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कांग्रेस के वो 11 किले, जहां पार्टी फेस कर रही है पॉपुलरिटी का लिटमस टेस्ट

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नई दिल्ली- यह चुनाव कांग्रेस की फर्स्ट फैमिली की लोकप्रियता परखने का ही चुनाव नहीं है, इसमें 9 राज्यों की उन 11 लोकसभा सीटों पर भी पार्टी की पॉपुलरिटी टेस्ट होनी है, जिसे हमेशा से पार्टी का गढ़ माना जाता रहा है। गढ़ इसलिए कि 2014 के लोकसभा चुनाव में जब पार्टी ने अपना सबसे खराब परफॉर्मेंस दिया था, तब भी 44 में से 5 सीटें पार्टी को वहीं से मिली थी। इन सीटों पर पार्टी को पहले आम चुनाव के बाद से ही बहुत कम ही बार हार का सामना करना पड़ा है। इन सीटों में अमेठी-रायबरेली जैसे गांधी-नेहरू परिवार का गढ़ भी शामिल है। सवाल उठता है कि क्या इसबार कांग्रेस अपने किले में अपनी गंवाई हुई लोकप्रियता फिर से हासिल कर पाएगी। अगर पार्टी इन सीटों पर वापसी करती है, तो माना जा सकता है कि पूरे देश की बाकी सीटों पर भी उसका प्रदर्शन पिछली बार से काफी बेहतर रहने वाला है और अगर इसका उल्टा हुआ, तो अंजाम किसी को भी नहीं पता।

कांग्रेस के वो 11 किले

कांग्रेस के वो 11 किले

कांग्रेस ने देश की जिन 11 लोकसभा सीटों पर अधिकतर चुनाव जीते हैं, उनमें मध्य प्रदेश की छिंदवाड़ा लोकसभा की सीट भी शामिल है। वहां इसबार प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के बेटे नकुल नाथ अपने पिता के नाम वोट मांग रह हैं। पिछले दिसंबर में हुए विधानसभा चुनाव के बाद सीएम बनने से पहले तक कमलनाथ ने लगातार 9 बार यहां का प्रतिनिधित्व किया है। कमलनाथ का गांधी-नेहरू परिवार से भी नजदीकी रिश्ता है। इस सीट पर कांग्रेस 16 चुनावों में 12 बार जीती है, यानी यहां उसका स्ट्राइक रेट 75 फीसदी है। एमपी के छिंदवाड़ा के अलावा ओडिशा का कोरापुट, आंध्र प्रदेश के गुंटूर एवं नेल्लौल, असम का डिब्रुगढ़, केरल का एर्नाकुलम, महाराष्ट्र के सांगली एवं नंदुरबार, यूपी की रायबरेली और पंजाब की जालंधर लोकसभा सीट भी उसके गढ़ माने जाते हैं। इसके अलावा पश्चिम बंगाल की मालदा सीट भी है, जहां पार्टी ने 14 में से 12 बार विजय प्राप्त की है। मालदा सीट पहले लोकसभा चुनाव में नहीं बनी थी और अब वह नॉर्थ एवं साउथ मालदा में बंट चुकी है, ऐसे में कांग्रेस के गढ़ की कुल संख्या 12 तक हो जाती है।

2014 में यहां भी मिली शिकस्त

2014 में यहां भी मिली शिकस्त

2014 में कांग्रेस के लिए अपने गढ़ को सुरक्षित रख पाना भी मुश्किल हो गया था। उस चुनाव में कांग्रेस की लोकप्रियता में गिरावट का असर उसकी प्रतिष्ठित मानी जाने वाली 11 सीटों पर भी पड़ा था। पहले आम चुनाव के बाद पहली बार 2014 में कांग्रेस देश में सिर्फ 44 सीटों पर सिमट गई थी और उसने अपने गढ़ की 6 सीटें भी गंवा दी थी। तब महाराष्ट्र की नंदुरबार एवं सांगली और असम की डिब्रुगढ़ सीट पर बीजेपी जीती थी और ओडिशा की कोरापुट और आंध्र प्रदेश की गुंटूर एवं नेल्लौर सीट क्षेत्रीय पार्टियों के खाते में चली गई थी। यानी तब पार्टी की लोकप्रियता अपने निम्मतम स्तर पर पहुंची थी, जिसकी गवाही उसकी स्ट्रॉन्गहोल्ड मानी जाने वाली सीटों पर हार से भी मिलती है।

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अमेठी-रायबरेली में परफॉर्मेंस का लेखा-जोखा

अमेठी-रायबरेली में परफॉर्मेंस का लेखा-जोखा

यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी की संसदीय सीट रायबरेली में कांग्रेस हर चुनाव जीती है, लेकिन 1996 और 1998 में बीजेपी उसके इस गढ़ पर भी कब्जा करने में सफल हो गई थी। दिलचस्प बात ये है कि इन दोनों चुनावों के बाद ही भाजपा ने केंद्र में सत्ता का पहला स्वाद चखा था। 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई में पार्टी ने 161 सीटें जीतकर 13 दिन की पहली सरकार बनाई थी। 1998 में पार्टी 182 सीटें जीत गई और अटल जी ने 13 महीनों वाली सरकार बनाई। लेकिन, जब कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपने परिवार के गढ़ से खुद ही भाग्य आजमाने का फैसला किया, तो रायबरेली सीट फिर से कांग्रेस के कब्जे में वापस चली आई। तब से लेकर अब तक यहां कांग्रेस और सोनिया का ही कब्जा है। रायबरेली से सटी अमेठी संसदीय सीट भी गांधी-नेहरू परिवार और कांग्रेस पार्टी का गढ़ माना जाता है। 1967 में अस्तित्व में आने के बाद से अमेठी में 13 बार लोकसभा चुनाव हुए हैं, जिनमें से 11 बार कांग्रेस जीती है।

2019 की अग्निपरीक्षा

2019 की अग्निपरीक्षा

कांग्रेस की दबदबे वाली 12 में से 8 सीटों (मालदा नॉर्थ-साउथ सीट समेत) पर तीसरे दौर से अंतिम दौर तक में चुनाव हो रहे हैं। अगर इन सभी सीटों को कांग्रेस एकबार फिर से अपने कब्जे में लाने में सफल होती है, तो यह उसकी लोकप्रियता का सही संकेत माना जा सकता है। माना जा सकता कि तब उसके लिए पहले वाली प्रतिष्ठा पाने की संभावना बन सकती है। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक संसदीय मामलों के पूर्व सचिव अफजल अमानुल्लाह कहते हैं, "परंपरागत सीटों पर कब्जा बरकरार रखना एक पार्टी के लिए बहुत ही अहम है। इससे पता चलता है कि एक पार्टी लंबे समय तक लगातार मतदाताओं की उम्मीदों पर कैसे खरी उतरी है। कांग्रेस के लिए तो ये सीटें विशेष महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि 2014 में उसने अपना सबसे खराब प्रदर्शन दिया था। "

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English summary
Lok Sabha elections 2019: Congress faces test of popularity in 11 Lok Sabha strongholds
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