Lok Sabha Chunav: बीजेपी ने इस बार कहां किस राजवंश पर लगाया दांव? अबतक सामने आए हैं ये 10 चेहरे
Royal Family Candidates from BJP in Lok Sabha Elections 2024: इस बार के लोकसभा चुनाव में पुराने राजघरानों के वंशजों के लिए बीजेपी सबसे अहम ठिकाना बन गई है। अभी तक बीजेपी ने कम से कम 10 ऐसे उम्मीदवारों को टिकट दिए हैं या जिनका नाम लगभग फाइनल है, जो किसी ने किसी पूर्ववर्ती शाही परिवार से ताल्लुक रखते हैं।
एक जमाना था, जब राजनीति में संभावनाएं तलाशने वाले राजपरिवारों के लिए कांग्रेस की ओर आकर्षण नजर आता था। लेकिन, अबकी बार लग रहा है कि इनमें से ज्यादातर ने भारतीय जनता पार्टी को ही अपने सियासी करियर के लिए सुरक्षित ठिकाना मान लिया है।

1) मैसूर राजघराने के बीजेपी उम्मीदवार
बीजेपी ने जब कर्नाटक की मैसूर लोकसभा सीट से इस बार यदुवीर कृष्णादत्ता चामराजा वाडियार को उम्मीदवार घोषित किया तो यह नाम काफी चौंकाने वाला लगा। मशहूर मैसूर राजघराने के इस सदस्य का भाजपा से चुनाव लड़ना खास मायने रखता है।

क्योंकि, उनके दादा श्रीकांतदत्ता नरसिम्हाराजा वाडियार 1999 तक चार बार कांग्रेस से सांसद रह चुके थे। 2004 में उन्होंने चुनाव हारने के बाद राजनीति छोड़ दी थी। अब इस शाही परिवार के नए सदस्य ने बीजपी के माध्यम से राजनीति में एंट्री ली है।
2) कृष्णानगर में 'राजमाता' पर दांव
इस बार पश्चिम बंगाल का चुनाव बीजेपी और टीएमसी दोनों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। दोनों पार्टियां एक-एक सीट के लिए बहुत ही ज्यादा संघर्ष कर रही हैं। ऐसी ही एक सीट कृष्णानगर है, जहां से तृणमूल नेता ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी की तेज-तर्रार सांसद रह चुकीं नेता महुआ मोइत्रा को दोबारा मौका दिया है।

महुआ मोइत्रा के खिलाफ बीजेपी ने पूर्ववर्ती कृष्णानगर राजपरिवार की 'रानी मां' या 'राजमाता' अमृता रॉय को टिकट दिया है। यह सीट भाजपा के लिए कितनी अहम है, इसका अंदाजा तभी लग गया था जब खुद प्रधानमंत्री ने रॉय से फोन पर बात की थी।
3) राजसमंद से मेवाड़ राजघराने के सदस्य को मौका
राजस्थान की राजसमंद सीट से महिमा कुमारी विश्वराज सिंह मेवाड़ बीजेपी प्रत्याशी हैं। वह विश्वराज सिंह की पत्नी हैं, जो मेवाड़ राजघराने के सदस्य हैं। विधानसभा चुनावों से पहले ही राजपूतों के इस गढ़ में सिंह बीजेपी में शामिल हुए थे और नाथद्वारा से चुनाव लड़ा था।

4) त्रिपुरा ईस्ट से कृति सिंह देबबर्मा उम्मीदवार
इसी तरह से त्रिपुरा ईस्ट लोकसभा सीट से पार्टी ने कृति सिंह देबबर्मा को उम्मीदवार बनाया है। वो त्रिपुरा के माणिक्य राजपरिवार की सदस्य हैं। वो टिपरा मोथा पार्टी के नेता प्रद्योत देबबर्मा की बड़ी बहन भी हैं, जो पार्टी प्रदेश की एनडीए सरकार का हिस्सा है। कृति के पति योगेश्वर राज सिंह भी कवर्धा राजघराने के वंशज हैं।

5) कालाहांडी में 'कमल' खिलाने के लिए राजघराने पर भरोसा
बीजेपी ने इस बार ओडिशा की कालाहांडी लोकसभा सीट से मालविका केशरी देव को चुनाव मैदान में उतारा है। वो प्रदेश में सत्ताधारी बीजेडी के पूर्व सांसद अर्का केशरी देव की पत्नी हैं, जो कालाहांडी राजघराने के सदस्य हैं। दोनों पति-पत्नी ने पिछले साल ही भाजपा का 'कमल' थामा था।

6) पटियाला में इस बार बदल गया है समीकरण
पंजाब में कांग्रेस की पूर्व सांसद परनीत कौर ने हाल ही में बीजेपी का साथ पकड़ा है। उनके पति कैप्टन अमरिंदर सिंह पहले ही बीजेपी में शामिल हो चुके हैं, जो कि पटियाला राजघराने के सदस्य हैं। परनीत कौर फिर से पटियाला से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ने की इच्छा जता चुकी हैं।

7) अबकी बार कमल निशान लेकर गुना के मैदान में हैं सिंधिया
मध्य प्रदेश में ग्वालियर राजघराने के ज्योतिरादित्य सिंधिया इस बार भाजपा के टिकट पर अपनी परंपरागत गुना सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। केंद्रीय मंत्री सिंधिया अबतक यहां से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते थे। फिलहाल वो राज्यसभा के सदस्य हैं।

8) बलांगीर से फिर मैदान में हैं संगीता कुमारी सिंह देव
ओडिशा में बीजेपी ने बलांगीर सीट से अपनी सांसद संगीता कुमारी सिंह देव पर फिर से भरोसा जताया है। वह इस बार भी इसी सीट से चुनाव मैदान में हैं। संगीता कुमारी सिंह देव ओडिशा की पटनागढ़-बलांगीर राजपरिवार की सदस्य हैं।

9) धौलपुर राजघराने पर भाजपा का भरोसा बरकरार
राजस्थान की झालावाड़ बारां लोकसभा सीट से तीन बार के सदस्य दुष्यंत सिंह को बीजेपी ने चौथी बार भी यहीं से चुनाव मैदान में उतारा है। वह धौलपुर राजघराने से ताल्लुक रखते हैं।

10) छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज पर भी लगाना चाहती है दांव
महाराष्ट्र की सतारा लोकसभा सीट को लेकर महायुति गठबंधन में बीजेपी की सहयोगियों के साथ बातचीत चल रही है। भाजपा किसी भी सूरत में इस सीट पर अपने राज्यसभा सदस्य उदयराजे भोसले को उतारना चाहती है। भोसले छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज हैं।

2019 में वे एनसीपी के टिकट पर चुनाव जीते थे। उन्होंने इस्तीफा देकर उपचुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। बाद में बीजेपी ने उन्हें राज्यसभा के माध्यम से संसद में पहुंचा दिया था।












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