इंदौर: दोनों ऐसे प्रतिद्वंदियों में मुकाबला जो अब तक केवल पार्षद का चुनाव ही जीते

भोपाल। इंदौर लोकसभा क्षेत्र से स्पीकर सुमित्रा महाजन की सीट पर शंकर लालवानी को टिकट दिया गया है। टिकट वितरण में भाजपा को मध्यप्रदेश की इंदौर सीट पर खासी जद्दोजहद करनी पड़ी। 30 साल से इंदौर की सीट पर भाजपा का कब्जा है और विगत आठ लोकसभा चुनाव या उपचुनाव में सुमित्रा महाजन लगातार जीतती रही हैं। अब सुमित्रा महाजन के ही विश्वासपात्र शंकर लालवानी को टिकट दिया गया है। उन्हें इंदौर की सीट पर कांग्रेस के पंकज संघवी से मुकाबला करना होगा।

इंदौर:ऐसे प्रतिद्वंदियों में मुकाबला जो पार्षद चुनाव ही जीते

भाजपा और कांग्रेस दोनों के ही उम्मीदवार अब तक सिर्फ पार्षद का चुनाव जीत सके हैं। पंकज संघवी ने विधानसभा, लोकसभा और महापौर का चुनाव भी लड़ा, लेकिन उनकी हार हुई। शंकर लालवानी इंदौर नगर भाजपा के प्रभावशाली नेता हैं और करीब 25 वर्षों से पार्टी के लिए सक्रिय हैं। वे इंदौर विकास प्राधिकरण के चेयरमैन हैं और नगर भाजपा के अध्यक्ष सहित स्थानीय स्तर पर कई पदों पर रह चुके हैं।

इंदौर के चुनावी गणित पर एक नजर

इंदौर के चुनावी गणित पर एक नजर

लोकसभा की सामान्य सीट इंदौर का चुनावी गणित प्रदेश की अन्य सीटों से अलग है। इंदौर में मराठी और गुजराती समुदाय के तो लोग बड़ी संख्या में हैं ही। सिंधी समाज के भी करीब 1 लाख मतदाता हैं। शंकर लालवानी इंदौर के सिंधी समाज के नेता हैं और पंकज संघवी गुजराती समाज के। गुजराती समाज की इंदौर में दर्जनों शैक्षणिक संस्थाएं हैं, जो नर्सरी स्कूल से लेकर इंजीनियरिंग कॉलेज तक संचालित करती हैं। समाज के कई कॉलेज है और कई प्रोफेशनल इंस्टीट्यूट भी। मराठी समुदाय के बाद अगर कोई सबसे प्रभावशाली वर्ग है, तो वह गुजराती समुदाय का ही कहा जा सकता है।

सुमित्रा महाजन मराठी समुदाय की प्रतिनिधि हैं और उनकी तरफ से यह आग्रह किया गया था कि उनकी अनुपस्थिति में किसी मराठी भाषी को ही टिकट दिया जाए, क्योंकि इंदौर में होल्करों का राज रहा है, जो महाराष्ट्र से आए थे। सुमित्रा महाजन अपने बेटे का नाम भी आगे बढ़ाना चाहती थी, लेकिन सार्वजनिक रूप से उसे आगे नहीं बढ़ा पाई। दूसरे समाज के लोगों ने सुमित्रा महाजन की इस बात पर ऐतराज किया कि मराठी समाज के ही व्यक्ति को टिकट देना, उचित नहीं कहा जा सकता। शंकर लालवानी की तरफ से सिंधी समाज के अखिल भारतीय संगठन ने भाजपा पर दबाव डाला कि एक जमाने में के.आर. मलकानी, लालकृष्ण आडवाणी और राम जेठमलानी जैसे सांसद सिंधी समाज ने दिए है, लेकिन इस बार भाजपा ने किसी भी सिंधी को टिकट नहीं दिया। जब समाज की बात आई, तब पार्टी के सभी धरे एक हो गए। सुमित्रा महाजन ने टिकट न मिलने की दशा में इंदौर की चाबी अपने पास रखने की कोशिश की और वे उसमें सफल हुई।

यहां से लगातार चुनाव जीतती रही हैं सुमित्रा महाजन

यहां से लगातार चुनाव जीतती रही हैं सुमित्रा महाजन

आगामी 19 मई को होने वाले इंदौर लोकसभा सीट के मतदान में अब दोनों पार्टियां जुट गई है। दोनों ही पार्टियों को भीतरी कलह से परेशानी हो सकती है। सुमित्रा महाजन की अनुपस्थिति में कांग्रेस में टिकट के कई दावेदार सामने आ गए थे और उन्हें लगने लगा था कि अब इंदौर से भाजपा को हराया जा सकता है। शंकर लालवानी को टिकट मिलने के बाद भाजपा के दूसरे धड़े ने भी समर्थन की बात कही और रिकार्ड वोटों से भाजपा को विजयी बनाने के दावे किए जाने लगे।

इंदौर में भाजपा का एक गुट ताई यानि सुमित्रा महाजन का है, तो दूसरा गुट भाई यानि कैलाश विजयवर्गीय का है। कैलाश विजयवर्गीय भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव हैं और पार्टी ने उन्हें पश्चिम बंगाल में अधिक से अधिक सीटें जीताने की जिम्मेदारी दे रखी है। बंगाल में व्यस्तता के चलते वे पहले ही ट्वीट कर चुके थे कि उनकी रूचि भाजपा को बंगाल से अधिकाधिक सीटें दिलाने की है, न कि इंदौर से लोकसभा चुनाव लड़ने की। शंकर लालवानी ने भी अपने राजनैतिक जीवन में खुलकर कभी गुटबाजी नहीं की। इसका भी फायदा उन्हें मिला। शंकर लालवानी को टिकट मिलने की घोषणा के बाद ही भारतीय जनता पार्टी के एक दूसरे सिंधी नेता विजय मलानी ने भी लोकसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। उन्होंने कहा कि वे निर्दलीय रूप से चुनाव लड़ेंगे। शंकर लालवानी इंदौर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष है, तो विजय मलानी भी इंदौर विकास प्राधिकरण में उपाध्यक्ष रह चुके हैं। दोनों की प्रतिस्पर्धा काफी पुरानी है।

बीजेपी की ओर से शंकर लालवानी चुनाव मैदान में

बीजेपी की ओर से शंकर लालवानी चुनाव मैदान में

अब चुनावी विश्लेषक अनुमान लगा रहे है कि अगर इंदौर से शंकर लालवानी जीते, तो वह भारतीय जनता पार्टी की जीत होगी, शंकर लालवानी की नहीं। भाजपा का गढ़ होने के नाते इंदौर से भाजपा अपनी जीत को बहुत आसान मानती है। दूसरी तरफ पंकज संघवी अपने पुराने चुनाव के अनुभव के हिसाब से जनसंपर्क कर रहे हैं। पंकज संघवी बाहुबली होने के साथ ही धनबली भी हैं। अगर वे जीतें, तो यह उनकी व्यक्तिगत जीत होगी, कांग्रेस पार्टी की नहीं। क्योंकि इंदौर में कांग्रेस वैसे भी छिन्न-भिन्न है। शंकर लालवानी के प्रचार के लिए शिवराज सिंह चौहान, सुमित्रा महाजन, कैलाश विजयवर्गीय, महापौर तथा विधायक मालिनी गौड़ और इंदौर लोकसभा क्षेत्र के भाजपा के चुनाव प्रभारी रमेश मेंदोला रणनीति बनाने में जुट गए है। सुमित्रा महाजन और कैलाश विजयवर्गीय को भरोसा है कि इंदौर सीट भाजपा निश्चित ही चुनाव जीतेगी। कांग्रेस के उम्मीदवार का कहना है कि विधानसभा चुनाव में भी शिवराज सिंह चौहान को कुछ ऐसा ही भ्रम हुआ था। अब फिजा बदल चुकी है।

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