अचानक इतना अधिक सक्रिय कैसे हुआ NDA, सिर्फ एक महीने में BJP ने क्या-क्या किया? जानिए
25 साल पुराने राष्ट्र जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को लेकर इसकी अगुवा पार्टी बीजेपी अचानक जितनी सक्रिय पिछले एक महीने में हुई है, वह 2014 के बाद से तो संभवत: नहीं ही दिखाई दिया है।
पिछले महीने 18 जुलाई को दिल्ली में एनडीए की जो बैठक बुलाई गई थी, वह लगभग पांच साल बाद आयोजित हुई थी। हालांकि, एनडीए फिर से सक्रिय होगा इसके संकेत खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पिछले कुछ समय से मिलने लगे थे। यह तब की बात है, जब विपक्षी इंडिया गठबंधन का ठोस आधार तैयार भी नहीं हुआ था।

महीने भर में एनडीए को लेकर बहुत ज्यादा सक्रिय हुई बीजेपी
लेकिन, पिछले एक महीने के भीतर एनडीए को फिर सक्रिय करने में बीजेपी ने जो जोश और उत्साह दिखाया है, वह अप्रत्याशित है। 18 जुलाई की बैठक के बाद, पीएम मोदी ने एनडीए सांसदों के साथ अलग-अलग समूहों में 31 जुलाई से करीब दस दिनों तक 11 बैठकें कीं और टीम भावना के साथ काम करने का आह्वान किया।
एनडीए के प्रवक्ताओं के लिए आयोजित हो चुका है वर्कशॉप
फिर एनडीए के सहयोगियों के लिए बीजेपी ने पिछले दिनों राजधानी दिल्ली में प्रवक्ताओं का एक वर्कशॉप आयोजित कराया। इसके माध्यम से यह प्रयास रहा कि कैसे सहयोगी दलों में मीडिया के स्तर पर सरकार और गठबंधन को लेकर बयानों में तालमेल और एकजुटता बनाए रखनी है।
अटल जी के पुण्यतिथि पर भी एकजुटता का प्रदर्शन
एनडीए को गतिशील बनाए रखने के लिए बीजेपी की सबसे ताजा पहल पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 5वीं पुण्यतिथि पर दिखी है। 16 अगस्त को दिल्ली में उनकी समाधि 'सदैव अटल' पर आयोजित प्रार्थना सभा के लिए पार्टी की ओर से एनडीए के पार्टरों को औपचारिक निमंत्रण देकर बुलाया गया था। शायद इस तरह की पहल पहली बार की गई है। इस तरह से ठीक एक महीने के अंदर कम से कम चार तरह के आयोजन हो चुके हैं, जब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सहयोगी आपस में मिल चुके हैं।
'सदैव अटल' पर एनडीए के मौजूदा और पूर्व सहयोगी भी पहुंचे
हम एनडीए की एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए बीजेपी के हाइपर ऐक्टिव होने की बात इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों के गठबंधन की गतिविधियों पर नजर डालें तो यह पूरी तरह से विपरीत है। अटल जी के लिए आयोजित प्रार्थनना सभा में एनडीए के जो नेता शामिल हुए, उनमें एनसीपी के अजित पवार गुट के प्रफुल्ल पटेल, अपना दल की अनुप्रिया पटेल, एनपीपी की अगाथा संगमा, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के जीतन राम मांझी जैसे नेता भी शामिल थे।
यही नहीं सदैव अटल पर श्रद्धांजलि देने वालों में एनडीए के पूर्व सहयोगी नेताओं में टीडीपी के प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू और शिरोमणि अकाली दल के चीफ सुखबीर सिंह बादल भी शामिल थे। वैसे फिलहाल इंडिया गठबंधन के साथ चल रहे जेडीयू नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी अटलजी को श्रद्धांजलि देने पहुंचे वाले नेताओं में शामिल रहे।
पिछले एक महीने में इंडिया गठबंधन की नहीं हुई कोई बैठक
इसके ठीक उलट पिछले एक महीने में विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन के सहयोगियों को इस तरह से एक मंच पर जुटने का कोई अवसर नहीं बना है। यही नहीं वैसे तो विपक्षी गठबंधन की ओर भी पूरी तरह से एकजुटता का प्रदर्शन करने की कोशिश लगातार चल रही है। लेकिन, कभी दिल्ली में तो कभी महाराष्ट्र में और कभी गुजरात में तो कभी पश्चिम बंगाल में मतभेद की स्थिति भी लगातार पैदा हो रही हैं। उनकी अगली बैठक 31 अगस्त को मुंबई में होने वाली है।
अचानक इतना अधिक सक्रिय क्यों हुआ एनडीए?
अगर पिछले एक महीने के सियासी घटनाक्रम को देखें तो संसद के मानसून सत्र के दौरान दो महत्वपूर्ण चीजें हुईं। पहला दिल्ली सेवा विधेयक संसद के दोनों सदनों से भारी बहुमत से पास हुआ और दूसरा मणिपुर के मुद्दे पर विपक्षी इंडिया गठबंधन की ओर से मोदी सरकार के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव लोकसभा में बुरी तरह गिर गया। इन दोनों सियासी मामले में एनडीए की एकजुटता विपक्षी तालमेल पर भारी साबित हुई है। शायद यही वजह है कि बीजेपी ने पांच साल तक एनडीए को निष्क्रिय स्थिति में रखने के बाद अचानक इतना ज्यादा सक्रिय किया है।












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