि कुछ एक नेता चुनाव बाद की एकता को लेकर लगातार प्रयास में लगे हुए हैं।

चुनाव आयोग से एक बार फिर करारा झटका

चुनाव आयोग से एक बार फिर करारा झटका

देश के 22 विपक्षी दलों ने एक बैठक कर यह तय किया था कि वे चुनाव आयोग के पास जाएंगे और मांग करेंगे कि वीवीपैट का मिलान सुनिश्चित किया जाए। विपक्षी नेता चुनाव आयोग गए और उन्होंने मांग रखी थी कि ईवीएम से पहले वीवीपैट पर्चियों की गिनती की जाए। विपक्षी दलों के नेताओं की यह ताजा मांग हाल में आ रही इस तरह की खबरों के बीच आई थी जिसमें पता चल रहा था कि ईवीएम मशीनों की अदलाबदली की जा रही है। इससे उनमें यह आशंका कहीं गहरे पैठी हुई थी कि अगर ऐसा हुआ तो परिणाम एकतरफा आ सकते हैं। इसीलिए उनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट के वीवीपैट के संबंध में पूर्व में दिए गए फैसले के आधार पर अपनी बात चुनाव आयोग के समक्ष रखी गई थी। इससे पहले चुनाव आयोग की ओर से विपक्ष की उन आशंकाओं को भी खारिज कर दिया गया था जिसमें कई स्थानों पर स्ट्रांग रूम के आसपास मंडरा रही ईवीएम से भरी ट्रकों को लेकर कहा जा रहा था कि ईवीएम की अदलाबदली की जा रही है। कई जगहों पर विपक्षी नेताओं-कार्यकर्ताओं की ओर से धरना और ज्ञान भी दिया गया था। इस पर आयोग की ओर से कहा गया था कि कुछ भी गड़बड़ नहीं हो रहा है बल्कि सब कुछ ठीकठाक चल रहा है और ईवीएम की अदलाबदली की किसी तरह की गुंजाइश नहीं है।

सर्वोच्च न्यायालय की ओर से मिल चुका है बड़ा झटका

सर्वोच्च न्यायालय की ओर से मिल चुका है बड़ा झटका

सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा था कि मतगणना के समय एक विधानसभा क्षेत्र के किसी पांच मतदान केंद्र के ईवीएम और वीवीपैट का औचक सत्यापन किया जाए। यह फैसला उस मांग पर आया था जिसमें कहा गया था कि मतगणना के समय एक विधानसभा क्षेत्र के किसी 50 प्रतिशत ईवीएम और वीवीपैट का मिलान किया जाना चाहिए। इसके बाद पुनर्विचार याचिका भी दायर की गई थी जिसे अस्वीकार कर दिया गया था। अब विपक्षी नेताओं का तर्क था कि अगर वीवीपैट मिलान में कोई अंतर आता है तो सभी वीवीपैट का मिलान किया जाना चाहिए। कल आयोग की तरफ से आश्वासन दिया गया था कि बैठक में इस पर विचार किया जाएगा। अब आयोग की ओर से साफ कर दिया गया है कि विपक्ष की मांग खारिज की जाती है। साफ है कि आयोग अपनी पूर्व की व्यवस्था के अनुरूप ही मतगणना और वीवीपैट पर्चियों का मिलान करेगा। इस फैसले को विपक्ष को एक बड़ा झटका माना जा सकता है क्योंकि इससे उसकी आशंकाएं बनी रह जाएंगी और लगेगा नहीं कि सब कुछ ठीकठाक हुआ है।

विपक्ष को एक्जिट पोल के अनुमानों से लगा झटका

विपक्ष को एक्जिट पोल के अनुमानों से लगा झटका

इससे पहले विपक्ष को एग्जिट पोल के अनुमानों से झटका लग हुआ है। इन एग्जिट पोल में बहुत स्पष्ट तौर पर यह उभरकर सामने आया है कि उसे करारी हार का सामना करना पड़ रहा है और भाजपा तथा एनडीए को एक बार फिर सत्ता मिलने जा रही है। इसे बड़ा झटका इसलिए माना जा रहा है क्योंकि विपक्ष यह मानकर चल रहा था कि इस बार केंद्र में उसकी सरकार आने वाली है क्योंकि लोगों में इस सरकार को लेकर काफी नाराजगी है। हालांकि विपक्ष को अपनी पूर्ण जीत का विश्वास नहीं लग रहा था लेकिन यह माना जा रहा था कि भाजपा और एनडीए को इतनी सीटें नहीं मिलने जा रही हैं कि वह आसानी से सरकार बना सके। इस संभावना के आधार पर ही विपक्ष चीजें अपने पक्ष में मानकर चल रहा था। लेकिन एक्जिट पोल के संकेतों ने एक तरह से उनकी उम्मीदों पर तुषारापात सा कर दिया। हालांकि एक्जिट पोल को लेकर कभी भी ऐसी धारणा नहीं रही है कि वे पूरी तौर पर सटीक होते हैं। इसके बावजूद वे इसका संकेत तो देते लगते हैं कि परिणामों में क्या कुछ हो सकता है। हालांकि इस बार के एग्जिट पोल इस मामले में पहले से काफी भिन्न इस आधार पर लग रहे हैं कि इस बार तकरीबन सभी के अनुमान एक जैसे आ रहे हैं। इससे पहले अक्सर ऐसा होता था कि सबके बीच कोई एक भिन्न अनुमानों वाला भी होता था। एक बहस इस आशय की भी चल रही है कि एग्जिट पोल अक्सर सही नहीं होते, इसलिए इन पर आसानी से विश्वास नहीं किया जा सकता। ऐसे में इस संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि 23 मई को जब परिणाम आएं, तो तस्वीर कुछ भिन्न हो। लेकिन अभी तो यही कहा जा रहा है कि एग्जिट पोल के संकेत विपक्ष के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं रहे हैं।

EC का दावा- ईवीएम में किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जा सकती

EC का दावा- ईवीएम में किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जा सकती

विपक्ष की ओर से भले ही कितने ही सवाल उठाए गए हों, ईवीएम को लेकर विपक्ष की मांग वैसे भी हमेशा से आलोचना के दायरे में रही है। चुनाव आयोग की ओर से बार-बार यह कहा गया कि ईवीएम में किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। इसके अलावा सत्तापक्ष की ओर से यह दलील दी जाती रही है कि विपक्ष को अपनी जीत में ईवीएम में कोई गड़बड़ी नजर नहीं आती। गड़बड़ी तभी नजर आती है जब उसे हार का खतरा दिखता है अथवा हार मिलती है। यहां तो फिर भी ठीक माना जा सकता है लेकिन एक आशंका तब भी बची रह जाती है कि जब इतने सवाल उठाए जा रहे हैं तो उसका कुछ तो समाधान निकाला जा सकता है। लेकिन शायद ऐसा नहीं हो रहा है। अगर इसमें जरा सी भी सच्चाई है तो यह मामला केवल आज का नहीं है। इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता कि जो लोग आज विपक्ष के खिलाफ हैं वह कभी विपक्ष में नहीं हो सकते। लोकतंत्र में इस संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता। तब किसी को भी इस समस्या से दो-चार होना पड़ सकता है। इसलिए आज की ज्यादा जरूरत लोकतंत्र को मजबूत और त्रुटिहीन बनाने की आवश्यकता है। लोकतंत्र मजबूत रहेगा, तो लोगों की आस्था और विश्वास भी मजबूत रहेगा। इसके कमजोर होने पर लोग और देश दोनों कमजोर होंगे। यह मजबूती विश्वास के आधार पर ही आ सकती है जिसा फिलहाल अभाव ही नजर आ रहा है। इन हालात में मुद्दों को विपक्ष को झटकों के रूप में देखने के बजाय समग्र रूप में देखा जाना चाहिए। यह भी समझने की आवश्यकता है कि अगर संस्थाएं कमजोर हुईं तो क्या होगा। अगर ऐसा हुआ तो नए सिरे से विश्वास जगाना बहुत आसान नहीं होगा। सत्ता पक्ष और विपक्ष तो बदलता रहेगा, संस्थाओं की मजबूती बहुत जरूरी है क्योंकि यही हमारे मजबूत लोकतंत्र का आधार हैं।

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