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उम्मीदवारों से ज्यादा लोगों को भाया NOTA, PM मोदी की वाराणसी सीट सहित इन क्षेत्रों में कैंडिडेट्स को छोड़ा पीछे

NOTA: दुनिया के सबसे बड़े गणतंत्र, भारत का 18वां लोकसभा चुनाव संपन्न हो चुका है और परिणाम भी आ चुके हैं। नतीजों को देख कर ये पता चलता है कि आखिर हमारा देख सबसे बड़ा गणतंत्र क्यों कहा जाता है। एग्जिट पोल से लेकर चुनावी जानकारों के अनुमान को गलत साबित करते हुए इस बार के नतीजों ने सभी को चौंका दिया है।

सबसे दिलचस्प बात है इस बार के लोकसभा चुनाव में नोटा- 'इनमें से कोई भी नहीं' (NOTA- None of the above) को मिले वोट। कई क्षेत्रों में नोटा को कई प्रत्याशियों से अधिक वोट मिले हैं। उम्मीदवारों के लेकर लोगों के मन का असंतोष इस से झलकता है। कई सीटें ऐसी हैं जहां नोटा को निर्दलीय प्रत्याशियों से ज्यादा वोट मिले और नतीजों में नोटा चौथे स्थान पर रहा।

NOTA gets more votes than many independent candidates

दिलचस्प बात यह है कि पीएम मोदी की लोकसभा सीट वाराणसी में भी लोगों ने नोटा को जमकर वोट दिए। वाराणसी लोकसभा सीट पर नोटा वोटों के मामले में चौथे स्थान पर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 612970 वोट मिले, जबकि 460457 वोट के साथ इंडिया गठबंधन के अजय राय दूसरे नंबर पर रहे। तीसरे नंबर पर बसपा के अतहर जमाल लारी रहे जिन्हें 33766 वोट मिले, जबकि चौथे नंबर पर नोटा रहा। वाराणसी की जनता ने 8478 बार नोटा का बटन दबाया।

इन लोकसभा सीटों पर 'NOTA' को मिला चौथा स्थान

  • लखनऊ लोकसभा सीट: राजनाथ सिंह की लखनऊ सीट पर भी नोटा को जमकर वोट मिले। यहां 7350 लोगों ने नोटा का बटन दबाया।
  • गौतमबुद्ध नगर लोकसभा सीट: गौतमबुद्ध नगर में भी नोटा चौथे नंबर पर रहा है। यहां 10324 बार नोटा का बटन दबाया गया।
  • मेरठ लोकसभा सीट: मेरठ में भी नोटा को जमकर वोट मिले। इस सीट पर 4776 लोगों ने नोटा का बटन दबाया। यहां नोटा ने पांच निर्दलीय उम्मीदवारों को पछाड़ दिया।
  • गोरखपुर लोकसभा सीट: सीएम योगी आदित्यनाथ के गृहक्षेत्र और रवि किशन का संसदीय क्षेत्र गोरखपुर में भी नोटा ने दस उम्मीदवारों को पीछे छोड़ा। यहां 7881 लोगों ने नोटा को चुना।
  • बरेली लोकसभा सीट: बरेली सीट में भी नोटा चौथे नंबर पर रहा। 6260 वोटों के साथ नोटा ने यहां दस निर्दलीय प्रत्याशियों को पछाड़ दिया।
  • पीलीभीत लोकसभा सीट: पीलीभीत में भी लोगों ने उम्मीदवारों से ज्यादा नोटा को पसंद किया। सात उम्मीदवारों को पीछे छोड़ते हुए नोटा को यहां 6741 वोट मिले।
  • बदायूं लोकसभा सीट: बदायूं सीट जहां शिवपाल सिंह यादव के बेटे आदित्य यादव ने जीत दर्ज की है, यहां भी नोटा का जलवा रहा। बदायूं सीट पर नोटा को 8562 वोट मिले।

इसके अलावा मैनपुरी, कन्नौज, आजमगढ़ और गाजीपुर जैसी सीटों पर भी मतदाताओं ने नोटा को काफी पसंद किया और यह चौथे स्थान पर रहा। इनके अलावा भी यूपी की कई और सीटों पर नोटा ने निर्दलीय उम्मीदवारों को पीछे छोड़ते हुए चौथा या पांचवां स्थान पाया है।

क्या हैं नोटा के नियम?

नोटा (NOTA) जिसका अर्थ होता है कि 'इनमें से कोई नहीं' चुनाव के दौरान एक विकल्प होता है। यदि वोटर को प्रत्याशियों में से कोई पसंद नहीं आ रहा तो ऐसे में वो नोटा को चुन सकते हैं।

2013 तक, यदि लोग इसी तरह के विकल्प का प्रयोग करना चाहते थे, तो उन्हें चुनाव संचालन के नियम 49-ओ के तहत ऐसा करना पड़ता था। यह प्रक्रिया कठिन थी क्योंकि इसमें मतदान केंद्र पर एक फॉर्म भरना शामिल था। 2013 में नोटा के आने के बाद यह ऑप्शन चुनना आसान हो गया क्योंकि इसके लिए ईवीएम में ही बटन दबाना होता है। हालांकि, पुनः चुनाव जैसी घटना के लिए कितने प्रतिशत NOTA वोटों पर विचार किया जा सकता है, यह एक बहुत बहस का विषय है।

2024 में देशभर में नोटा को मिले कितने वोट?

2024 के लोकसभा चुनाव में 63,47,509 मतदाताओं ने 'उपरोक्त में से कोई नहीं' चुनते हुए नोटा बटन दबाया। 2019 के लोकसभा चुनाव में कुल 65,20,000 नोटा वोट पड़े, जिनमें से 22,272 वोट डाक मतपत्र थे। जहां 2019 में 1.06 प्रतिशत मतदाताओं ने नोटा विकल्प दबाया, वहीं 2014 के लोकसभा चुनावों में 1.08 प्रतिशत मतदाताओं ने नोटा विकल्प दबाया।

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