चुनाव आयोग ने नतीजों के 2 दिन बाद जारी किए वोटिंग के दिलचस्प आंकड़े, जानें कहां पड़े कितने वोट
Lok Sabha Election Voting Percentage: लोकसभा चुनाव के नतीजे जारी होने के दो दिनों बाद चुनाव आयोग ने वोटर्स का डेटा शेयर किया है। इस डेटा के अनुसार देशभर में लोकसभा चुनाव 2024 में कुल मिलाकर 65.79 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है।
चुनाव आयोग ने गुरुवार को कहा कि हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव में 65.79 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, लेकिन अंतिम आंकड़े बदल सकते हैं क्योंकि इसमें डाक मतपत्र शामिल नहीं हैं। बता दें, 2019 के संसदीय चुनावों में, मतदान का प्रतिशत 67.40 रहा था।

ईसीआई द्वारा जारी लिस्ट के अनुसार लक्षद्वीप में सभी राज्यों के मुकाबले सबसे अधिक 84.16 प्रतिशत मतदान हुआ। जबकि सबसे कम वोटिंग प्रतिशत बिहार में देखने को मिला। बिहार में केवल 56.19 प्रतिशत मतदान हुआ है।
आयोग ने बताया कि डाक वोटों की संख्या और सकल मतदाता मतदान की विस्तृत सांख्यिकीय रिपोर्ट मानक अभ्यास के अनुसार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त विवरणों को अंतिम रूप देने के बाद उपलब्ध कराई जाएगी।
इलेक्शन कमीशन द्वारा शेयर किए गए लिस्ट के अनुसार केंद्रशासित प्रदेश दादर नागर हवेली एवं दमन दीव, लद्दाक, लक्षद्वीप, मिजोरम और नागालैंड में एक भी रजिस्टर्ड ट्रांसजेंडर मतदाता नहीं है हैं।
इस चुनाव में मेघालय के 100 फिसदी 'अन्य' श्रेणी के मतदाताओं ने अपने मतों का प्रयोग किया है। जबकि, बिहार में सबसे कम, 6.40 प्रतिशत 'अन्य' श्रेणी के वोटर्स ने वोट डाला है। बिहार का ओवरऑल मतदान प्रतिशत भी इस बार सबसे कम रहा है। देशभर में कुल 'अन्य' मतदाता श्रेणी के 27.08 प्रतिशत वोटर्स ने मतदान किया है।
इस लोकसभा चुनाव में लक्षद्वीप की महिलाओं ने मतदान में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। लक्षद्वीप में महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत 85.47 रहा, जो की बाकी राज्यों के मुकाबले सबसे अधिक है। पुरुषों का भी वोटिंग परसेंटेज सबसे अधिक लक्षद्वीप में ही रहा। यहां 82.88 पुरुष मतदाताओं ने वोट डाले।
इस सप्ताह की शुरुआत में, मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा था कि भारत ने हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनावों में 64.2 करोड़ मतदाताओं के उल्लेखनीय मतदान के साथ इतिहास रचा है। उन्होंने आगे इस बात पर प्रकाश डाला कि यह आंकड़ा G7 देशों के संयुक्त कुल मतदाताओं से 1.5 गुना अधिक है।
इन प्रभावशाली आंकड़ों में 31.2 करोड़ महिलाएं भी शामिल हैं। महिलाओं की इस स्तर पर भागीदारी एक वैश्विक बेंचमार्क स्थापित करती है। विशेष रूप से, इस वर्ष केवल 39 पुनर्मतदान आवश्यक थे, जो 2019 के चुनावों के दौरान किए गए 540 पुनर्मतदानों से एक महत्वपूर्ण गिरावट है।












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